
भारतीय बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर देश की सियासत में इन दिनों जोरदार बहस छिड़ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) द्वारा केंद्र सरकार की बैंकिंग नीतियों और सुधारों पर तीखे सवाल उठाए जाने के बाद, केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने बेहद कड़े शब्दों में उसका जवाब दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार की दूरदर्शी नीतियों, मजबूत सुधारों और बैंकिंग पहलों के दम पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.98 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे ऐतिहासिक शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। मंत्रालय के अनुसार, बैंकों की सेहत इतनी सुधर चुकी है कि उनका ग्रॉस एनपीए (GNPA) अनुपात गिरकर महज 1.93 प्रतिशत पर आ गया है, जो कई दशकों का सबसे निचला स्तर है।
अखिलेश यादव के आरोपों पर वित्त मंत्रालय की दो टूक
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार के पिछले 12 सालों के बैंकिंग सुधारों पर तीखा हमला बोला था। गुरुवार को अपने एक बयान में अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि मौजूदा सरकार ने देश की बैंकिंग व्यवस्था को ‘साहूकार से भी बदतर’ बना दिया है।
अपने आरोपों के समर्थन में अखिलेश यादव ने कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। उन्होंने बैंकों में न्यूनतम खाता शेष (Minimum Balance) न रखने पर लगने वाले जुर्माने, नोटबंदी के फैसलों, लगातार बढ़ते सेवा शुल्कों (Service Charges), कॉरपोरेट कर्ज माफी, आम जनता के लिए कर्ज तक आसान पहुंच और बैंक कर्मचारियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया था। सपा प्रमुख के इन तीखे हमलों का जवाब देते हुए शुक्रवार को वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए हर एक आरोप का तथ्यात्मक और बिंदुवार खंडन किया।
न्यूनतम बैलेंस, रिकवरी एजेंट और बैंकिंग पहुंच पर दी सफाई
अखिलेश यादव के न्यूनतम बैलेंस पर जुर्माने के आरोप का जवाब देते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार के वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और ग्राहक-केंद्रित बैंकिंग सुधारों के तहत आज सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकांश प्रमुख बैंकों ने साधारण बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस न होने पर लगने वाले पेनल्टी चार्ज या तो पूरी तरह माफ कर दिए हैं या फिर उन्हें बहुत कम कर दिया है।
इसके अलावा, कर्ज वसूली के दौरान एजेंटों द्वारा ग्राहकों को परेशान किए जाने के दावों पर मंत्रालय ने साफ किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बहुत ही स्पष्ट और कड़े निर्देश हैं। नियमों के मुताबिक, कोई भी रिकवरी एजेंट या बैंक कर्मचारियों का दल किसी भी ग्राहक को डरा-धमका या मानसिक रूप से परेशान नहीं कर सकता। वित्त मंत्रालय ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों की बात करते हुए बताया कि देश के हर नागरिक तक बैंकिंग सेवाएं सुगमता से पहुंचाने के लिए महज पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं, और आज देश के लगभग सभी गांव मुख्य बैंकिंग प्रणाली से जुड़ चुके हैं।
नोटबंदी और बैंक लॉकरों की सुरक्षा को लेकर सरकार का पक्ष
सपा प्रमुख द्वारा नोटबंदी के फैसले पर उठाए गए सवालों पर वित्त मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि काले धन (Black Money), जाली मुद्रा (Fake Currency) और अवैध सीमा-पार वित्तपोषण (Cross-border Financing) पर लगाम कसने के लिए नोटबंदी एक बेहद महत्वपूर्ण और साहसिक आर्थिक फैसला था। इस कदम की वजह से देश का तमाम लेन-देन औपचारिक वित्तीय प्रणाली (Formal Financial System) के दायरे में आया, जिससे यूपीआई (UPI) और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है।
वहीं, बैंक लॉकरों से कीमती धातुओं, सोने-चांदी के गहनों, निवेश प्रमाणपत्रों और पुश्तैनी सामानों के गायब होने या चोरी होने के आरोपों पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं बेहद असाधारण और इक्का-दुक्का मामलों तक सीमित हैं। यदि बैंक की किसी सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण ग्राहक को कोई नुकसान पहुंचता है, तो उसके लिए सीधे तौर पर बैंक जवाबदेह होता है। आरबीआई के सख्त नियमों के अनुसार, ऐसी किसी भी स्थिति में बैंक द्वारा पीड़ित ग्राहक को सालाना लॉकर किराए का 100 गुना तक मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।
मजबूत बैलेंस शीट और दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा GNPA
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देश में जितने भी नियामकीय बदलाव, शासन संबंधी उपाय (Governance Measures) और संरचनात्मक सुधार किए गए हैं, उन्होंने बैंकों की वित्तीय सेहत को पूरी तरह से पलट दिया है। आज सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट बेहद मजबूत है, कर्ज का अनुशासन बेहतर हुआ है और जोखिम प्रबंधन (Risk Management) की प्रक्रिया सटीक हो गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक देश के सरकारी बैंकों का जीएनपीए अनुपात घटकर मात्र 1.93 प्रतिशत रह गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन बैंकों का कुल कारोबार बढ़कर 283 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। सरकार का यह भी कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) और सेवा उत्कृष्टता को लगातार बढ़ाने के लिए ‘ईएएसई’ (EASE) एजेंडे समेत कई दूरदर्शी कदम उठाए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज सार्वजनिक बैंक जनता को अधिक पारदर्शी और बेहतरीन सेवाएं दे रहे हैं।
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