
करवा चौथ का पावन व्रत हर सुहागिन महिला के जीवन में विशेष महत्व रखता है, जिसमें वे अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इस व्रत को लेकर अक्सर महिलाओं के मन में यह बड़ा संशय रहता है कि व्रत की सही तिथि कौन सी है और चांद किस समय निकलेगा। सनातन धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार की सही तिथि की गणना पंचांग और पौराणिक ग्रंथों जैसे वामन पुराण के आधार पर की जाती है। यदि आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि करवा चौथ आज मनाया जाएगा या कल, तो इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय के समय से जुड़ी सारी सटीक जानकारी दे रहे हैं।
वामन पुराण और पंचांग के अनुसार करवा चौथ 2026 की सही तिथि और महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ या करक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वामन पुराण और प्राचीन सनातन ग्रंथों में इस दिन के व्रत का बड़ा ही सुंदर और विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसमें माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पाने के लिए और सुहागिनों द्वारा अपने पतियों की रक्षा के लिए इस व्रत के विधान बताए गए हैं। इस साल 2026 में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत और समापन के समय को लेकर ज्योतिषीय गणना बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उदयातिथि और व्रत के नियमों के अनुसार सुहागिन महिलाओं को उसी दिन व्रत रखना चाहिए जिस दिन प्रदोष काल में चतुर्थी तिथि व्याप्त होती है, ताकि माता करवा और गणेश जी की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
करवा चौथ 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त और दिनभर के जरूरी नियम
करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर अपने निर्जला व्रत की शुरुआत करती हैं, जो पूरे दिन और रात को चांद देखने के बाद ही खोला जाता है। इस दिन पूजा का सबसे उत्तम समय प्रदोष काल यानी शाम के वक्त माना जाता है, जब माता पार्वती, भगवान शिव, कार्तिकेय, गणेश जी और करवा माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के दौरान दीवार पर करवा माता का चित्र बनाकर या कैलेंडर रखकर रोली, अक्षत, धूप, दीप और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। इस दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनना और पढ़ना बेहद अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। सही मुहूर्त में की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में अपार खुशियां लेकर आती है।
करवा चौथ 2026 चांद निकलने का समय और अर्घ्य देने की विधि
करवा चौथ के व्रत का मुख्य आकर्षण और इंतजार रात के समय चांद के दीदार के साथ पूरा होता है, जिसके बाद ही महिलाएं अपना उपवास खोलती हैं। इस साल करवा चौथ के दिन आपके शहर में चंद्रोदय का सही समय क्या रहेगा, इसकी सटीक जानकारी स्थानीय पंचांग से प्राप्त की जा सकती है, क्योंकि अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में थोड़ा अंतर होता है। जब आसमान में चांद उदय हो जाता है, तब छलनी के जरिए पहले चांद को देखा जाता है और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर आशीर्वाद लिया जाता है। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके महिला अपना निर्जला व्रत संपन्न करती है, जो उनके आपसी प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
girls globe