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Strait of Hormuz : क्या 12 दिनों में शुरू होने वाला है महायुद्ध? ईरान ने चली ऐसी चाल कि कांप उठी दुनिया, ट्रंप भी हैरान

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News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से वापसी का रास्ता नजर नहीं आ रहा। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की सांसें थाम दी हैं। ताजा रिपोर्टों की मानें तो अगले 12 दिन पूरी दुनिया के लिए बेहद नाजुक होने वाले हैं। ईरान ने अब ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर एक ऐसा दांव खेलने की तैयारी कर ली है, जिससे न केवल ग्लोबल इकोनॉमी चरमरा सकती है, बल्कि अमेरिका के भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नजर, क्यों डरी हुई है दुनिया? ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी इस जुबानी और मिसाइल जंग में अब समुद्र का रास्ता सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक तिहाई हिस्सा गुजरता है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि उस पर हमला हुआ या उसकी तेल संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग जाएगी और पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे।

12 दिनों का काउंटडाउन और ट्रंप का चक्रव्यूह राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान अगले 12 दिनों के भीतर कोई बड़ा कदम उठा सकता है। यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है। डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की संभावनाओं के बीच ईरान खुद को सामरिक रूप से मजबूत दिखाना चाहता है। ईरान को डर है कि ट्रंप के आने के बाद उन पर प्रतिबंध और कड़े हो जाएंगे, इसलिए वह ‘ट्रंप ट्रैप’ से बचने के लिए पहले ही अपनी ताकत का प्रदर्शन कर इजरायल और उसके सहयोगियों को बैकफुट पर धकेलना चाहता है।

तेल की किल्लत और आर्थिक मंदी का खतरा ईरान के इस संभावित कदम से सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि भारत समेत तमाम विकासशील देश प्रभावित होंगे। होर्मुज के रास्ते बंद होने का सीधा मतलब है वैश्विक अर्थव्यवस्था में हाहाकार। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रूट से मंगवाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का यह दांव इजरायल को सीधे तौर पर सैन्य जवाब देने से ज्यादा घातक साबित हो सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर दुनिया की जेब पर हमला होगा।

इजरायल की जवाबी कार्रवाई और ईरान की तैयारी इजरायल पहले ही कह चुका है कि वह ईरान के परमाणु ठिकानों और तेल डिपो को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स को अलर्ट मोड पर रखा है। होर्मुज के आसपास ईरानी नौसेना की हलचल बढ़ गई है। अब देखना यह होगा कि क्या कूटनीति के जरिए इस महायुद्ध को टाला जा सकता है या फिर अगले 12 दिन इतिहास के सबसे काले दिनों में दर्ज होने वाले हैं।

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