
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, दिग्गज राजनेता और देश की जानी-मानी सुरक्षा एजेंसी एसआईएस (SIS) ग्रुप के संस्थापक डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा यानी आरके सिन्हा का नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया है। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और लगभग 75 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक, सामाजिक और कॉर्पोरेट जगत में गहरी शोक की लहर दौड़ गई है। जनसंघ के समय से ही वैचारिक रूप से पार्टी से जुड़े रहे आरके सिन्हा के जाने से बीजेपी परिवार ने एक कद्दावर और संघर्षशील नेता को खो दिया है। परिवार और पार्टी के करीबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक राज्य बिहार की राजधानी पटना लाया जाएगा, जहां पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे।
बिहार के बक्सर में जन्मे रविन्द्र किशोर सिन्हा का शुरुआती जीवन संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की थी और वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को एक साहसी पत्रकार के तौर पर कवर किया था। वैचारिक प्रतिबद्धता और जनसंघ के स्थापना काल से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ की विचारधारा के बेहद करीब रहे। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के वे अत्यंत करीबी माने जाते थे। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पार्टी संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण को हमेशा मिसाल के तौर पर याद किया जाता है।
राजनीति के साथ-साथ उद्यमिता (Entrepreneurship) के क्षेत्र में भी आरके सिन्हा ने एक मिसाल कायम की थी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की सलाह पर उन्होंने बेहद साधारण परिस्थितियों में एक छोटे से गैरेज से सिक्यूरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की नींव रखी थी। उनकी मेहनत, दूरदर्शिता और व्यावसायिक सूझबूझ के दम पर एसआईएस (SIS) ग्रुप ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा और बिजनेस सॉल्यूशन प्रदाता कंपनियों में शुमार हो गई। इस कंपनी के जरिए उन्होंने देश के लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए, जिससे भारतीय कॉर्पोरेट जगत में उनका नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।
उद्यमिता और समाजसेवा के बाद आरके सिन्हा ने विधिवत रूप से मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। भारतीय जनता पार्टी ने उनकी संगठनात्मक क्षमताओं और पार्टी के प्रति निष्ठा को देखते हुए उन्हें वर्ष 2014 में देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए सांसद के रूप में चुना। अप्रैल 2014 से अप्रैल 2020 तक अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने संसद के भीतर देशहित और जनहित के मुद्दों को पूरी मुखरता के साथ उठाया। संसद सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल नीतिगत मामलों और विकास कार्यों के लिहाज से बेहद सक्रिय और सराहनीय रहा था।
आरके सिन्हा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न दलों के दिग्गजों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और शोक संदेशों के जरिए नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए इसे देश और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उनके निधन की खबर के बाद से ही नोएडा स्थित उनके आवास पर शुभचिंतकों और राजनीतिक हस्तियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। तय कार्यक्रम के मुताबिक उनके पार्थिव शरीर को विशेष विमान या सड़क मार्ग से पटना लाया जाएगा, जहां उनके अनुयायी और आम जनता अपने प्रिय नेता को नम आंखों से अंतिम विदाई देगी।
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