
देश के टेलीकॉम सेक्टर में एक बार फिर से भारती एयरटेल और मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो के बीच बादशाहत की जंग बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) ने अपने हालिया तिमाही वित्तीय नतीजों (Quarterly Financial Results) में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स (Reliance Jio Platforms) को कई प्रमुख वित्तीय पैमानों पर पीछे छोड़ दिया है। एयरटेल के इस धमाकेदार और ऐतिहासिक प्रदर्शन की बदौलत भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में कंपनी के शेयरों में भारी लिवाली देखने को मिली और शेयर की कीमतें नए ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंच गईं। विश्लेषकों का मानना है कि प्रति यूजर औसतन कमाई (ARPU) में हुई बढ़ोतरी और 5G नेटवर्क के तेजी से होते विस्तार ने भारती एयरटेल को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाई है, जिससे पूरे टेलीकॉम बाजार का राजनीतिक व आर्थिक समीकरण बदल गया है।
वित्तीय वर्ष की हालिया तिमाही में भारती एयरटेल का प्रदर्शन बाजार विश्लेषकों के अनुमानों से भी काफी बेहतर रहा है। कंपनी के शुद्ध लाभ (Net Profit) और समेकित राजस्व (Consolidated Revenue) में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस पूरी रिपोर्ट का सबसे मजबूत पहलू यह रहा कि एयरटेल का एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) बढ़कर 200 रुपये के आंकड़े को पार कर गया है, जो कि रिलायंस जियो के एआरपीयू से काफी अधिक है। एआरपीयू किसी भी टेलीकॉम कंपनी की वित्तीय सेहत और उसके ग्राहकों की गुणवत्ता को मापने वाला सबसे महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। एयरटेल के पोस्टपेड ग्राहकों की बढ़ती संख्या, डेटा खपत में इजाफा और हाल ही में टैरिफ दरों में की गई विवेकपूर्ण बढ़ोतरी ने कंपनी के मार्जिन को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभाई है।
जैसे ही भारती एयरटेल ने अपने शानदार तिमाही नतीजे सार्वजनिक किए, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कंपनी के शेयरों में जोरदार खरीदारी शुरू हो गई। एयरटेल का शेयर इंट्रा-डे ट्रेड के दौरान 3 से 5 प्रतिशत तक उछल गया, जिससे कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण (Market Cap) में अरबों रुपये का इजाफा हुआ। बाजार के बड़े दिग्गज ब्रोकरेज हाउसों ने एयरटेल के शेयर पर अपनी रेटिंग को ‘बाय’ (Buy) रखते हुए इसके टारगेट प्राइस में बढ़ोतरी कर दी है। निवेशकों का मानना है कि एयरटेल का मजबूत बैलेंस शीट, कर्ज मुक्त होने की दिशा में बढ़ते कदम और अफ्रीकी बाजार से मिलने वाला स्थिर रेवेन्यू आने वाले समय में कंपनी को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
पिछले कुछ समय से भारत के टेलीकॉम अखाड़े में रिलायंस जियो का दबदबा निर्विवाद माना जा रहा था, लेकिन सुनील भारती मित्तल के नेतृत्व में एयरटेल ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। कंपनी ने केवल यूजर बेस बढ़ाने के बजाय हाई-वैल्यू यानी प्रीमियम ग्राहकों (Postpaid and Home Broadband Users) को अपने साथ जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके अलावा देश भर में 5G इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से रोलआउट करने और एंटरप्राइज बिजनेस (B2B Services) में मिली बढ़त ने एयरटेल को जियो के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमाने में मदद की। हालांकि जियो अभी भी कुल मोबाइल ग्राहकों की संख्या के मामले में देश की सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है, लेकिन वित्तीय कार्यकुशलता और मार्जिन के मामले में एयरटेल ने इस बार बाजी मार ली है। टेलीकॉम सेक्टर की इस नई जंग से साफ है कि आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच 5G सेवाओं और डिजिटल इकोसिस्टम को लेकर प्रतिस्पर्धा और तीखी होने वाली है।
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