
सर्दियों के मौसम में घने कोहरे, तकनीकी खराबी या एयरलाइंस के परिचालन कारणों से उड़ानों में देरी होना हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक आम और बेहद तनावपूर्ण समस्या बन जाता है। घंटों तक एयरपोर्ट लाउंज या बोर्डिंग गेट पर फंसे यात्रियों को अक्सर यह जानकारी नहीं होती कि टिकट की कीमत में केवल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना ही शामिल नहीं है, बल्कि उड़ान में अनुचित देरी होने पर एयरलाइंस की कई कानूनी जवाबदेहियां भी तय होती हैं। भारत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने ‘सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स’ (CAR Section 3, Series M, Part IV) के तहत पैसेंजर चार्टर में यात्रियों के लिए कड़े और स्पष्ट नियम तय किए हैं। यदि आपकी फ्लाइट 2 घंटे, 4 घंटे या 6 घंटे से अधिक लेट होती है, तो एयरलाइन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। डीजीसीए के इन नियमों के तहत यात्रियों को मुफ्त जलपान से लेकर बिना किसी कटौती के पूरा रिफंड या होटल में रुकने की सुविधा पाना वैधानिक अधिकार है।
डीजीसीए के आधिकारिक नियमों के अनुसार, उड़ान के ब्लॉक समय (Block Time यानी उड़ान की कुल तय दूरी व अवधि) के आधार पर एयरलाइंस को यात्रियों को अनिवार्य रूप से मुफ्त अल्पाहार (Meals and Refreshments) उपलब्ध कराना होता है:
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ढाई घंटे (2.5 घंटे) तक की उड़ानों के लिए: यदि फ्लाइट अपने निर्धारित समय से 2 घंटे या उससे अधिक लेट होती है, तो एयरलाइन को एयरपोर्ट पर सभी प्रभावित यात्रियों को मुफ्त भोजन या स्नैक्स और पेय पदार्थ देना अनिवार्य है।
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ढाई से पांच घंटे (2.5 से 5 घंटे) तक की उड़ानों के लिए: यदि उड़ान 3 घंटे या उससे अधिक लेट होती है, तो यात्रियों को उचित जलपान और भोजन कूपन मिलना तय है।
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पांच घंटे से अधिक की उड़ानों के लिए: यदि फ्लाइट 4 घंटे या उससे अधिक लेट होती है, तो भी एयरलाइन को पूरा मील (भोजन) उपलब्ध कराना होता है।
अक्सर कई एयरलाइंस इन सुविधाओं की घोषणा खुद नहीं करतीं। ऐसे में यात्री सीधे एयरलाइन के बोर्डिंग गेट या कस्टमर सर्विस काउंटर पर जाकर अपने टिकट और देरी के आधार पर ‘रिफ्रेशमेंट वाउचर’ या भोजन की मांग कानूनी रूप से कर सकते हैं।
यदि किसी उड़ान में देरी का सिलसिला बढ़ता जाता है और यह 6 घंटे या उससे अधिक तक पहुंच जाता है, तो यात्रियों को टिकट रद्द कराने और पूरे पैसे वापस पाने का पूर्ण अधिकार मिलता है।
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फुल रिफंड (Full Refund): यात्री अपनी यात्रा रद्द कर सकते हैं और एयरलाइन को टिकट की पूरी मूल राशि (सभी टैक्स, यूडीएफ और फ्यूल सरचार्ज सहित) बिना कोई कैंसलेशन चार्ज काटे वापस करनी होगी। यह रिफंड क्रेडिट कार्ड या बैंक खाते में 7 कार्यदिवसों के भीतर या नकद भुगतान की स्थिति में तत्काल मिलना अनिवार्य है।
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वैकल्पिक फ्लाइट (Alternative Flight): यदि यात्री यात्रा रद्द नहीं करना चाहते, तो एयरलाइन को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपनी अगली उपलब्ध उड़ान या किसी अन्य पार्टनर एयरलाइन की फ्लाइट में यात्री को सीट आवंटित करनी होगी।
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24 घंटे पहले सूचना का नियम: यदि एयरलाइन को अपनी उड़ान के 6 घंटे से अधिक लेट होने की जानकारी पहले से है, तो उसे उड़ान के निर्धारित समय से कम से कम 24 घंटे पहले यात्री को एसएमएस या ईमेल द्वारा सूचित करना होगा और वैकल्पिक फ्लाइट या पूरे रिफंड का विकल्प देना होगा।
