
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नामों की गलत प्रविष्टियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव अधिकारियों की टिप्पणी तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची में नामों की गड़बड़ी स्वीकार करते हुए सोशल मीडिया पर एक ऐसा बयान दिया, जिस पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते और गलती के दौरान किसी अल्पसंख्यक का नाम इस तरह दर्ज नहीं हुआ, वरना सांप्रदायिकता के आरोप भी लगते। दूसरी ओर, कानपुर में भाजपा विधायक के कथित बयान ‘मुंह में जूता घुसेड़ देंगे’ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दोनों घटनाएं उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और विवाद को लेकर चर्चा में हैं।
वोटर लिस्ट में ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे दर्ज हुआ?
विवाद की शुरुआत विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में नामों की असामान्य प्रविष्टियों से हुई। प्रयागराज-झांसी खंड की मतदाता सूची में एक नाम ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज होने का मामला सामने आया। इस प्रविष्टि को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने निर्वाचन आयोग से सवाल किया कि क्या मतदाता सूची तैयार करने वाला सॉफ्टवेयर जातिगत पक्षपात कर रहा है।
संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर इस गलती को उठाते हुए पूछा कि सूची में इस तरह की गड़बड़ी केवल कुछ खास उपनामों के साथ ही क्यों दिखाई दे रही है। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों को तकनीकी प्रक्रिया और नामों की गलत प्रविष्टियों पर सफाई देनी पड़ी।
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 25 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जवाब दिया। उन्होंने विधान परिषद चुनाव की एक अन्य मतदाता सूची का उदाहरण देते हुए बताया कि उसमें भी ‘राम ने शर्मा को मारा’ जैसी प्रविष्टि दर्ज थी।
रिणवा ने स्वीकार किया कि गलती हुई है और कहा कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते। इसी पोस्ट में उन्होंने टिप्पणी की कि शुक्र है कि इस मामले में किसी अल्पसंख्यक का नाम इस तरह नहीं आया, अन्यथा जातिवाद के साथ सांप्रदायिकता के आरोप भी लगते। उनकी इस टिप्पणी पर राजनीतिक और सोशल मीडिया जगत में सवाल उठने लगे।
अंग्रेजी से हिंदी में नाम बदलने के दौरान हुई गड़बड़ी
निर्वाचन अधिकारियों की सफाई के अनुसार, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में अंग्रेजी में दर्ज नामों को हिंदी में बदलने के दौरान कुछ मामलों में सॉफ्टवेयर ने लिप्यंतरण करने के बजाय शब्दों का अर्थ निकालकर अनुवाद कर दिया। इससे व्यक्तियों के नाम गलत रूप में दर्ज हो गए।
उदाहरण के तौर पर, ‘Ramhit Yadav’ जैसे नाम को गलत तरीके से पढ़ने पर उसका अर्थ ‘राम ने यादव को मारा’ बन गया। इसी तरह ‘Ramhit Sharma’ से संबंधित प्रविष्टि भी गलत रूप में सामने आई। नामों की इस तरह की गलतियों ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, तकनीकी जांच और मानवीय निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं।
राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल
मतदाता सूची की गलतियों को लेकर विपक्षी दलों ने निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस मामले को उठाया, जबकि कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा पर सवाल किए।
विवाद बढ़ने के बाद निर्वाचन आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित मामलों में संयमित भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और तथ्यों तक ही बात सीमित रखी जानी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने मतदाता सूची में नामों की शुद्धता और चुनावी संस्थाओं के सार्वजनिक संवाद को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कानपुर में भाजपा विधायक के बयान पर भी विवाद
इसी बीच कानपुर में भाजपा विधायक के कथित बयान ‘मुंह में जूता घुसेड़ देंगे’ को लेकर भी विवाद की खबर सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर विधायक का नाम, बयान किस व्यक्ति के लिए दिया गया, घटना की तारीख और पूरे विवाद का संदर्भ स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सका है। इसलिए इस बयान को किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ प्रमाणित धमकी के रूप में पेश करने से पहले संबंधित वीडियो, आधिकारिक बयान या विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट की पुष्टि जरूरी है।
चुनावी माहौल में बयानबाजी और पारदर्शिता पर सवाल
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की गलतियों और राजनीतिक बयानबाजी से जुड़े इन मामलों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की भाषा को लेकर बहस तेज की है। मतदाता सूची में नामों की शुद्धता प्रत्येक मतदाता के अधिकार से जुड़ा विषय है। वहीं, राजनीतिक और प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों की टिप्पणियों को भी उनके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है।
girls globe