
अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे आम लोगों और रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए त्योहारी सीजन के बीच जेब पर भारी पड़ने वाली खबर सामने आ रही है। प्रमुख ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म्स (विशेषकर Emkay Research और उद्योग विश्लेषकों) की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश की प्रमुख सीमेंट विनिर्माण कंपनियां मध्य अक्टूबर (15 अक्टूबर के आसपास) से सीमेंट की कीमतों में ₹10 से ₹15 प्रति बोरी (50 किलोग्राम बैग) तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। यदि यह मूल्य वृद्धि पूरे देश में लागू होती है, तो खुदरा बाजार में सीमेंट का औसत भाव ₹360 से बढ़कर ₹375 से ₹390 प्रति बोरी के दायरे में पहुंच सकता है, जिससे मकान निर्माण और मरम्मत का कुल बजट सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
सीमेंट उद्योग के जानकारों के अनुसार, यह संभावित बढ़ोतरी कंपनियों के मुनाफे को बचाने के लिए की जा रही है, क्योंकि पिछले 6 से 7 महीनों से इनपुट लागत (Input Costs) लगातार बढ़ रही है:
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पेटकोक और आयातित कोयले की कीमतों में उछाल: सीमेंट उत्पादन में बिजली और ईंधन (Power & Fuel) का खर्च कुल उत्पादन लागत का लगभग 30 से 35 प्रतिशत होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम कोक (Petcoke) और आयातित कोयले की दरों में आई तेजी ने उत्पादन लागत ₹300 से ₹400 प्रति टन तक बढ़ा दी है।
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कच्चे तेल में तेजी और लॉजिस्टिक्स खर्च: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की मजबूत कीमतों के कारण माल ढुलाई (Freight/Logistics Cost) में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। सीमेंट भारी और बल्क सामग्री होने के कारण कारखाने से डीलर तक पहुंचाने का डीजल खर्च सीधे मार्जिन पर दबाव डालता है।
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तिमाही नतीजों में मार्जिन में गिरावट: वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2) में कंपनियों की प्रति टन कमाई में ₹200 से ₹250 तक की क्रमिक गिरावट का अनुमान जताया गया है, जिसे संतुलित करने के लिए कंपनियां फेस्टिव सीजन में निर्माण गतिविधियों की मांग का सहारा ले रही हैं।
एक सामान्य 1,000 वर्ग फीट के मकान (Ground Floor) के निर्माण में औसतन 350 से 450 बोरी सीमेंट की खपत नींव से लेकर स्लैब ढलाई तक होती है:
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सीधा अतिरिक्त खर्च: यदि प्रति बोरी ₹15 की वृद्धि होती है, तो 400 बोरियों पर केवल सीमेंट के मद में लगभग ₹6,000 का सीधा अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।
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बहुमंजिला और बड़े प्रोजेक्ट्स पर असर: बड़े आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स में जहां हजारों बोरियों की खपत होती है, वहां कुल प्रोजेक्ट लागत लाखों रुपये बढ़ जाएगी, जिसका अंतिम असर प्रति वर्ग फीट फ्लैट की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
डीलर सूत्रों के मुताबिक, कंपनियां 15 अक्टूबर के बाद से विभिन्न क्षेत्रों (नॉर्थ, सेंट्रल, वेस्ट और साउथ जोन) में चरणबद्ध तरीके से नए इनवॉयस रेट लागू कर सकती हैं। हालांकि, मानसून समाप्त होने के बाद बुनियादी ढांचा और हाईवे परियोजनाओं में निर्माण कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है, जिससे मांग मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां बढ़ी हुई कीमतों को बाजार में कितना टिका पाती हैं, यह आने वाले हफ्तों में मांग की मजबूती पर निर्भर करेगा। घर का निर्माण करा रहे लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी जरूरत का सीमेंट दाम बढ़ने से पहले ही स्थानीय अधिकृत डीलरों से बुक कराने पर विचार कर सकते हैं।
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