
भारतीय शेयर बाजार के ‘बिग बुल’ और लेजेंडरी निवेशक कहे जाने वाले दिवंगत राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) ने अपनी बेजोड़ सूझबूझ और दूरदर्शिता के दम पर 50,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की विशालकाय नेटवर्थ खड़ी की थी। दलाल स्ट्रीट पर उनकी एक-एक चाल और निवेश पर निवेशकों की पैनी नजर रहती थी। टाइटन, टाटा मोटर्स और क्रिसिल जैसी कंपनियों में शुरुआती दांव लगाकर वे फर्श से अर्श तक पहुंचे और भारत के सबसे सफल स्टॉक मार्केट निवेशकों में गिने गए। हालांकि, अपनी जिंदगी के अंतिम दिनों तक इस शेयर बाजार के बेताज बादशाह को एक बात का गहरा मलाल और पछतावा हमेशा सताता रहा कि उन्होंने अपने शुरुआती दौर में कुछ खास कंपनियों के अवसरों को समय रहते पहचान नहीं पाया या कुछ गलत शेयरों में अपना कीमती पैसा फंसा दिया।
अक्सर मीडिया इंटरव्यू और निवेशकों के बीच बातचीत के दौरान राकेश झुनझुनवाला ने खुलकर स्वीकार किया था कि शेयर बाजार में सफलता के शिखर पर पहुंचने के बावजूद कुछ ऐसे फैसले रहे जिन्होंने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था। उन्होंने माना कि वे कई बार वैल्यू इन्वेस्टिंग (Value Investing) के नियमों से भटककर ऐसे शेयरों में भारी दांव लगा बैठे, जो बुनियादी रूप से कमजोर थे या सिर्फ बाजार के अल्पकालिक जोश और ट्रेंड के आधार पर खरीदे गए थे। स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव में कुछ गलत समय पर की गई बिकवाली और कुछ गलत कंपनियों में लॉन्ग-TERM निवेश ने उन्हें यह सिखाया कि बाजार में गलती की गुंजाइश कितनी महंगी पड़ सकती है।
राकेश झुनझुनवाला अक्सर यह जिक्र करते थे कि उन्हें सिर्फ गलत निवेश का ही नहीं, बल्कि कई बार सही समय पर बेहतरीन कंपनियों के शेयर न खरीद पाने का भी भारी मलाल रहा। जब उन्होंने मात्र 5,000 रुपये के साथ साल 1985 में शेयर बाजार में कदम रखा था, तब उनके पास पूंजी की कमी थी और जोखिम उठाने की क्षमता भी सीमित थी। कई ऐसी दिग्गज कंपनियां थीं जिनके शेयरों को वे बहुत कम कीमत पर खरीद सकते थे, लेकिन हिचकिचाहट या जानकारी के अभाव में वे उन सुनहरे अवसरों को हाथ से गंवा बैठे। उनका मानना था कि एक समझदार निवेशक वही है जो अपनी गलतियों से सीखे, लेकिन कुछ गलत कंपनियों के चुनाव का टीस उनके पूरे करियर के दौरान उनके साथ रहा।
अपने शुरुआती दौर के अनुभवों को साझा करते हुए बिग बुल ने एक बार बताया था कि कैसे उन्होंने शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग (Short-term Trading) के चक्कर में कई बार अपने पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंचाया। शुरुआती दिनों में उन्होंने कई ऐसे स्टॉक खरीदे जिनमें प्रमोटर्स की साख या बिजनेस मॉडल मजबूत नहीं था, लेकिन कम समय में मुनाफा कमाने के लालच में उन्होंने उन पर बड़ा दांव खेल दिया। बाद में जब बाजार में करेक्शन आया तो उन शेयरों की कीमतें धड़ाम हो गईं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस तरह के गलत निवेशों ने उन्हें सिखाया कि शेयर बाजार में केवल टिप्स या भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि कंपनी के फंडामेंटल्स को गहराई से समझकर ही पैसा लगाना चाहिए।
राकेश झुनझुनवाला का जीवन और उनका पूरा करियर न केवल उनके सफल निवेशों के लिए याद किया जाता है, बल्कि उनकी उन गलतियों और मलाल से भी युवा निवेशकों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वे हमेशा नए निवेशकों को सलाह देते थे कि शेयर बाजार में कभी भी भावनाओं में बहकर या रातोंरात अमीर बनने के सपने के साथ निवेश नहीं करना चाहिए। अपनी गलतियों को स्वीकार करना और उनसे सीखकर आगे बढ़ना ही एक सच्चे ट्रेडर और लॉन्ग-TERM इन्वेस्टर की असली पहचान होती है। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वित्तीय रणनीतियां और वे अनुभव आने वाली पीढ़ियों का हमेशा मार्गदर्शन करते रहेंगे।
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