
अक्सर आम लोगों के बीच यह धारणा बनी रहती है कि बिना 750 या उससे अधिक के सिबिल (CIBIL) स्कोर के बैंक से एक रुपया भी कर्ज नहीं मिल सकता। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों और बैंकिंग नियमों के अनुसार, केवल क्रेडिट हिस्ट्री न होने के आधार पर किसी भी पहली बार लोन लेने वाले आवेदक (First-Time Borrower) की अर्जी सीधे खारिज नहीं की जा सकती।
क्रेडिट ब्यूरो की भाषा में ऐसे ग्राहकों को ‘न्यू-टू-क्रेडिट’ (NTC) या रिपोर्ट में ‘NH’ (No History) अथवा ‘-1’ के रूप में चिन्हित किया जाता है। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं होता कि आपका क्रेडिट स्कोर ‘खराब’ है; इसका सीधा मतलब सिर्फ इतना है कि आपने पहले कभी कोई औपचारिक कर्ज या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं किया है। वर्तमान में बड़े कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) वैकल्पिक डेटा और आय की स्थिरता के आधार पर बिना सिबिल स्कोर वाले ग्राहकों को भी लोन उपलब्ध करा रहे हैं।
जब लेंडर के पास आपकी पुरानी रीपेमेंट हिस्ट्री जांचने का जरिया नहीं होता, तो वह आपकी वर्तमान वित्तीय क्षमता और रीपेमेंट क्षमता को आधार बनाता है:
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1. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के एवज में लोन (Loan Against FD): यह बिना सिबिल स्कोर के लोन पाने का सबसे तेज और सबसे किफायती विकल्प है। यदि आपके पास किसी बैंक में एफडी है, तो बैंक बिना किसी क्रेडिट स्कोर जांच के आपकी एफडी राशि का 85% से 90% तक लोन दे देते हैं। इस पर ब्याज दर भी आपकी एफडी पर मिलने वाले ब्याज से मात्र 1% से 2% अधिक होती है।
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2. गोल्ड लोन (Gold Loan): घर में रखे सोने के गहनों या सिक्कों को गिरवी रखकर बैंक या एनबीएफसी से तुरंत लोन लिया जा सकता है। चूंकि यह एक सिक्योर्ड लोन है, इसलिए इसमें सिबिल स्कोर की कोई अनिवार्य शर्त नहीं होती और ब्याज दरें भी अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन से काफी कम होती हैं।
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3. सैलरी अकाउंट और बैंक से पुराना संबंध: जिस बैंक में आपका सैलरी खाता या पुराना सेविंग्स अकाउंट चल रहा है, वह बैंक आपके खाते के इनफ्लो, मंथली एवरेज बैलेंस और लेन-देन के पैटर्न को देखकर प्री-अप्रूव्ड या स्मॉल-टिकट पर्सनल लोन ऑफर कर देता है।
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4. को-ऐप्लिकेंट या गारंटर (Guarantor) जोड़ना: यदि आप अनसिक्योर्ड लोन लेना चाहते हैं, तो परिवार के किसी ऐसे सदस्य (माता-पिता, जीवनसाथी या भाई) को को-बॉरोअर बनाएं जिनका सिबिल स्कोर 750 से अधिक हो। गारंटर की मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल के दम पर बैंक आपको आसानी से लोन स्वीकृत कर देते हैं।
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5. अल्टरनेटिव डेटा और डिजिटल लेंडर्स (NBFCs): कई फिनटेक और एनबीएफसी कंपनियां पारंपरिक सिबिल के बजाय आपके 6 महीने के बैंक स्टेटमेंट, यूटिलिटी बिलों (बिजली, मोबाइल) के भुगतान के समय और रोजगार की स्थिरता को एल्गोरिदम से परखकर ₹25,000 से ₹2 लाख तक का लोन स्वीकृत करती हैं।
अक्सर लोग ‘नो सिबिल’ (No CIBIL) और ‘बैड सिबिल’ (Bad CIBIL / Low Score) को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है:
| पैमाना | नो सिबिल / न्यू-टू-क्रेडिट (NH / -1) | खराब सिबिल (Score < 650) |
| अर्थ | आपने जीवन में पहले कभी कोई लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया। | आपने अतीत में ईएमआई बाउंस की है या डिफॉल्ट किया है। |
| बैंक का नजरिया | तटस्थ (Neutral); आय और जॉब प्रोफाइल देखकर लोन संभव है। | नकारात्मक (Negative); अनसिक्योर्ड लोन मिलना बेहद कठिन। |
| लोन मिलने की संभावना | सिक्योर्ड लोन, गोल्ड लोन या को-ऐप्लिकेंट के साथ आसान। | केवल गोल्ड या प्रॉपर्टी कोलैटरल पर ही संभव। |
| ब्याज दर | मानक या जोखिम आधारित मामूली प्रीमियम। | काफी अधिक पेनाल्टी और हाई-रिस्क ब्याज दर। |
बिना क्रेडिट हिस्ट्री के आवेदन करते समय आपके आय प्रमाण ही आपकी साख साबित करते हैं:
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पहचान व पते का प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या वोटर आईडी।
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सैलरीड आवेदकों के लिए: पिछले 3 से 6 महीने की सैलरी स्लिप, फॉर्म 16 और 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट (जिसमें वेतन क्रेडिट दिखता हो)।
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सेल्फ-एम्प्लॉयड के लिए: पिछले 1 से 2 साल का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), जीएसटी रिटर्न और 6 महीने का करंट/सेविंग्स अकाउंट स्टेटमेंट।
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रोजगार की निरंतरता: मौजूदा कंपनी का एम्प्लॉयमेंट आईडी कार्ड या ऑफर लेटर।
चाहे आप लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, जयपुर या मुंबई से पहली बार लोन के लिए आवेदन कर रहे हों, कुछ बुनियादी सावधानियां बरतनी जरूरी हैं:
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एक साथ कई जगह आवेदन न करें: एक ही समय पर 5-6 बैंकों या ऐप्स पर अप्लाई करने से बार-बार ‘हार्ड इन्क्वायरी’ होती है, जिससे आपका नया बनने वाला स्कोर खराब हो सकता है।
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अनधिकृत चाइनीज/फर्जी लोन ऐप्स से बचें: केवल आरबीआई द्वारा रजिस्टर्ड बैंकों या एनबीएफसी (NBFC) से ही संपर्क करें। जो ऐप्स बिना किसी दस्तावेज के 2 मिनट में लोन का दावा करते हैं, वे साइबर फ्रॉड और ब्लैकमेलिंग का जरिया हो सकते हैं।
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छोटा लोन लेकर समय पर चुकाएं: पहली बार में बड़ी रकम मांगने के बजाय ₹30,000 से ₹50,000 का छोटा लोन लें और उसकी ईएमआई समय पर चुकाएं। 6 से 8 महीने के भीतर आपका सिबिल स्कोर स्वतः 750 के पार पहुंच जाएगा, जिससे भविष्य में बड़े होम लोन या कार लोन आसानी से मिल सकेंगे।
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