
दशहरा, धनतेरस और दीपावली के त्योहारी सीजन से ठीक पहले उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। 15 अक्टूबर से प्रदेश भर के सभी हलवाइयों, स्वीट कॉर्नर्स और मिठाई निर्माताओं के लिए अपनी दुकानों में बिकने वाली हर प्रकार की मिठाई—चाहे वह डिब्बाबंद (Packaged) हो या काउंटर की ट्रे में रखी खुली (Loose) मिठाई—पर ‘यूज बाय डेट’ (Use-by Date यानी उपभोग की अंतिम तारीख) प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब कोई भी दुकानदार बिना उपभोग तिथि अंकित किए मिठाइयों की बिक्री नहीं कर सकेगा। 15 अक्टूबर से पूरे राज्य के सभी 75 जिलों में यह नियम शत-प्रतिशत लागू हो जाएगा।
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ट्रे और डिस्प्ले काउंटर पर स्पष्ट प्रदर्शन: हलवाई जिस ट्रे या रैक में मिठाइयां सजाकर रखते हैं, उस ट्रे के आगे स्पष्ट रूप से एक लेबल या स्लिप लगानी होगी, जिस पर मिठाई बनाने की तारीख (Date of Manufacturing) और उसके उपभोग की अंतिम सुरक्षित तारीख (Use-by Date) बड़े अक्षरों में लिखी हो।
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डिब्बों पर भी दर्ज होगी तारीख: काउंटर से मिठाई पैक करते समय डिब्बे (Sweet Box) के ऊपर भी यह तारीख लिखना अनिवार्य होगा ताकि ग्राहक घर ले जाकर भी जान सके कि मिठाई कब तक खाने योग्य है।
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शेल्फ लाइफ के अनुसार वर्गीकरण: सभी मिठाइयों की उम्र एक समान नहीं होती। एफएसडीए ने सामग्री के आधार पर मिठाइयों की शेल्फ लाइफ 1 दिन से लेकर 30 दिन तक निर्धारित की है:
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छेना और बंगाली मिठाइयां (रसगुल्ला, रसमलाई, चमचम आदि): अधिकतम 1 से 2 दिन (फ्रिज में)।
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खोया और मावा से बनी मिठाइयां (पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन): 2 से 4 दिन।
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घी और बेसन की सूखी मिठाइयां (लड्डू, मैसूर पाक, सोंठ के लड्डू): 7 से 15 दिन।
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काजू कतली, ड्राय फ्रूट्स व डिब्बाबंद सोन पापड़ी/पेठा: 15 से 30 दिन।
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घोषित तारीख तक गुणवत्ता की सीधी जिम्मेदारी: दुकानदार जो ‘यूज बाय डेट’ लिखेंगे, उस तारीख तक उत्पाद की शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखने की कानूनी जवाबदेही सीधे व्यापारी की होगी।
त्योहारों पर बड़े पैमाने पर बिकने वाले मिलावटी खोये और पनीर पर शिकंजा कसने के लिए शासन ने दुग्ध प्रसंस्करण और दूध ठंडा करने वाली इकाइयों (Milk Chilling & Processing Plants) में औद्योगिक कूलेंट के रूप में ‘एथिलीन ग्लाइकोल’ (Ethylene Glycol) और ‘डायथिलीन ग्लाइकोल’ (Diethylene Glycol) के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ये जहरीले रासायनिक तत्व अक्सर लीकेज के जरिए दूध व दूध उत्पादों में मिलकर जानलेवा साबित होते हैं। अब इनके स्थान पर केवल खाद्य-ग्रेड कूलेंट्स (Food-Grade Coolants) के इस्तेमाल की ही अनुमति दी गई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 15 अक्टूबर से प्रदेश के सभी मंडलों और जिलों में स्पेशल टास्क फोर्स और फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर्स की टीमें लगातार औचक निरीक्षण (Surprise Raids) करेंगी:
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बिना ‘यूज बाय डेट’ के बेची जा रही मिठाइयों को तुरंत जब्त कर नष्ट कराया जाएगा।
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act, 2006) की धाराओं के तहत दुकानदारों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ गंभीर उल्लंघनों पर दुकान का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
त्योहारों पर अक्सर दुकानों में पुरानी व बासी मिठाइयों को चाशनी में डुबोकर या नया रूप देकर बेचने की शिकायतें आती थीं। उत्तर प्रदेश सरकार के इस सख्त फैसले से जहां मिलावटखोरों और मुनाफाखोरों पर अंकुश लगेगा, वहीं ग्राहकों को शुद्ध, ताजी और भरोसेमंद मिठाइयां खरीदने का कानूनी अधिकार मिलेगा।
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