
संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क)। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच से दुनिया के मौजूदा संकटों और युद्धों पर गहरी चिंता व्यक्त की। जयशंकर ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि युद्ध और भू-राजनीतिक टकरावों से कोसों दूर रहने वाले विकासशील और गरीब देशों को उन लड़ाइयों की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, जिन्हें शुरू करने या खत्म करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को जमीनी वास्तविकताओं का सामना करने की नसीहत देते हुए कहा कि आज की दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की आवाज ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे कम सुनी जाती है।
जयशंकर ने अपने संबोधन में रूस-यूक्रेन युद्ध, खाड़ी और पश्चिम एशिया के तनाव, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों और उससे वैश्विक खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे घातक प्रभावों का विस्तार से उल्लेख किया।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विश्व भर के नेताओं को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा:
“आज जो देश संघर्षों के भौगोलिक क्षेत्रों से बहुत दूर हैं, उन्हें बिना किसी गलती के दंडित किया जा रहा है। जो देश इन युद्धों के कारण सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अक्सर उन्हीं की राय को सबसे कम तवज्जो दी जाती है। इस महासभा को दुनिया की इस सच्ची और कड़वी स्थिति का सामना करना ही होगा।””
उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था (Globalised Economy) में जब युद्ध छिड़ता है, तो उसकी तरंगें पूरी दुनिया में फैलती हैं। विकासशील देशों (Global South) के लिए महंगाई, ईंधन की आसमान छूती कीमतें, उर्वरक संकट और खाद्यान्न असुरक्षा जीवन-मरण का प्रश्न बन चुकी हैं।
विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए दोहराया कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते:
-
यूक्रेन संघर्ष: जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जो अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने दोहराया कि अंतहीन युद्धों का दौर अब समाप्त होना चाहिए और शांति के लिए कूटनीति व बातचीत का रास्ता अपनाना अनिवार्य है।
-
व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर हमले अस्वीकार्य: खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) और लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Ships) और नाविकों पर हो रहे हमलों को जयशंकर ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा और व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बाधित करना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है। भारत ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय नाविकों की सुरक्षा के लिए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ पहल की भी शुरुआत की है।
-
पश्चिम एशिया और द्वि-राष्ट्र समाधान: पश्चिम एशिया में जारी हिंसा पर बोलते हुए उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा की अपील की और दोहराया कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति केवल एक व्यावहारिक ‘द्वि-राष्ट्र समाधान’ (Two-State Solution) के माध्यम से ही संभव हो सकती है।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र को आगाह करते हुए कहा कि यदि दुनिया लगातार धमकियों, प्रतिबंधों और दबावों के साए में जीती रहेगी, तो हम सचमुच एक गहरे गर्त (Abyss) के मुहाने पर खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति केवल युद्ध न होने का नाम नहीं है, बल्कि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में स्थिरता, सुरक्षा और पूर्वानुमान (Predictability) होना जरूरी है। भारत खाद्य, अनाज और ऊर्जा सुरक्षा को बहाल करने के लिए हर संभव मानवीय और कूटनीतिक सहायता देने को तैयार है।
girls globe