
दुबई से तेल अवीव जा रही ‘फ्लाईदुबई’ (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 के कॉकपिट के भीतर हाल ही में घटी खौफनाक और हिंसक घटना ने दुनिया भर के विमानन महकमों को झकझोर कर रख दिया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद अब भारत में भी एविएशन सिक्योरिटी सिस्टम की उच्च स्तर पर समीक्षा किए जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित समीक्षा के तहत हवाई सुरक्षा से जुड़े मौजूदा एसओपी (SOPs), पायलटों की मनोवैज्ञानिक जांच (साइकोमेट्रिक टेस्ट) और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर ‘स्काई मार्शल’ की तैनाती जैसे बेहद अहम पहलुओं को नए सिरे से परखा जा सकता है। हालांकि, भारत में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए (DGCA) या बीकास (BCAS) की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विमानन सुरक्षा के जानकारों के बीच यह एक बड़ा बहस का मुद्दा बन गया है।
गत 30 सितंबर को घटी इस घटना के दौरान दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कॉकपिट के भीतर दोनों पायलटों के बीच अचानक हिंसक झड़प हो गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से हमला कर दिया था, जिसके बाद विमान ने अचानक तेजी से ऊंचाई खोनी शुरू कर दी और आपातकालीन सिग्नल (Squawk 7700 और 7500) प्रसारित किए, जो हाईजैक या गैर-कानूनी दखल का संकेत देते हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बाद में पुष्टि की थी कि हमले के बाद को-पायलट कथित तौर पर विमान को क्रैश करने की फिराक में था, लेकिन घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छर और क्रू तथा यात्रियों की सूझबूझ से एक बड़ा विमान हादसा टल गया और विमान को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया।
इस भयानक घटना के सामने आने के बाद दुनिया भर में एयरलाइन क्रू और विशेष रूप से पायलटों के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण (Mental Health Assessment) का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है। भारत में भी डीजीसीए की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गाइडलाइंस के तहत फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। साल 2023 में डीजीसीए द्वारा जारी मेडिकल सर्कुलर में प्री-एम्प्लॉयमेंट साइकोलॉजिकल असेसमेंट की सिफारिश की गई थी, जिसमें पायलटों की संज्ञानात्मक क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और व्यक्तित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आकलन शामिल होता है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि हर पायलट का नियमित और एक समान साइकोमेट्रिक टेस्ट अनिवार्य नहीं है, लेकिन फ्लाईदुबई जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि क्या मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं को और अधिक कड़ा करने की आवश्यकता है या नहीं।
इस पूरी समीक्षा का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण बिंदु ‘स्काई मार्शल’ (Sky Marshal) की तैनाती से जुड़ा हुआ है। भारत में विमान अपहरण या किसी भी गंभीर सुरक्षा खतरे से निपटने के लिए संवेदनशील उड़ानों पर स्काई मार्शल तैनात करने की पुख्ता व्यवस्था पहले से मौजूद है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) के दिशा-निर्देशों और एनजीएस (NSG) से जुड़े ऑपरेशनल प्रोसेस के तहत यह सुरक्षा तय की जाती है।
फ्लाईदुबई की इस घटना के बाद यह आकलन किया जा रहा है कि भविष्य में किन-किन संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय रूटों और परिस्थितियों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों या स्काई मार्शल की मौजूदगी अनिवार्य की जानी चाहिए। हालांकि, सुरक्षा और गोपनीयता के कारणों से स्काई मार्शल की तैनाती के ब्योरे को सार्वजनिक नहीं किया जाता है।
इस पूरी घटना ने विमानन सुरक्षा के इतिहास में एक नया सबक दिया है कि यदि किसी विमान के भीतर खतरा बाहरी दुश्मनों से नहीं, बल्कि खुद कॉकपिट के भीतर बैठे शख्स से पैदा हो जाए, तो सुरक्षा तंत्र कैसे प्रतिक्रिया देगा। भारत में विमानन सुरक्षा कई स्तरों पर काम करती है, जिसमें एयरलाइंस की आंतरिक प्रक्रियाएं, एयरपोर्ट सिक्योरिटी, खुफिया एजेंसियां और नियामक संस्थाएं शामिल हैं।
फिलहाल फ्लाईदुबई घटना की अंतरराष्ट्रीय जांच जारी है, और उसी के निष्कर्षों के आधार पर भारत समेत दुनिया भर के देश अपनी नीतियों में बदलाव पर विचार करेंगे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कभी भी ऐसी असामान्य या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर कॉकपिट, क्रू मेंबर्स, यात्रियों और जमीन पर मौजूद सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रतिक्रिया का समय न्यूनतम हो और सुरक्षा में कोई चूक न बचे।
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