
हर साल धनतेरस और दीपावली के पावन अवसर पर देश भर के बाजारों में सोने और चांदी के आभूषणों की खरीदारी करने के लिए खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। इस शुभ दिन पर सोना खरीदना बहुत से लोग शुभ मानते हैं, लेकिन अक्सर लोग जल्दबाजी या थोड़ी बहुत छूट (डिस्काउंट) के चक्कर में बिना पक्के बिल या बिना टैक्स इनवॉइस (GST Bill) के ही आभूषण खरीद लेते हैं। अगर आप भी इस त्योहारी सीजन में सोने या चांदी के गहने, सिक्के या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। यदि आप बिना पक्के बिल के खरीदारी करते हैं, तो भविष्य में किसी भी तरह की धोखाधड़ी, मिलावट या शुद्धता संबंधी विवाद होने पर आपकी कहीं भी सुनवाई नहीं होगी और आपको अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि धनतेरस पर सोना खरीदते समय पक्का बिल क्यों जरूरी है और इससे जुड़े कानूनी व वित्तीय नियम क्या कहते हैं।
जब कोई ग्राहक बिना पक्के बिल या बिना जीएसटी इनवॉइस के बाजार से कोई कीमती सामान जैसे सोना खरीदता है, तो कानूनी तौर पर वह उस वस्तु का कोई ठोस सबूत अपने पास नहीं रखता है। जानकारों का कहना है कि जब आप सुनार या ज्वेलर से पक्का बिल लेते हैं, तो उसमें सोने की शुद्धता (कैरेट), हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर, सोने का सटीक वजन, मेकिंग चार्ज और उस पर लगने वाले जीएसटी (3%) का पूरा विवरण दर्ज होता है। यदि भविष्य में आभूषण में खोट निकलती है, सोने की शुद्धता कम पाई जाती है या आप उस गहने को किसी अन्य दुकान पर एक्सचेंज करने या बेचने जाते हैं, तो बिना बिल के कोई भी ज्वेलर उसे लेने से इनकार कर सकता है या औने-पौने दाम लगा सकता है। ऐसे में उपभोक्ता अदालत (Consumer Forum) में भी बिना बिल के आप किसी प्रकार की कानूनी शिकायत दर्ज नहीं करा पाएंगे।
भारत सरकार और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क और 6 अंकों वाले HUID कोड को अनिवार्य कर दिया है। जब भी आप धनतेरस के दिन सोने की खरीदारी करें, तो केवल बिल ही नहीं बल्कि आभूषण पर खुदे हुए हॉलमार्क के निशान की जांच भी अवश्य करें। बिना हॉलमार्क वाले आभूषण अक्सर अशुद्ध या कम कैरेट के होते हैं। पक्के बिल में यह स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि आपने कितने कैरेट (जैसे 22 कैरेट या 24 कैरेट) का सोना खरीदा है और उसका प्रति ग्राम भाव क्या है। कई बार दुकानदार नकद भुगतान के चक्कर में बिना बिल का सोना देकर कम कीमत का लालच देते हैं, लेकिन यह छोटी सी बचत आगे चलकर आपके लिए बहुत बड़ा वित्तीय संकट पैदा कर सकती है।
सोने की खरीद-फरोख्त पर सरकार द्वारा 3 प्रतिशत जीएसटी और 1 प्रतिशत टीसीएस (यदि नकद लेनदेन एक निश्चित सीमा से अधिक हो) का प्रावधान किया गया है। कुछ लोग इस टैक्स से बचने के लिए बिना बिल के सोना खरीदते हैं, जिसे देश के वित्तीय कानूनों के तहत अवैध माना जाता है। पक्का बिल न केवल आपकी खरीदारी को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण होता है कि आपकी संपत्ति वैध (White Money) है। भविष्य में यदि आयकर विभाग (Income Tax) द्वारा संपत्ति या आभूषणों के स्रोत के बारे में पूछा जाता है, तो आपके पास मौजूद पक्का बिल ही आपका सबसे बड़ा कानूनी रक्षक बनता है। इसलिए त्योहार की चमक-धमक में किसी भी प्रकार की शॉर्टकट या बिना बिल वाली खरीदारी से पूरी तरह बचना चाहिए।
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