
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के जोनल कार्यालय से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जिसने बैंकिंग प्रणाली के शिकायत निवारण तंत्र और ग्राहक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के दौर में जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार उपभोक्ताओं को साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता और त्वरित शिकायत समाधान का भरोसा दिला रहा है, वहीं लखनऊ जोनल ऑफिस के शिकायत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। मीडिया संस्थान ‘Look News India’ से जुड़े शिकायतकर्ता ने अपने पेमेंट गेटवे से संबंधित तकनीकी विवाद के समाधान के दौरान बैंक की आंतरिक प्रणाली, जिम्मेदार कर्मियों के आचरण और ग्राहकों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। इस पूरे प्रकरण में आधिकारिक पत्राचार, साइबर जोखिम, धमकी और ग्राहक अधिकारों के हनन से जुड़े ऐसे बिंदु उठाए गए हैं जो सामान्य खाताधारकों के बैंकिंग अधिकारों से सीधे ताल्लुक रखते हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब ‘Look News India’ की ओर से अपने पेमेंट गेटवे में आ रही तकनीकी दिक्कतों और लेन-देन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए पंजाब नेशनल बैंक के लखनऊ जोनल ऑफिस के शिकायत विभाग में विधिवत शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि शिकायत विभाग में तैनात संबंधित महिला कर्मी रीता मेहता द्वारा आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से समाधान के नाम पर एक अज्ञात व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया गया और कहा गया कि उक्त व्यक्ति से संपर्क करने पर समस्या का निस्तारण कर दिया जाएगा। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उस दिए गए नंबर की प्राथमिक स्तर पर तकनीकी जांच और पड़ताल की गई, तो सामने आया कि वह विवरण किसी प्रमाणित तकनीकी अधिकारी का न होकर संदिग्ध साइबर गतिविधियों से जुड़े एक बड़े हैकर का निकला। बैंकिंग पत्राचार के आधिकारिक मंच से किसी तीसरे अज्ञात व अनधिकृत व्यक्ति का नंबर दिया जाना साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और बैंकिंग गोपनीयता का अत्यंत गंभीर उल्लंघन माना जाता है, जिससे किसी भी ग्राहक के वित्तीय डेटा के असुरक्षित होने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद जब शिकायतकर्ता ने इस मामले पर सीधे संबंधित कर्मी से आधिकारिक बातचीत करने और स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर स्थिति और अधिक बिगड़ गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अपनी गलती स्वीकारने या स्पष्टीकरण देने के बजाय संबंधित बैंक कर्मी द्वारा आक्रामक रुख अख्तियार किया गया और सीधे तौर पर धमकाया गया कि यदि इस प्रकरण की शिकायत किसी उच्च स्तर पर की गई, तो वे छेड़खानी के झूठे आरोप में फंसाकर जेल भिजवा देंगी। किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में शिकायतकर्ता को अपने वैध अधिकारों के प्रयोग के बदले कानूनी मुकदमों में फंसाने की ऐसी कथित धमकी मिलना कार्यस्थल आचरण और बैंकिंग लोकपाल नियमों के बिल्कुल विपरीत है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने तत्काल इसकी सूचना तत्कालीन जोनल जनरल मैनेजर मृत्युंजय जी को दी, जिनके द्वारा मौखिक रूप से कर्मचारी की चूक पर खेद जताते हुए क्षमा याचना की बात कही गई, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभाग में मनमानी और अनुचित व्यवहार का सिलसिला थमने के बजाय और तेज हो गया।
प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब पीड़ित पक्ष की दर्ज शिकायत को बिना किसी समाधान, पूर्व सूचना या लिखित सहमति के प्रणाली में बंद (Close) कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए मामले को दबाने और शिकायत बंद करने की इस प्रक्रिया में शिकायत विभाग की कर्मी और अन्य सहकर्मी राजेश चौधरी की संदिग्ध भूमिका रही है। आरोप लगाया गया है कि दोनों कर्मियों के बीच आपसी तालमेल के चलते नियमों की खुली अनदेखी की जाती है और एक-दूसरे के गलत कृत्यों पर पर्दा डालने का काम किया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि जोनल स्तर पर तैनात इन कर्मियों द्वारा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ग्राहक सेवा फ्रेमवर्क और बैंक की आंतरिक आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जहां ग्राहकों के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, धमकियां और मानसिक उत्पीड़न की शिकायतें सामने आ रही हैं, जो एक राष्ट्रीयकृत बैंक की साख को बट्टा लगाने के लिए काफी हैं।
इस प्रकरण ने बैंकिंग ग्राहकों के उस मौलिक अधिकार पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है जिसके तहत कोई भी उपभोक्ता अपनी समस्या के समाधान के लिए बैंक के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ जोनल हेड या उच्चाधिकारियों से मिलने की कोशिश की, तो निचले स्तर पर ही उन्हें रोक दिया गया और स्पष्ट रूप से कहा गया कि वे उनके अलावा किसी अन्य आला अधिकारी से नहीं मिल सकते। इस घटनाक्रम ने बैंकिंग जगत में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या किसी भी ग्राहक को जोनल मैनेजर या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने से रोका जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की ‘कस्टमर सर्विस इन बैंक्स’ गाइडलाइंस और सिटीजन चार्टर में यह बिल्कुल स्पष्ट है कि शिकायत निवारण त्रिस्तरीय होना चाहिए, जिसमें शाखा प्रबंधक से लेकर जोनल हेड और बैंकिंग लोकपाल तक ग्राहक को सीधी पहुंच का अधिकार है। पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि यदि बैंक प्रबंधन द्वारा उच्चाधिकारियों से आम उपभोक्ताओं के मिलने पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध लगाया गया है, तो उस आदेश की प्रमाणित छायाप्रति सार्वजनिक की जाए या फिर इसे तुरंत लिखित में ई-मेल व एसएमएस के जरिए खाताधारकों तक पहुंचाया जाए ताकि नियमों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।इस घटनाक्रम का मास्टरमाइंड राजेश चौधरी है
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