
क्रिकेट के मैदान पर जब कोई बल्लेबाज अपने प्रचंड फॉर्म में होता है, तो अच्छे से अच्छे गेंदबाजों के तरकश के सभी तीर और रणनीतियां ध धरी रह जाती हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे इस रोमांचक और सांस रोक देने वाले मुकाबले में कुछ ऐसा ही अद्भुत और अविश्वसनीय नजारा देखने को मिला, जब कीवी टीम के विस्फोटक बल्लेबाज ग्लेन फिलिप्स ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ कर रख दी। मैदान के चारों तरफ शॉट खेलने की अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन करते हुए फिलिप्स ने एक ही ओवर में 32 रन बटोर डाले और अपनी पारी के दौरान कुल 9 गगनचुंबी छक्के तथा 6 बेहतरीन चौके जड़े। दो सौ से भी ज्यादा के खतरनाक स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने भारतीय गेंदबाजों को पानी पिला दिया और एक ऐसा ऐतिहासिक और तूफानी शतक ठोका, जिसे क्रिकेट प्रेमी और भारतीय बॉलर लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे।
जब ग्लेन फिलिप्स क्रीज पर बल्लेबाजी करने के लिए उतरे थे, उस समय भारतीय गेंदबाजों ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए न्यूजीलैंड के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया था। शुरुआती कुछ ओवरों में फिलिप्स ने बेहद सूझबूझ और संयम का परिचय देते हुए पिच के मिजाज को समझा और सिंगल-डबल लेकर अपनी पारी को आगे बढ़ाया। लेकिन एक बार जब उन्होंने क्रीज पर अपनी नजरें जमा लीं, तो उन्होंने अपने गियर बदले और मैदान पर रनों की सुनामी ला दी। भारतीय स्पिनर्स और तेज गेंदबाजों—दोनों के खिलाफ फिलिप्स ने कदमों का बेहतरीन इस्तेमाल किया और लॉन्ग ऑन, डीप मिड विकेट तथा कवर के ऊपर से ऐसे लंबे छक्के लगाए कि दर्शक दीर्घा में बैठे लोग दंग रह गए। उनकी इस पारी ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक क्रिकेट में दबाव की स्थिति से कैसे उबरा जाता है।
इस पारी का सबसे रोमांचक और खौफनाक पल वह आया जब विपक्षी गेंदबाज के एक ही ओवर में ग्लेन फिलिप्स ने कहर बरपाते हुए कुल 32 रन कूट डाले। गेंदबाज की हर एक गेंद को बाउंड्री लाइन के पार भेजने का संकल्प लेकर खेल रहे फिलिप्स ने लगातार गेंदों पर छक्कों और चौकों की ऐसी झड़ी लगाई कि पूरा स्टेडियम तालियों और शोर से गूंज उठा। इस एक ही ओवर ने मैच का पूरा मनोवैज्ञानिक दबाव भारत के खेमे में ट्रांसफर कर दिया। मैदान पर तैनात भारतीय फील्डर केवल दर्शक बनकर रह गए और गेंद को बाउंड्री पार जाते हुए देखने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। इस ओवर के बाद भारतीय कप्तान को अपने गेंदबाजों के रोटेशन और फील्डिंग सजावट में तुरंत बड़े बदलाव करने पड़े।
टी-20 और वनडे प्रारूप के इस आधुनिक युग में स्ट्राइक रेट का बहुत बड़ा महत्व होता है, और ग्लेन फिलिप्स ने इस मुकाबले में 200 से भी ऊपर के स्ट्राइक रेट से रन बनाकर यह दिखा दिया कि उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक फिनिशर्स और मैच विनर खिलाड़ियों में क्यों गिना जाता है। उन्होंने मैदान के हर कोने का बखूबी इस्तेमाल किया—चाहे वह स्वीप शॉट हो, स्कूप शॉट हो या स्ट्रेट डाउन द ग्राउंड का लंबा छक्का हो। फिलिप्स ने न केवल अपना व्यक्तिगत शतक पूरा किया, बल्कि अपनी इस सनसनीखेज शतकीय पारी के दम पर न्यूजीलैंड के कुल स्कोर को एक ऐसे पहाड़ जैसे लक्ष्य तक पहुंचा दिया, जिससे पार पाना भारतीय बल्लेबाजों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होने वाला था।
मैच के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व दिग्गजों ने भारतीय गेंदबाजों की इस लचर प्रदर्शन की जमकर आलोचना की है। डेथ ओवर्स में स्पेशलिस्ट गेंदबाजों का इस तरह से पिट जाना और एक ही बल्लेबाज के सामने पूरी तरह लाचार नजर आना टीम प्रबंधन के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। भारतीय गेंदबाजों ने लेंथ बॉल डालने की जो गलती बार-बार दोहराई, उसका पूरा फायदा ग्लेन फिलिप्स ने अपनी बेहतरीन टाइमिंग के जरिए उठाया। इस मुकाबले ने भारतीय टीम को यह कड़ा सबक दे दिया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यदि आप लय में चल रहे बल्लेबाज को जल्दी आउट नहीं करते हैं, तो वह अकेले दम पर मैच का पासा पूरी तरह पलट सकता है। अब देखना यह होगा कि भारतीय टीम इस बड़े झटके से उबरकर बल्लेबाजी में कैसा प्रदर्शन करती है।
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