SBI Loan Rate Hike: एसबीआई से कर्ज लेना हुआ महंगा, बैंक ने बढ़ाईं MCLR, EBLR और RLLR दरें; जानिए आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने करोड़ों रिटेल और कॉरपोरेट कर्जदारों को झटका देते हुए अपनी प्रमुख उधारी दरों (Lending Rates) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बैंक की ओर से मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में चुनिंदा अवधियों के लिए 15 बेसिस प्वाइंट्स (0.15%) तक का इजाफा किया गया है, जबकि एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) और रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) में भी 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई संशोधित दरें लागू हो चुकी हैं। भारतीय स्टेट बैंक के इस कदम के बाद फ्लोटिंग ब्याज दर पर लिए गए सभी प्रकार के होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्त (EMI) या लोन की अवधि (Tenure) बढ़ना तय माना जा रहा है। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली-एनसीआर से लेकर मुंबई तक एसबीआई की शाखाओं से जुड़े मौजूदा और नए लोन ग्राहकों के बजट पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा।

बैंक द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न अवधियों के एमसीएलआर में 15 बेसिस प्वाइंट्स तक की वृद्धि की गई है। हालांकि, ओवरनाइट और एक महीने की एमसीएलआर को 7.85% पर अपरिवर्तित रखा गया है। वहीं, तीन महीने की दर 8.25% से बढ़कर 8.40%, छह महीने की दर 8.60% से बढ़कर 8.75% और सबसे महत्वपूर्ण एक वर्ष की एमसीएलआर को 8.70% से बढ़ाकर 8.85% कर दिया गया है। दो साल की एमसीएलआर 8.75% से बढ़कर 8.90% और तीन साल की दर 8.80% से बढ़कर 8.95% हो गई है। अधिकांश ऑटो लोन, पर्सनल लोन और कॉर्पोरेट वर्किंग कैपिटल लोन 1 साल की एमसीएलआर से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही, खुदरा होम लोन को प्रभावित करने वाला ईबीएलआर (EBLR) बढ़कर 8.15% प्लस स्प्रेड और आरएलएलआर (RLLR) 7.75% प्लस स्प्रेड पर पहुंच गया है।

बैंक के इस फैसले से फ्लोटिंग रेट वाले सभी कर्जदारों की जेब पर सीधा वित्तीय असर पड़ेगा। यदि किसी ग्राहक ने 30 लाख रुपये का होम लोन 8.50% की ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया हुआ था, तो उसकी मौजूदा ईएमआई लगभग 26,035 रुपये प्रति माह बनती है। ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी होकर 8.75% होने पर यही ईएमआई बढ़कर 26,511 रुपये हो जाएगी। यानी हर महीने लगभग 476 रुपये और सालाना आधार पर 5,712 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पूरे 20 साल की अवधि में यह अंतर लगभग 1.14 लाख रुपये के अतिरिक्त कुल ब्याज के रूप में सामने आएगा। यदि लोन की रकम 50 लाख रुपये है, तो मासिक ईएमआई में लगभग 794 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी होगी, जो सालाना आधार पर करीब 9,528 रुपये का अतिरिक्त खर्च जोड़ेगी।

अक्टूबर 2019 के बाद रिजर्व बैंक के नियमों के तहत बैंकों द्वारा जारी किए गए लगभग सभी नए होम लोन और अधिकांश पर्सनल लोन सीधे बाहरी बेंचमार्क यानी ईबीएलआर या आरएलएलआर से जुड़े हैं। इन बेंचमार्क्स में बदलाव होते ही अगली बिलिंग साइकिल या तिमाही रीसेट पर ब्याज दर स्वतः बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जो पुराने कर्जदार अभी भी एमसीएलआर (MCLR) व्यवस्था के तहत लोन चला रहे हैं, उन पर इसका असर उनके संबंधित रीसेट डेट (Reset Date) के दिन से लागू होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी ग्राहक का एक साल का एमसीएलआर रीसेट हर साल जनवरी में आता है, तो नई 8.85% की दर जनवरी के बाद से ही उनकी ईएमआई में जुड़ेगी।

ब्याज दरें बढ़ने पर आमतौर पर बैंक ग्राहकों की ईएमआई तुरंत बढ़ाने के बजाय लोन का रीपेमेंट टेन्योर (अवधि) बढ़ा देते हैं, ताकि मासिक बजट तुरंत न बिगड़े। लेकिन टेन्योर बढ़ने से कुल चुकाया जाने वाला ब्याज काफी अधिक हो जाता है। ऐसे में वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि कर्जदारों को हर साल लोन के मूलधन का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा पार्ट-पेमेंट (Prepayment) के जरिए चुकाने की योजना बनानी चाहिए, जिससे बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर खत्म हो सके। इसके अलावा, पुराने एमसीएलआर व्यवस्था में फंसे ग्राहक मामूली प्रोसेसिंग फीस देकर अपने लोन को मौजूदा पारदर्शी ईबीएलआर/आरएलएलआर व्यवस्था में स्विच करवा सकते हैं।