
उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल आधिकारिक रूप से बज चुका है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सूबे में सत्ता की हैट्रिक लगाने और अपने अभेद्य गढ़ को और मजबूत करने के लिए अपनी सांगठनिक मशीनरी को पूरी गति से सक्रिय कर दिया है। इसी कड़ी में देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री और भारतीय राजनीति के कुशल रणनीतिकार अमित शाह राजधानी लखनऊ पहुंचे। अमित शाह ने लखनऊ के आशियाना स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित उत्तर प्रदेश बीजेपी की नवगठित प्रदेश कार्यसमिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक का भव्य उद्घाटन किया। गृह मंत्री के इस महत्वपूर्ण दौरे के साथ ही बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपने व्यापक चुनावी अभियान और विस्तृत माइक्रो-बूथ मैनेजमेंट का रणनीतिक शंखनाद कर दिया है।
लखनऊ में आयोजित बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति के इस पहले भव्य सत्र का शुभारंभ पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस ऐतिहासिक बैठक के मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, यूपी प्रभारी विनोद तावड़े, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत केंद्रीय मंत्री व पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एक साथ मौजूद रहे। इस विशाल महामंथन कार्यक्रम में राज्य भर से आए लगभग 3,000 से अधिक कार्यसमिति सदस्य, सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष और मोर्चों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए, जिससे पूरा परिसर चुनावी ऊर्जा और कार्यकर्ताओं के भारी उत्साह से सराबोर दिखाई दिया।
कार्यसमिति के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आक्रामक अंदाज में विपक्षी दलों पर करारा हमला बोला और पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा। अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ‘अंगद के पांव’ की तरह मजबूती से स्थापित है, जिसे कोई भी राजनीतिक विरोधी या गठबंधन हिला नहीं सकता। उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए निर्देश दिया कि वे महाभारत के अर्जुन की भांति केवल 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित रखें। इसके साथ ही गृह मंत्री ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के नैरेटिव पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें संसद के पटल पर खुली बहस की चुनौती दी और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सुशासन व डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने के लिए पांच प्रमुख कार्य-लक्ष्य सौंपे।
इस दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का प्राथमिक एजेंडा केवल राजनीतिक प्रस्ताव पारित करना ही नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों—विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और बीएसपी द्वारा बनाए जा रहे राजनीतिक माहौल और ‘पीडीए’ (PDA) जैसे नैरेटिव का करारा जवाब देना भी है। बैठक में अमित शाह की प्रसिद्ध ‘पन्ना प्रमुख’ रणनीति, माइक्रो-कास्ट मैनेजमेंट और 60-40 के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को 2027 के नए परिदृश्य के अनुसार रीसेट करने पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि बूथ स्तर पर मजबूत संगठन ही हर चुनाव में जीत की असली कुंजी होता है, इसलिए प्रदेश के सभी छह सांगठनिक क्षेत्रों (पश्चिम, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, काशी और गोरखपुर) के लिए अलग-अलग विस्तृत समीक्षा बैठकों का खाका भी तैयार कर लिया गया है।
कार्यसमिति की यह पहली आधिकारिक बैठक केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को घर-घर तक पहुंचाने की ठोस कार्ययोजना को अंतिम रूप दे रही है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने स्वागत भाषण में कार्यकर्ताओं को पार्टी की असली पूंजी बताया और कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद से अपराध और भ्रष्टाचार के खात्मे से जो नया भरोसा पैदा हुआ है, उसे निरंतर बनाए रखना है। बैठक का औपचारिक समापन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ओजस्वी भाषण और मार्गदर्शन के साथ होगा। मुख्यमंत्री कार्यसमिति के समक्ष राज्य के विकास के अगले रोडमैप और ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के विजन को रखेंगे, ताकि पूरी पार्टी एकजुट होकर प्रदेश में लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत से बीजेपी की सरकार बनाने के ऐतिहासिक लक्ष्य को हासिल कर सके।
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