ईरान में साइलेंट तख्तापलट’? IRGC का सत्ता पर बढ़ता कब्जा और सुप्रीम लीडर की रहस्यमयी गैरमौजूदगी क्या सैन्य शासन की ओर बढ़ रहा है देश?

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News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भीषण युद्ध और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान के भीतर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ज़ी न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश के प्रशासनिक और रणनीतिक फैसलों पर अपना नियंत्रण अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में एक तरह का ‘साइलेंट तख्तापलट’ (Silent Coup) जैसी स्थिति बन गई है, जहां राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को साइडलाइन कर सेना (IRGC) ने कमान अपने हाथों में ले ली है।

सत्ता के समीकरणों में बदलाव: IRGC बनाम निर्वाचित सरकार

पिछले कुछ हफ्तों में हुए घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की विदेश नीति और सैन्य अभियानों का नेतृत्व अब पूरी तरह से IRGC के जनरलों के पास है।

राष्ट्रपति की स्थिति: राष्ट्रपति पेजेशकियान, जो सुधारवादी चेहरे के रूप में आए थे, अब बड़े फैसले लेने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।

सुप्रीम लीडर का सस्पेंस: सबसे अधिक चिंताजनक बात सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्थिति है, जो पिछले कई दिनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। उनकी गैरमौजूदगी ने ईरान के शक्ति केंद्र में एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है, जिसे IRGC भरने की कोशिश कर रही है।

संकट प्रबंधन और सैन्य सुदृढ़ीकरण (State Power Consolidation)

IRGC ने केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि देश के आर्थिक और संकट प्रबंधन (Crisis Management) ढांचे पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है।

क्षेत्रीय प्रभुत्व: इजरायल और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच IRGC ने हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों के साथ समन्वय की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली है।

आंतरिक नियंत्रण: देश के भीतर बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक संकट को देखते हुए IRGC ने खुफिया नेटवर्क और पुलिसिंग पर भी अपना प्रभाव बढ़ा दिया है, ताकि किसी भी प्रकार के आंतरिक विद्रोह को दबाया जा सके।

क्या शांति की कोई संभावना है? (Prospects for Peace)

वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि IRGC का बढ़ता वर्चस्व शांति की संभावनाओं (Prospects for Peace) के लिए एक बड़ी चुनौती है।

कट्टरपंथी रुख: IRGC ऐतिहासिक रूप से कूटनीति के बजाय सैन्य प्रतिरोध में विश्वास रखती है। ऐसे में अमेरिका के साथ किसी भी परमाणु समझौते या क्षेत्रीय शांति वार्ता के सफल होने की उम्मीद कम हो गई है।

रिजीम चेंज की सुगबुगाहट: डोनाल्ड ट्रम्प के कड़े रुख और इजरायली हमलों के बाद, ईरान में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हैं। यदि IRGC पूरी तरह सत्ता पर काबिज होती है, तो पश्चिम के साथ टकराव और अधिक हिंसक हो सकता है।

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