
बिहार के कड़क, अनुशासनप्रिय और सख्त प्रशासनिक छवि वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीके अनिल ने शिक्षा विभाग की कमान संभालते ही अपनी कार्यशैली और सख्त तेवरों का प्रत्यक्ष प्रमाण दे दिया है। विभाग का पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने राज्य की चरमराती स्कूली शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति और जिलों में चल रही प्रशासनिक शिथिलता को दुरुस्त करने के लिए एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। सीके अनिल के निर्देश पर राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राजधानी पटना समेत प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) का एक साथ तबादला कर दिया है। इस अचानक और व्यापक फेरबदल की खबर जैसे ही शिक्षा विभाग के गलियारों में पहुंची, पूरे प्रशासनिक तंत्र और जिला स्तरीय अफसरों में हड़कंप मच गया है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद सभी नए अधिकारियों को तुरंत अपने-अपने संबंधित जिलों में पदभार ग्रहण करने का सख्त हुक्म जारी किया गया है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक तबादला सूची के अनुसार, राजधानी पटना के प्रशासनिक संतुलन और निगरानी को मजबूत करने के लिए नए जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, सारण (छपरा), रोहतास, बेगूसराय और समस्तीपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में भी नए और सख्त अफसरों को डीईओ पद पर तैनात किया गया है। विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय उन जिलों की प्रदर्शन समीक्षा (Performance Audit) और हालिया प्रशासनिक शिकायतों के आधार पर लिया गया है जहां योजनाओं के क्रियान्वयन और शिक्षकों की समय पर बायोमेट्रिक हाजिरी में लापरवाही देखी जा रही थी। आईएएस सीके अनिल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल कागजी रिपोर्टिंग से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर अधिकारी को अपने जिले के दूर-दराज के सरकारी स्कूलों का धरातल पर जाकर औचक निरीक्षण करना होगा। जिन अफसरों का ट्रैक रिकॉर्ड पिछले कुछ समय में सुस्त पाया गया था, उन्हें लूप लाइन या कम महत्वपूर्ण पदों पर भेज दिया गया है, जबकि बेहतर कार्य संस्कृति वाले अफसरों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
आईएएस अधिकारी सीके अनिल अपनी बेबाक कार्यशैली और नियमों के सख्त पालन के लिए जाने जाते हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने विभागीय समीक्षा बैठक में साफ कर दिया कि सरकारी विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाना, मिड-डे मील योजना (MDM) की गुणवत्ता में सुधार करना और शिक्षकों की शत-प्रतिशत समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी जिले में यदि बिना पूर्व सूचना के शिक्षक या कर्मचारी गायब पाए जाते हैं, तो संबंधित जिले के डीईओ की भी जवाबदेही तय की जाएगी। इसके साथ ही, विद्यालयों के ढांचागत विकास और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के फंड के पारदर्शी इस्तेमाल को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। सीके अनिल के इस आक्रामक रुख से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में बिहार का शिक्षा विभाग बड़े सुधारात्मक बदलावों का साक्षी बनने जा रहा है, जहां सुस्ती और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं होगी।
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