IND vs NZ: 225 रन बनाकर भी हारा न्यूजीलैंड, मिचेल सैंटनर ने इन गलतियों को ठहराया हार का जिम्मेदार

क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने आक्रामक और निडर खेल के दम पर असंभव दिख रहे 226 रनों के विशाल लक्ष्य को हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पहले बल्लेबाजी करते हुए जब न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 225 रनों का विशालकाय स्कोर खड़ा किया, तब क्रिकेट पंडितों से लेकर डिजिटल विन प्रिडिक्टर तक मेजबान कीवी टीम की जीत की संभावना 72 प्रतिशत से ज्यादा बता रहे थे। इस सपाट और बल्लेबाजी के अनुकूल पिच पर कीवियों को पूरा भरोसा था कि वे इतने बड़े स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव कर लेंगे। हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की जमकर धुनाई करते हुए मैच को अंतिम ओवर में दो गेंद शेष रहते अपनी झोली में डाल लिया। 225 रन जैसा मजबूत स्कोर बनाने के बाद भी मिली इस दर्दनाक हार से कीवी कप्तान मिचेल सैंटनर काफी हताश और निराश नजर आए। मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में सैंटनर ने अपनी टीम की उन रणनीतिक कमियों और गलतियों का खुलकर विश्लेषण किया, जिसने उनकी बनी-बनाई जीत को अचानक हार में बदल दिया।

मैच के बाद कप्तान मिचेल सैंटनर ने स्वीकार किया कि भारतीय टीम ने शुरुआत से ही उन पर कड़ा दबाव बना दिया था। भारतीय सलामी जोड़ी संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने पहले ओवर से ही कीवी तेज गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। दोनों युवा भारतीय बल्लेबाजों ने मैदान के हर कोने में चौकों-छक्कों की बरसात करते हुए शुरुआती 6 ओवरों यानी पावरप्ले में ही 93 रन कूट डाले। सैंटनर ने कहा कि उनकी टीम पहले से यह जानती थी कि भारतीय बल्लेबाज इसी विस्फोटक अंदाज में काउंटर-अटैक करेंगे, इसके बावजूद कीवी गेंदबाज अपनी सटीक लाइन और लेंथ से भटक गए। पावरप्ले में 15 से अधिक के रन रेट से रन लुटने के कारण कीवी टीम खेल के शुरुआती 30 मिनट में ही पूरी तरह से बैकफुट पर चली गई, जिससे बाहर निकलना उनके गेंदबाजों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।

विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम जब तेजी से आगे बढ़ रही थी, तब मिचेल सैंटनर और उनके स्पिन गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में खेल की गति को थामने की जोरदार कोशिश की। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा के तूफानी अंदाज के बाद जब मध्यक्रम में विस्फोटक बल्लेबाज ईशान किशन आउट होकर पवेलियन लौटे, तो मैच एक बार फिर रोमांचक मोड़ पर आ गया। उस नाजुक मोड़ पर विन प्रिडिक्टर एक बार फिर न्यूजीलैंड की जीत की संभावना 70 प्रतिशत दिखाने लगा था। सैंटनर ने इस सकारात्मक पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि बीच के ओवरों में उनकी टीम ने अच्छी वापसी की थी और भारतीय बल्लेबाजों को कुछ समय के लिए बांधकर रखा था। उस समय मैच का पलड़ा दोनों तरफ झुक सकता था, लेकिन भारतीय निचले-मध्यक्रम ने धैर्य बनाए रखा और अहम मौकों पर बाउंड्री निकालकर मैच को कीवियों की पकड़ से दूर खींच लिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब सैंटनर से पूछा गया कि आखिर टीम से सबसे बड़ी चूक कहां हुई, तो उन्होंने खुले तौर पर खराब अनुशासन, अतिरिक्त (एक्स्ट्रा) रनों और फील्डिंग के दौरान छूटे महत्वपूर्ण अवसरों को हार का मुख्य कारण माना। कीवी कप्तान ने दर्द बयां करते हुए कहा कि नई गेंद से गेंदबाजी करते समय गेंदबाजों ने दिशाहीन लाइन फेंकी और वाइड तथा नो-बॉल के जरिए कई अतिरिक्त रन दिए, जिसने भारत के काम को और आसान बना दिया। इसके अलावा हेगले ओवल की ठंडी हवाओं और रोशनी के बीच फील्डरों ने कुछ अहम कैच और हाफ-चांस गंवाए। सैंटनर ने कहा कि हालांकि इस मैदान पर हवा के रुख के कारण कैच पकड़ना हमेशा से मुश्किल होता है, लेकिन अगर वे उन मौकों को भुना लेते तो मुकाबला उनकी मुट्ठी में हो सकता था। साथ ही उन्होंने डेथ ओवरों में अपनी रणनीति और यॉर्कर के निष्पादन में सुधार की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।

इस करारी हार के बाद अब कीवी कप्तान और टीम मैनेजमेंट अगले टी20 मैच के लिए अपनी रणनीति में व्यापक बदलाव करने की तैयारी में जुट गए हैं। सैंटनर ने कहा कि दोनों ही टीमों के पास सीखने और सुधार करने के लिए काफी कुछ है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती भारत के आक्रामक पावरप्ले को धीमा करना है। उन्होंने कहा कि हेगले ओवल की पिच पर गेंद के व्यवहार को देखते हुए अब उन्हें यह भलीभांति समझ आ गया है कि गति में विविधता लाकर भारतीय बल्लेबाजों को कैसे शांत रखा जा सकता है। सैंटनर ने कहा कि यदि वे पावरप्ले में 100 के करीब रन लुटाने के बजाय भारतीय टीम को 75 से 80 रनों के दायरे में सीमित रखने में सफल हो जाते हैं, तो उनके गेंदबाज मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बना सकते हैं। 225 रन जैसे स्कोर को गंवाने के बाद कीवी खेमा निश्चित रूप से अब अपनी गेंदबाजी और फील्डिंग को दुरुस्त कर सीरीज में बराबरी करने के लिए पूरी ताकत झोंकेगा।