यदि कोई उड़ान ऐसी स्थिति में फंस जाती है जहां देरी रात भर के लिए हो जाती है (Overnight Delay) या उड़ान के मूल समय से 24 घंटे से अधिक का विलंब हो जाता है, तो एयरलाइंस केवल खाने-पीने का कूपन देकर पल्ला नहीं झाड़ सकती।
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ऐसी स्थिति में एयरलाइन को सभी यात्रियों के लिए होटल में ठहरने (Hotel Accommodation) का पूरा प्रबंध अपने खर्चे पर करना होगा।
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होटल तक जाने और वापस एयरपोर्ट आने के लिए मुफ्त कैब या बस (Transfers) की व्यवस्था भी एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी।
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यदि किसी कनेक्टिंग फ्लाइट में पहली उड़ान की देरी के कारण यात्री की आगे की फ्लाइट छूट जाती है (Missed Connection), तो उस यात्री को गंतव्य तक पहुंचाने या ठहरने की पूरी व्यवस्था उसी एयरलाइन को करनी होगी जिसके कारण विलंब हुआ।
यात्रियों को यह समझना जरूरी है कि डीजीसीए के नियम कुछ प्राकृतिक और अप्रत्याशित कारणों को ‘असाधारण परिस्थितियां’ मानते हैं, जिनमें एयरलाइन पर आर्थिक हर्जाना या भारी मुआवजा नहीं थोपा जा सकता। इनमें शामिल हैं:
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खराब मौसम और घना कोहरा (Weather Conditions): दृश्यता (Visibility) शून्य होने या तूफान के कारण उड़ानों का डायवर्जन या देरी।
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एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के निर्देश: रनवे कंजेशन, सुरक्षा अलर्ट या वीवीआईपी मूवमेंट के चलते एटीसी द्वारा क्लीयरेंस न मिलना।
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हवाई क्षेत्र का बंद होना या राजनीतिक अशांति: युद्ध, हड़ताल या सुरक्षा जोखिम की स्थिति।
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हालांकि, ध्यान देने योग्य बात यह है कि भले ही कारण मौसम या एटीसी का हो, 2 घंटे पर भोजन और 6 घंटे पर पूरा रिफंड पाने का अधिकार हर हाल में लागू रहता है, क्योंकि यह यात्री की बुनियादी सुविधा और उसकी सहमति से जुड़ा मामला है।
यदि कोई एयरलाइन देरी के दौरान खाना देने से मना करे या रिफंड में मनमानी कटौती करे, तो यात्री नीचे दिए गए तीन चरणों में तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
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एयरलाइन का नोडल ऑफिसर: हर एयरलाइन की वेबसाइट पर एक नियुक्त ‘नोडल ऑफिसर’ और ‘अपीलेट अथॉरिटी’ का विवरण होता है, जहां सीधे पीएनआर (PNR) के साथ ईमेल भेजा जा सकता है।
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एयरसेवा पोर्टल (AirSewa Portal): केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय का आधिकारिक पोर्टल और मोबाइल ऐप ‘AirSewa’ (airsewa.gov.in) पर टिकट विवरण, बोर्डिंग पास और देरी का प्रमाण अपलोड करके शिकायत दर्ज करें। यहां दर्ज शिकायतों पर एयरलाइंस को निर्धारित समयसीमा में जवाब देना बाध्यकारी होता है।
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राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH): यदि समस्या का हल न निकले, तो उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या उपभोक्ता फोरम में सेवा में कमी (Deficiency in Service) के तहत मुआवजे का दावा ठोका जा सकता है।
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