
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजनीतिक रूप से मुखर नेत्री रोहिणी आचार्य ने देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के प्रदर्शन को लेकर एक बहुत बड़ा और तीखा बयान दिया है। रोहिणी आचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा है कि देश के लोकतंत्र में किसी की तानाशाही नहीं चल सकती और हर परिस्थिति में जनता की मर्जी ही सर्वोपरि होती है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे इस चर्चित धरने-प्रदर्शन को रोहिणी आचार्य ने अपना पूर्ण और खुला समर्थन (Full Support) देने का ऐलान किया है, जिसके बाद से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। उनके इस समर्थन को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर वे इस आंदोलन के जरिए किस बड़े सियासी संदेश को देश की जनता तक पहुंचाना चाहती हैं।
राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर मैदान पर इन दिनों विभिन्न मुद्दों, रोजगार की मांगों और व्यवस्थागत बदलाव को लेकर विभिन्न संगठनों द्वारा धरने-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले आयोजित इस बड़े आंदोलन में जब किसानों, युवाओं और आम जनता ने हुंकार भरी, तो राजनीतिक हस्तियों की निगाहें भी इस ओर खिंच चलीं। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सार्वजनिक बयानों के जरिए इस प्रदर्शन के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति और समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा और आम नागरिक जब अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरता है, तो सत्ता में बैठे लोगों को उनकी आवाज़ सुननी ही होगी। तानाशाही रवैये से जनता के अधिकारों को नहीं दबाया जा सकता, और इसी वैचारिक पृष्ठभूमि के तहत वे इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी हैं।
अपने बयानों और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश के जरिए स्पष्ट किया कि भारत का संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने का मौलिक अधिकार देता है। उन्होंने लिखा कि जब-जब देश में जनविरोधी नीतियां थोपने का प्रयास किया जाएगा, तब-तब जनता अपनी एकजुटता से उसका मुंहतोड़ जवाब देगी। उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरजेडी परिवार इस प्रकार के जन-आंदोलनों को समर्थन देकर एक बार फिर से जमीन स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और विपक्ष की आक्रामक भूमिका को धार देने की रणनीति पर काम कर रहा है। जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में विभिन्न राज्यों से पहुंचे लोगों ने भी रोहिणी आचार्य के इस समर्थन का स्वागत किया है।
रोहिणी आचार्य द्वारा दिल्ली के इस प्रदर्शन को समर्थन दिए जाने के बाद बिहार से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में गर्माहट आ गई है। जहां एक तरफ विपक्षी दलों और समर्थकों का कहना है कि यह जनता की आवाज को बुलंद करने का एक सशक्त माध्यम है, वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं का मानना है कि यह केवल राजनीतिक रोटियां सेकने और माहौल गरमाने का एक प्रयास मात्र है। बहरहाल, जो भी हो, इस पूरे घटनाक्रम ने जंतर-मंतर पर चल रहे धरने को राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में भी व्यापक रूप लेता है और क्या अन्य बड़े राजनीतिक दल भी खुलकर इसके समर्थन में सामने आते हैं।
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