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NHAI Quality Audit 2026: 17 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स पर NHAI का कड़ा शिकंजा, कम बिडिंग वाले ठेकों की विशेष जांच शुरू

देशभर में विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क तैयार करने में जुटी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण गुणवत्ता (Construction Quality) को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। कई इलाकों में नए बने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर समय से पहले दरारें पड़ने, धंसाव और डामर उखड़ने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के निर्देश पर 17 महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की विशेष गुणवत्ता जांच (Special Quality Audit) का आदेश जारी किया गया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन परियोजनाओं पर केंद्रित है जहां ठेकेदारों ने टेंडर हासिल करने की होड़ में अनुमानित लागत से असामान्य रूप से काफी कम दर पर बोलियां (Abnormally Low Quoted Bids) लगाई थीं। एनएचएआई का मानना है कि अत्यधिक कम कीमत पर ठेका लेने के बाद कंपनियां मुनाफा बचाने के लिए निर्माण सामग्री और सुरक्षा मानकों से समझौता कर सकती हैं, जिस पर समय रहते लगाम लगाना आवश्यक है।

एनएचएआई ने मनमाने तरीके से प्रोजेक्ट्स का चयन करने के बजाय एक पारदर्शी और सख्त त्रिस्तरीय फॉर्मूला तैयार किया है। जांच के लिए केवल उन्हीं परियोजनाओं को शॉर्टलिस्ट किया गया है जो निम्नलिखित तीनों मानकों को पूरा करती हैं:

  1. प्रोजेक्ट लागत: हाईवे परियोजना की कुल निर्माण लागत ₹500 करोड़ से अधिक होनी चाहिए।

  2. अत्यधिक डिस्काउंट (Low Bidding): ठेकेदार द्वारा दी गई वित्तीय बोली (Bid Value) एनएचएआई की अनुमानित टेंडर लागत से 15 प्रतिशत से अधिक कम पर स्वीकृत हुई हो।

  3. निर्माण की प्रगति: परियोजना का वास्तविक भौतिक कार्य (Physical Progress) वर्तमान में 35 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच पूरा हो चुका हो, ताकि सब-ग्रेड, बेस लेयर और स्ट्रक्चरल कंक्रीट की सही स्थिति जांची जा सके।

यह ऑडिट किसी एक क्षेत्र तक सीमित न होकर देश के 9 प्रमुख राज्यों में फैली महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर केंद्रित है। इनमें उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और गुजरात शामिल हैं। चयनित प्रोजेक्ट्स में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर, बाईपास और फोर-लेन व सिक्स-लेन चौड़ीकरण के काम शामिल हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में भारी औद्योगिक और माल ढुलाई वाले गलियारों पर निर्माण गुणवत्ता की कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए एनएचएआई ने 39 अनुभवी और सेवानिवृत्त वरिष्ठ इंजीनियरों का एक विशेष एक्सपर्ट पूल गठित किया है। इस टीम में सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय रेल, रक्षा मंत्रालय (MES/BRO) और विभिन्न राज्यों के लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं।

  • तकनीकी जांच का दायरा: यह टीम स्वीकृत ड्रॉइंग्स, बिटुमिनस और कंक्रीट ग्रेड, मिट्टी के भराव का घनत्व (Compaction), पुलों और फ्लाईओवर के पिलर्स की लोड-बेयरिंग क्षमता और ड्रेनेज सिस्टम की जांच करेगी।

  • सुरक्षा और पर्यावरण मानक: हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्जन, रोड साइनेज, क्रैश बैरियर और पर्यावरण सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा होगी।

  • समय-सीमा और री-ऑडिट: पहले चरण की जांच दिसंबर 2026 तक पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इसके ठीक 6 महीने बाद एक दूसरी स्वतंत्र टीम मौके पर जाकर यह सत्यापित करेगी कि चिन्हित की गई कमियों को सुधारा गया या नहीं।

एनएचएआई ने साफ कर दिया है कि यदि जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता घटिया पाई गई या तकनीकी नियमों का उल्लंघन सामने आया, तो ठेकेदारों और कंसल्टेंसी फर्मों पर बेहद सख्त कार्रवाई होगी:

  • बैंक गारंटी जब्ती: निर्माण कंपनी की परफॉर्मेंस बैंक सिक्योरिटी (Performance Bank Guarantee) का 50 प्रतिशत तक हिस्सा तुरंत जब्त किया जा सकता है।

  • टेंडर से 2 साल का प्रतिबंध: दोषी पाई जाने वाली निर्माण कंपनियों और सुपरवाइजरी कंसल्टेंट फर्मों को सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई के आगामी टेंडरों में भाग लेने से 2 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट (De-bar) किया जा सकता है।

  • कॉन्ट्रैक्ट निरस्तीकरण: अत्यधिक गंभीर लापरवाही पाए जाने पर ठेका रद्द कर किसी अन्य एजेंसी से काम पूरा कराया जाएगा और उसकी लागत पुरानी एजेंसी से वसूली जाएगी।

सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में अक्सर देखा गया है कि निर्माण कंपनियां काम हासिल करने के लिए भारी डिस्काउंट पर टेंडर डाल देती हैं, लेकिन बाद में प्रोजेक्ट में देरी करती हैं या घटिया मैटेरियल का इस्तेमाल करती हैं। एनएचएआई की इस विशेष ऑडिट पहल से निर्माण कंपनियों और कंसल्टेंट्स की जवाबदेही तय होगी। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी, बल्कि देश को सुरक्षित, टिकाऊ और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले राजमार्ग भी मिल सकेंगे।