कीर्ति सुरेश दमदार, राध‍िका आप्‍टे शानदार, ताकतवर औरतों की कमजोर कहानी बनी पतन का कारण

भारतीय ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों क्राइम, थ्रिलर और वुमन सेंट्रिक (महिला प्रधान) कंटेंट की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में बहुचर्चित नई वेब सीरीज ‘अक्का’ (Akka) दर्शकों के बीच रिलीज हो चुकी है। दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाली राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री कीर्ति सुरेश और ओटीटी की क्वीन मानी जाने वाली राधिका आप्टे की मुख्य भूमिकाओं से सजी यह सीरीज घोषणा के वक्त से ही काफी चर्चा में थी। दो इतनी बड़ी और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों को एक साथ स्क्रीन शेयर करते देखना हर सिनेमाप्रेमी के लिए एक बड़ा आकर्षण था। हालांकि, दमदार स्टारकास्ट और बेहतरीन परफॉर्मेंस के बावजूद यह सीरीज अपनी कमजोर लेखन प्रक्रिया और बिखरी हुई पटकथा के कारण वह जादू बिखेरने में नाकाम रहती है जिसकी इससे उम्मीद की जा रही थी। आइए जानते हैं कि इस सीरीज में ऐसा क्या खास है और यह कहां चूक जाती है।

सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसकी मुख्य स्टारकास्ट यानी कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे का शानदार अभिनय है। कीर्ति सुरेश ने अपने किरदार की जटिलताओं, उसके गुस्से और बदले की भावना को जिस सहजता और गहराई के साथ पर्दे पर उतारा है, वह उनके अभिनय कौशल का जीवंत प्रमाण है। वहीं दूसरी तरफ, राधिका आप्टे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे कठिन और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को निभाने में कितनी माहिर हैं। दोनों ही अभिनेत्रियों ने अपने-अपने किरदारों में पूरी जान फूंक दी है। जब भी ये दोनों पावरहाउस परफॉर्मर्स स्क्रीन पर एक साथ सामने आती हैं, तो उनके बीच का तनाव और ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को बांधे रखने का काम करती है। सहायक कलाकारों ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ पूरा न्याय किया है और टेक्निकल मोर्चे पर सिनेमैटोग्राफी तथा बैकग्राउंड स्कोर काफी प्रभावशाली नजर आता है।

किसी भी थ्रिलर सीरीज की रीढ़ उसकी कहानी और स्क्रीनप्ले (पटकथा) होती है, लेकिन ‘अक्का’ यहीं पर सबसे ज्यादा मात खा जाती है। निर्देशक और लेखकों ने दो बेहद ताकतवर महिला किरदारों का निर्माण तो कर लिया, लेकिन उन्हें एक चुस्त और बांधकर रखने वाली कहानी का ढांचा देने में असफल रहे। शुरुआती एपिसोड्स में जो उत्सुकता और रहस्य का माहौल बनता है, वह धीरे-धीरे आगे बढ़ते-बढ़ते ढीला पड़ने लगता है। कहानी कई जगहों पर अपनी मुख्य धारा से भटकती हुई महसूस होती है। थ्रिलर जॉनर में जिस तरह के अप्रत्याशित मोड़ (twists and turns) और पेसिंग (रफ्तार) की जरूरत होती है, उसका इसमें काफी अभाव नजर आता है। यही वजह है कि अभिनेत्रियों के बेहतरीन काम के बावजूद दर्शक कहानी के साथ उस गहराई से नहीं जुड़ पाते, जो एक कल्ट सीरीज बनने के लिए जरूरी होती है।

सीरीज के मध्य भाग (mid-episodes) में कहानी की रफ्तार इतनी धीमी हो जाती है कि दर्शक बोरियत महसूस करने लगते हैं। कई ऐसे सीन हैं जिन्हें बिना किसी खास वजह के खींचा गया लगता है, जिससे मुख्य प्लॉट का सस्पेंस कमजोर हो जाता है। इसके अलावा, बदला और महिला सशक्तिकरण की थीम पर पहले भी कई बेहतरीन सीरीज बन चुकी हैं, ऐसे में ‘अक्का’ में कुछ भी नया या नयापन देखने को नहीं मिलता। इसमें इस्तेमाल किए गए अधिकांश ट्विस्ट काफी हद तक प्रेडिक्टेबल (पूर्वानुमान लगाने योग्य) हैं। लेखक ने पारंपरिक रिवेंज ड्रामा वाले घिसे-पिटे तरीकों का ही सहारा लिया है, जिसकी वजह से क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते दर्शक का उत्साह पूरी तरह से ठंडा हो जाता है।

अगर सीरीज के तकनीकी पक्षों की बात करें, तो इसकी सिनेमैटोग्राफी और विजुअल टोन काफी बेहतरीन है। शॉट्स को जिस तरह से कंपोज किया गया है, वह कहानी के डार्क और थ्रिलर मूड को बखूबी बयां करता है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी सीन के मूड को सेट करने में काफी मदद करता है। हालांकि, डायरेक्शन के मोर्चे पर थोड़ी ढील साफ नजर आती है। निर्देशक अगर स्क्रीनप्ले के खिंचाव को कम करते और संपादन (editing) को अधिक चुस्त रखते, तो यह सीरीज एक यादगार अनुभव बन सकती थी। कमजोर संपादन की वजह से कई एपिसोड्स जबरन लंबे महसूस होते हैं, जो सीरीज के ओवरऑल इम्पैक्ट को कम कर देते हैं।

कुल मिलाकर वेब सीरीज ‘अक्का’ एक ऐसा प्रोजेक्ट बनकर रह गई है जिसमें अपार संभावनाएं मौजूद थीं, लेकिन खराब लेखन ने इस पर पानी फेर दिया। यदि आप कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे के कट्टर प्रशंसक हैं और केवल उनके पावरफुल परफॉर्मेंस के लिए कुछ देखना चाहते हैं, तो यह सीरीज एक बार देखी जा सकती है। लेकिन अगर आप एक कसे हुए, सस्पेंस से भरे और रोंगटे खड़े कर देने वाले क्राइम थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह सीरीज आपको थोड़ा निराश जरूर कर सकती है। दमदार अदाकाराओं की मौजूदगी के बावजूद, कमजोर कहानी ही आखिरकार इस सीरीज के पतन का सबसे बड़ा कारण साबित हुई है।