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बोर्ड परीक्षाओं का तनाव होगा छूमंतर: अब साल में दो बार मिलेंगे परीक्षा देकर नंबर सुधारने के मौके

छात्र जीवन के दौरान ‘बोर्ड परीक्षा’ (Board Exam) का नाम सुनते ही अधिकांश विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के दिलों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। साल भर की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा के वे तीन घंटे और परिणाम के दिन आने वाला तनाव कई बार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। लेकिन अब देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली में छात्रों के इस भारी मानसिक तनाव को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में एक बहुत ही क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया जाने लगा है। केंद्रीय शिक्षा बोर्डों की तर्ज पर अब राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने भी विद्यार्थियों के हित में एक बेहद बड़ा बदलाव करने का मन बना लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स और शैक्षणिक गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, आने वाले शैक्षणिक सत्रों में आरबीएसई बोर्ड भी छात्रों को साल में दो बार बोर्ड परीक्षाएं आयोजित कराने की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने से विद्यार्थियों के पास अपने कम अंकों को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन करने का एक और सुनहरा मौका मिल जाएगा, जिससे परीक्षा के डर से होने वाली घबराहट से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

साल में दो बोर्ड परीक्षाओं का नया कॉन्सेप्ट और छात्रों को मिलने वाले इसके जबरदस्त फायदे

नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत देश भर की शिक्षा प्रणालियों में छात्रों के रटन विद्या के बजाय उनकी समझ और कौशल को परखने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में साल में दो बार बोर्ड परीक्षाएं कराने का विचार बेहद लोकप्रिय हो रहा है। यदि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इस व्यवस्था को पूरी तरह से धरातल पर उतार देता है, तो छात्रों को यह स्वतंत्रता मिल जाएगी कि वे साल में किसी भी एक परीक्षा या फिर दोनों परीक्षाओं में बैठकर अपने सर्वश्रेष्ठ अंकों (Best of Two) को अपने फाइनल रिजल्ट में जुड़वा सकें। अक्सर ऐसा होता है कि परीक्षा के दिन तबीयत खराब होने के कारण, किसी पारिवारिक आपातकाल या अन्य कारणों से साल भर मेहनत करने वाला छात्र भी पेपर में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दे पाता है, और उसका पूरा साल बर्बाद हो जाता है। इस नई व्यवस्था के आ जाने से बच्चों के पास अपनी गलतियों को सुधारने और अपनी क्षमता साबित करने का दूसरा मौका आसानी से उपलब्ध होगा, जिससे उनका आत्मविश्वास भी सातवें आसमान पर रहेगा।

आरबीएसई (RBSE) की इस नई तैयारी से स्कूलों और शिक्षा तंत्र में मची हलचल

राजस्थान के लाखों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के लिए आरबीएसई का यह संभावित कदम किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। प्रदेश के दूरदराज के गांवों से लेकर बड़े शहरों तक फैले इस बोर्ड के अंतर्गत हर साल लाखों बच्चे दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण, कॉपियों के मूल्यांकन, समय पर परिणाम जारी करने और पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी अभी से रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं। बोर्ड का यह मानना है कि शिक्षा प्रणाली जितनी अधिक लचीली (Flexible) होगी, छात्रों का मानसिक विकास उतना ही बेहतर तरीके से हो सकेगा। परीक्षा के भारी-भरकम तनाव के कारण देश में युवा पीढ़ी में जो डिप्रेशन और कुंठा की समस्याएं देखने को मिलती हैं, उन्हें कम करने की दिशा में यह कदम एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। स्कूल प्रबंधन और शिक्षक भी इस बदलाव का स्वागत कर रहे हैं क्योंकि इससे बच्चों को सीखने के लिए अधिक समय और सकारात्मक माहौल मिल सकेगा।

बोर्ड परीक्षा के पारंपरिक पैटर्न में आने वाले बदलाव और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

जब से आरबीएसई द्वारा इस प्रकार के बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हुई है, तब से पूरे प्रदेश के अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि यह निर्णय बहुत पहले आ जाना चाहिए था क्योंकि बच्चों पर केवल एक एग्जाम के आधार पर अपने भविष्य को तय करने का जो दबाव रहता था, वह मानसिक रूप से काफी कष्टदायक होता था। अब छात्र बिना किसी फोबिया या डर के परीक्षा हॉल में जा सकेंगे। हालांकि, शिक्षाविदों का यह भी सुझाव है कि साल में दो बार परीक्षाएं आयोजित करने से बोर्ड प्रशासन पर प्रशासनिक और वित्तीय बोझ बढ़ सकता है, इसलिए इसके क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत और त्रुटिहीन कार्ययोजना बनाने की जरूरत होगी। कुल मिलाकर, राजस्थान बोर्ड का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है, जहां छात्रों की सफलता का पैमाना सिर्फ एक दिन का पेपर नहीं, बल्कि उनके सीखने की निरंतर प्रक्रिया बनेगी।