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Human Body Heat Limit : क्या आप जानते हैं कितनी गर्मी सह सकता है इंसान का शरीर? इस लिमिट के पार जाते ही मौत का खतरा!

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News India Live, Digital Desk: भारत समेत पूरी दुनिया में गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। बढ़ता पारा न केवल हमारे आराम में खलल डाल रहा है, बल्कि यह सीधे तौर पर हमारे जीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इंसान का शरीर अधिकतम कितनी गर्मी बर्दाश्त कर सकता है? वैज्ञानिकों ने हाल ही में ‘वेट-बल्ब टेम्परेचर’ (Wet-Bulb Temperature) के जरिए शरीर की उस अंतिम सीमा का पता लगाया है, जिसके आगे जाते ही शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं और मौत का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

क्या है ‘वेट-बल्ब’ तापमान? जिस पर फेल हो जाता है शरीर का कूलिंग सिस्टम

आमतौर पर हम जो तापमान देखते हैं, वह हवा की गर्मी होती है, लेकिन शरीर पर गर्मी का असर नमी (Humidity) के साथ बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि वेट-बल्ब तापमान 35°C तक पहुँच जाए, तो स्वस्थ से स्वस्थ व्यक्ति भी 6 घंटे से अधिक जीवित नहीं रह सकता। दरअसल, जब बाहर नमी ज्यादा होती है, तो शरीर का पसीना नहीं सूख पाता। पसीना न सूखने का मतलब है कि शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, जिससे अंदरूनी तापमान (Core Temperature) खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है।

बढ़ती गर्मी का अंगों पर वार: ऐसे होता है मल्टी-ऑर्गन फेलियर

जब शरीर अपनी सीमा से अधिक गर्मी के संपर्क में आता है, तो दिल को शरीर को ठंडा रखने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हृदय गति (Heart Rate) बढ़ जाती है और ब्लड प्रेशर गिर सकता है। यदि शरीर का अंदरूनी तापमान 40°C के पार चला जाए, तो दिमाग, किडनी और लिवर जैसे नाजुक अंगों में सूजन आने लगती है। इसे ही ‘हीट स्ट्रोक’ कहा जाता है। इस स्थिति में अगर तुरंत इलाज न मिले, तो शरीर के अंदरूनी प्रोटीन्स ‘पकने’ लगते हैं और कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं।

बुजुर्गों और बच्चों के लिए कम है यह ‘डेंजर लाइन’

35°C वेट-बल्ब तापमान की सीमा एक स्वस्थ युवा के लिए है। लेकिन बुजुर्गों, बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह सीमा और भी कम हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की पसीना निकालने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे उन्हें कम तापमान पर भी लू लगने या दिल का दौरा पड़ने का खतरा रहता है। हालिया रिसर्च बताती है कि कई मामलों में 31°C का वेट-बल्ब तापमान भी इंसानी शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

भीषण गर्मी में खुद को कैसे रखें सुरक्षित?

गर्मी के इस जानलेवा प्रकोप से बचने के लिए हाइड्रेटेड रहना सबसे जरूरी है। केवल प्यास लगने पर ही नहीं, बल्कि नियमित अंतराल पर पानी, ओआरएस (ORS) या नारियल पानी पीते रहें। दोपहर के समय जब सूरज अपने चरम पर हो, तो बाहर निकलने से बचें। ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे। याद रखें, बढ़ता तापमान अब केवल एक मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है जिसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

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