
कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला दीपोत्सव और महालक्ष्मी पूजन भारतीय संस्कृति व सनातन परंपरा का सबसे पावन पर्व है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि को मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से साधक के जीवन से दरिद्रता, आर्थिक तंगी और नकारात्मक ऊर्जा सदा के लिए समाप्त हो जाती है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दिवाली पूजन का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब पूजा पूरी निष्ठा, पवित्रता और सही नियमों के पालन के साथ की जाए। अक्सर अनजाने में हुई छोटी-छोटी भूल या गलतियां पूजा के पूर्ण फल में बाधा पैदा कर देती हैं। इसलिए इस दिवाली यदि आप भी अपने घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और मां लक्ष्मी का स्थायी वास चाहते हैं, तो पूजन से जुड़े मुख्य नियमों, सही विधि तथा ‘क्या करें और क्या न करें’ की विस्तृत जानकारी का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।
दिवाली पूजन के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करने के बाद सबसे पहले पूरे घर, विशेषकर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और पूजा स्थल की गंगाजल छिड़ककर पवित्र सफाई करें। घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं और मां लक्ष्मी के पद-चिह्न तथा रंगोली सजाएं, क्योंकि मुख्य द्वार से ही शुभ ऊर्जा का प्रवेश होता है। शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करते समय लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियां स्थापित करें, जिसमें गणेश जी को हमेशा लक्ष्मी जी के बाईं ओर रखना चाहिए। पूजा में धन की देवी को लाल गुलाब, कमल का फूल, कमलगट्टा, कौड़ी, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, धनिया, बताशे और खीर का भोग अवश्य लगाएं। इसके अतिरिक्त, ईशान कोण या उत्तर दिशा में चौमुखी देसी घी का मुख्य दीपक जलाएं जो पूरी रात प्रज्वलित रहे। पूजा के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार, दिवाली पूजन की पावन रात कुछ विशेष कार्यों को करने से सख्त परहेज करना चाहिए ताकि माता लक्ष्मी अप्रसन्न न हों। पूजा स्थल या घर के किसी भी कोने में खंडित मूर्तियां, टूटे-फूटे बर्तन, बंद पड़ी घड़ियां या जंग लगा पुराना सामान न रखें, इन्हें दिवाली से पहले ही घर से बाहर कर देना चाहिए। पूजा के समय भूलकर भी काले, भूरे या गहरे नीले रंग के वस्त्र धारण न करें; इसके बजाय लाल, पीले, गुलाबी या नारंगी रंग के नए कपड़े पहनना अत्यंत शुभ होता है। लक्ष्मी पूजन के दौरान घर में किसी भी प्रकार का गृह-कलेश, गुस्सा, अपशब्द या बुजुर्गों का अनादर न करें, क्योंकि जिस घर में अशांति होती है वहां लक्ष्मी जी कभी निवास नहीं करतीं। इसके अलावा, पूजा में तुलसी दल या दूर्वा (लक्ष्मी जी को नहीं चढ़ानी चाहिए) चढ़ाने से बचें और आरती के बाद घर के मुख्य द्वार को देर रात तक पूरी तरह बंद न करें। इन नियमों का नियमपूर्वक पालन करने से आपके जीवन में खुशहाली और अपार धन-धान्य की वर्षा होगी।
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