
उत्तर प्रदेश की बेटियों को आत्मनिर्भर और हुनरमंद बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा और ठोस कदम उठाया है। व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग तथा बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संचालित महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ (Project Praveen) के दायरे का विस्तार करते हुए अब इसे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में पूरी ताकत से लागू किया जा रहा है। शासन द्वारा जारी नवीनतम कार्ययोजना के तहत प्रदेश के 71 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 2,672 छात्राओं को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) दिया जाएगा। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की नियमित कक्षाएं 2 नवंबर से औपचारिक रूप से शुरू होने जा रही हैं। राजधानी लखनऊ के ग्रामीण और अर्ध-शहरी अंचलों में संचालित कस्तूरबा विद्यालयों से लेकर पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों तक, इस योजना को लेकर बालिकाओं और शिक्षकों के बीच जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। वंचित, कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली इन बेटियों के लिए यह पहल केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर उनके हाथ में रोजगार का ठोस जरिया थमाने जा रही है।
प्रोजेक्ट प्रवीण की परिकल्पना उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की पढ़ाई के साथ-साथ ही रोजगारपरक हुनर सिखाने के लिए की गई है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों और अब उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में निःशुल्क वोकेशनल ट्रेनिंग पार्टनर के रूप में काम कर रहा है। चयनित 71 कस्तूरबा विद्यालयों में बुनियादी ढांचे, लैब की उपलब्धता और छात्राओं की संख्या के आधार पर 2,672 बालिकाओं की पहचान की गई है जो वर्तमान में कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं में नामांकित हैं। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाएं 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा या रोजगार के अवसरों से वंचित रह जाती हैं। प्रोजेक्ट प्रवीण का लक्ष्य इसी खाई को पाटना है, ताकि स्कूल की दहलीज लांघते ही छात्राओं के पास एक प्रमाणित व्यावसायिक कौशल हो, जिसके बल पर वे स्वरोजगार शुरू कर सकें या सीधे किसी संगठित उद्योग में नौकरी पा सकें।
कौशल विकास विभाग द्वारा तय की गई समय सारिणी के अनुसार, सभी 71 कस्तूरबा विद्यालयों में 2 नवंबर से प्रशिक्षण सत्र सुचारू रूप से शुरू कर दिए जाएंगे। सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों और नियमित विषयों की पढ़ाई में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए इन वोकेशनल कक्षाओं को स्कूल के नियमित टाइम-टेबल में अतिरिक्त घंटों के रूप में शामिल किया गया है। हर सप्ताह निर्धारित दिनों में छात्राओं को थ्योरी के साथ-साथ प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा प्रमाणित प्राइवेट व सरकारी ट्रेनिंग पार्टनर्स के योग्य प्रशिक्षक (Certified Trainers) सीधे इन कस्तूरबा विद्यालयों में जाकर छात्राओं को प्रशिक्षित करेंगे। प्रत्येक बैच में छात्राओं की संख्या सीमित रखी जाएगी ताकि हर छात्रा को मशीनों, टूल्स और कंप्यूटर पर व्यक्तिगत रूप से अभ्यास करने का पूरा अवसर मिल सके।
प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत छात्राओं को पारंपरिक सिलाई-कढ़ाई के दायरे से बाहर निकालकर आधुनिक डिजिटल और औद्योगिक युग की मांग के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राओं के लिए तैयार किए गए पाठ्य विवरण में कई जॉब-रोल शामिल किए गए हैं। इनमें इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT & ITES) के तहत बेसिक कंप्यूटर ऑपरेशंस, डेटा एंट्री, इंटरनेट टूल्स और डिजिटल साक्षरता प्रमुख हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर के छोटे उपकरणों की मरम्मत, फैशन डिजाइनिंग व आधुनिक गारमेंट मेकिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टरों में नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के मानकों पर आधारित शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्सेज संचालित किए जाएंगे। ये सभी कोर्सेज राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं, जिससे बालिकाओं को भविष्य में देश भर के किसी भी राज्य में रोजगार खोजने में आसानी होगी।
इस पूरे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए छात्राओं या उनके परिवारों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रशिक्षण से जुड़ी सभी अध्ययन सामग्री, प्रैक्टिकल टूल्स, यूनिफॉर्म और वर्किंग किट शासन द्वारा पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। कोर्स के सफल समापन के बाद सभी 2,672 छात्राओं का विधिवत मूल्यांकन (Third-Party Assessment) किया जाएगा। परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को एनएसक्यूएफ-संरेखित सरकारी प्रमाण पत्र (Government Skill Certificate) प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जो छात्राएं 12वीं पास करने के बाद तुरंत काम करने की इच्छुक होंगी, उन्हें कौशल विकास मिशन के जिला रोजगार मेलों (Rojgar Mela) और कस्तूरबा विद्यालयों के विशेष प्लेसमेंट ड्राइव के जरिए स्थानीय उद्योगों, रिटेल चेन्स, आईटी फर्मों और कॉरपोरेट प्रतिष्ठानों में इंटर्नशिप व रोजगार दिलाने में सीधी मदद की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान के साथ भी इस योजना का गहरा जुड़ाव है। आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से पिछड़े तबके की बेटियां जब अपने पैरों पर खड़ी होंगी, तो इससे बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर लगाम लगेगी और समाज में बालिकाओं के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आएगा। लखनऊ के बेसिक शिक्षा और कौशल विकास अधिकारियों का कहना है कि 2 नवंबर से शुरू होने वाला यह 71 कस्तूरबा विद्यालयों का पायलट विस्तार सफल रहने के बाद प्रदेश के बाकी बचे अन्य सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे प्रदेश की हजारों अन्य बेटियां भी अपने भविष्य को आत्मनिर्भरता के सुनहरे धागों से बुन सकेंगी।
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