
निजी और संगठित क्षेत्र में काम करने वाले हर वेतनभोगी कर्मचारी की सैलरी से हर महीने भविष्य निधि यानी पीएफ (Provident Fund) का एक तय हिस्सा कटता है। अधिकांश कर्मचारी इसे सिर्फ रिटायरमेंट सेविंग्स या ब्याज कमाने का जरिया भर मानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि ईपीएफओ खाता अपने सदस्यों को केवल प्रोविडेंट फंड ही नहीं देता, बल्कि बुढ़ापे के लिए एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS-95) और असमय मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने वाला एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम का ₹7 लाख तक का मुफ्त जीवन बीमा भी प्रदान करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बीमा सुरक्षा के लिए कर्मचारी की जेब से एक भी रुपया प्रीमियम के रूप में नहीं कटता, बल्कि इसका पूरा खर्च नियोक्ता यानी कंपनी वहन करती है। हालांकि, अक्सर सही समय पर जरूरी औपचारिकताएं और प्रोफाइल अपडेट न होने के कारण आपात स्थिति में कर्मचारी या उसके आश्रितों को इन योजनाओं का क्लेम हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत मिलने वाले ₹7 लाख के ईडीएलआई बीमा और पेंशन का लाभ सीधे तौर पर नॉमिनी से जुड़ा होता है। यदि किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो उसके परिवार या आश्रितों को पीएफ का संचित फंड, मासिक पेंशन और इंश्योरेंस की रकम तभी बिना कानूनी अड़चन के मिलती है जब खाते में डिजिटल ई-नॉमिनेशन दर्ज हो। ईपीएफओ के मौजूदा नियमों के मुताबिक, ई-नॉमिनेशन न होने पर ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया अटक सकती है और परिवार को डेथ क्लेम के लिए कंपनियों व सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इसे पूरा करने के लिए कर्मचारी को ईपीएफओ के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर जाकर ‘मैनेज’ सेक्शन में ‘ई-नॉमिनेशन’ का विकल्प चुनना होता है, जहां परिवार के सदस्यों का आधार, फोटो और बैंक विवरण दर्ज कर आधार-ओटीपी के जरिए मिनटों में ई-साइन किया जा सकता है।
हर पीएफ खाताधारक को 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) आवंटित किया जाता है, जो पूरी सेवा अवधि के दौरान उसकी वित्तीय पहचान बना रहता है। कई कर्मचारी नई नौकरी शुरू करने के बाद यूएएन एक्टिवेट करना भूल जाते हैं या उसमें पुराना मोबाइल नंबर ही दर्ज रहने देते हैं। बिना सक्रिय यूएएन और अपडेटेड मोबाइल नंबर के आप न तो अपनी पासबुक देख सकते हैं और न ही किसी तरह का विड्रॉल या क्लेम कर सकते हैं। इसके साथ ही ईपीएफओ नियमों के अनुसार, यूएएन का आधार कार्ड से लिंक और सत्यापित होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि आपके आधार, पैन और ईपीएफओ रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग, जन्म तिथि या पिता के नाम में मामूली सा भी अंतर है, तो सिस्टम आपके ऑनलाइन क्लेम को तुरंत रिजेक्ट कर देता है। इसलिए पोर्टल पर जाकर प्रोफाइल सेक्शन में सभी व्यक्तिगत जानकारियों का अक्षरशः मिलान कर केवाईसी सत्यापन सुनिश्चित कर लें।
पीएफ विड्रॉल, एडवांस क्लेम या पेंशन का पैसा सीधे सदस्य के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के माध्यम से भेजा जाता है। ऐसे में यदि आपका बैंक अकाउंट इनएक्टिव हो चुका है, बैंक के विलय (Merger) के कारण आईएफएससी कोड बदल गया है, या फिर खाता बंद हो चुका है, तो क्लेम पास होने के बावजूद भुगतान बैंक एंड पर फेल हो जाता है। ईपीएफओ पोर्टल पर हमेशा वही बचत खाता दर्ज रखें जो पूरी तरह सक्रिय हो, जिसमें आपका नाम ठीक वैसा ही लिखा हो जैसा आधार और पीएफ रिकॉर्ड में है। जब आप पोर्टल पर नया बैंक खाता जोड़ते हैं, तो नियोक्ता द्वारा डिजिटल सिग्नेचर के जरिए उसे अप्रूव किया जाता है और इसके बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के जरिए बैंक सत्यापन पूरा होता है, जिससे भविष्य में किसी भी निकासी के समय पैसे अटकने का कोई जोखिम नहीं रहता।
अक्सर लोग करियर में आगे बढ़ने के लिए एक कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी में चले जाते हैं, लेकिन पुरानी नौकरी छोड़ने के बाद उसका ‘डेट ऑफ एग्जिट’ (Date of Exit) दर्ज कराना भूल जाते हैं। जब तक पुरानी सर्विस का एग्जिट पोर्टल पर अपडेट नहीं होता, तब तक न तो आप पुराने पीएफ बैलेंस को नए खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर सकते हैं और न ही आपकी सेवा अवधि लगातार मानी जाती है। लगातार 10 साल की योग्य सेवा पूरी होने पर ही ईपीएफओ सदस्य आजीवन मासिक पेंशन (EPS) का हकदार बनता है। यदि आप बीच में ट्रांसफर नहीं करते हैं, तो आपकी सर्विस हिस्ट्री टूट सकती है जिसका सीधा नुकसान आपकी भावी पेंशन गणना और ईडीएलआई बीमा की निरंतरता पर पड़ता है। अब ईपीएफओ ने कर्मचारियों को खुद ही मेंबर पोर्टल पर जाकर ‘मार्क एग्जिट’ करने की सुविधा दे दी है, जिसके बाद फॉर्म-13 के जरिए ऑनलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट सबमिट की जा सकती है।
ईपीएफओ की ये तीनों योजनाएं—पीएफ, पेंशन और ग्रुप टर्म इंश्योरेंस—किसी भी कामकाजी व्यक्ति और उसके परिवार के लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा तंत्र की तरह काम करती हैं। अगर कोई सदस्य सेवा में रहते हुए समय पर ये चारों औपचारिकताएं पूरी कर लेता है, तो किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के समय उसके परिजनों को किसी मध्यस्थ या लंबी कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती और सीधे डीबीटी के माध्यम से बीमा और फंड की राशि खाते में पहुंच जाती है। तकनीक के इस दौर में ईपीएफओ के सारे काम घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप से कुछ ही मिनटों में पूरे किए जा सकते हैं, इसलिए समय रहते अपने पीएफ खाते की जांच करें और इन चारों प्राथमिकताओं को बिना किसी देरी के पूरा कर लें।
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