Friday , September 25 2026

लखनऊ को CM योगी की ₹12000 करोड़ की महा-सौगात: वरुण विहार और नैमिष नगर में 10600 एकड़ का नया हाईटेक शहर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आधुनिक विस्तार और भविष्य की आवासीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा विकसित की जा रही दो विशाल टाउनशिप—’वरुण विहार’ और ‘नैमिष नगर’—सहित पांच अत्याधुनिक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत भूमिपूजन और शिलान्यास किया। कुल 12 हजार करोड़ रुपये की विशाल वित्तीय लागत से विकसित की जाने वाली इन दोनों आवासीय योजनाओं के भूमिपूजन के साथ ही प्राधिकरण ने आम जनता और निवेशकों के लिए भूखंडों के औपचारिक पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) की खिड़की भी खोल दी है। राज्य सरकार का यह रणनीतिक कदम न केवल राजधानी में सुनियोजित आवासीय आवास उपलब्ध कराएगा, बल्कि अनधिकृत कॉलोनियों और अवैध निर्माणों के जाल को समाप्त कर विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

इस महत्वाकांक्षी मेगा प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ के दोनों छोरों पर 10,600 एकड़ से अधिक भूमि पर एक अत्याधुनिक सैटेलाइट शहर बसाने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विस्तृत खाका पेश करते हुए बताया कि काकोरी क्षेत्र में आगरा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रही ‘वरुण विहार आवासीय योजना’ 6,500 एकड़ से अधिक के विशाल भूभाग में फैली होगी, जो एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के जरिए पश्चिमी यूपी और दिल्ली से सीधे जुड़ेगी। वहीं, दूसरी तरफ सीतापुर रोड और आईआईएम रोड कॉरिडोर पर स्थित ‘नैमिष नगर आवासीय योजना’ लगभग 4,100 एकड़ क्षेत्रफल में तैयार की जा रही है, जो आध्यात्मिक नगरी नैमिषारण्य और मध्य यूपी के जिलों के लिए मुख्य प्रवेश द्वार बनेगी। प्राधिकरण ने इन दोनों प्रमुख योजनाओं में आम नागरिकों की जेब को ध्यान में रखते हुए आवासीय प्लॉटों की दरें लगभग ₹2,800 से ₹3,800 प्रति वर्गफीट निर्धारित की हैं। इसके अतिरिक्त, मध्यम वर्ग और कामकाजी पेशेवरों के लिए ₹2,166 करोड़ की लागत से बनने वाले पांच बहुमंजिला ग्रुप हाउसिंग अपार्टमेंट्स का भी शिलान्यास किया गया, जिससे हर आय वर्ग को अपना घर मिल सके।

भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनियोजित और अवैध विकास पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अनियोजित कॉलोनियों और मनमाने निर्माणों के कारण सबसे ज्यादा कष्ट और आर्थिक नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। पुराने दौर में भू-माफिया जहां-तहां कृषि भूमि पर अवैध प्लॉट काट देते थे, जहां न तो पक्की सड़कें होती थीं, न भूमिगत सीवर लाइन, न बिजली के पोल और न ही स्वच्छ पेयजल की कोई पाइपलाइन। मानसून के मौसम में जब इन इलाकों में भीषण जलभराव होता है, तो वर्षों तक आम नागरिक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब उत्तर प्रदेश में अव्यवस्थित विकास का दौर समाप्त हो चुका है। सरकार का उद्देश्य केवल खाली जमीन या प्लॉट बेचना नहीं है, बल्कि चौड़ी चार-लेन और छह-लेन सड़कें, भूमिगत यूटिलिटी डक्ट, अत्याधुनिक ड्रेनेज नेटवर्क, 24 घंटे जलापूर्ति, हरित पार्क, स्कूल, अस्पताल और कमर्शियल हब के साथ एक संपूर्ण और आत्मनिर्भर जीवनशैली का ढांचा तैयार करना है।

राजधानी लखनऊ के इस विस्तार को उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी ‘स्टेट कैपिटल रीजन’ (SCR) के विजन से सीधे तौर पर जोड़ा गया है। दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर लखनऊ और उसके आसपास के पांच पड़ोसी जिलों—उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी और रायबरेली—को मिलाकर एक विशाल आर्थिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि इन दोनों नई टाउनशिप का सीधा भौगोलिक जुड़ाव एससीआर के नेटवर्क से होगा, जिससे क्षेत्रीय आवागमन (पब्लिक मोबिलिटी) तेज और सुगम बनेगी। आउटर रिंग रोड (किसान पथ), एक्सप्रेसवे नेटवर्क और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के माध्यम से इन छह जिलों के नागरिक बिना किसी जाम के लखनऊ के प्रमुख केंद्रों तक पहुंच सकेंगे। इससे लखनऊ के मुख्य शहर पर जनसंख्या का बढ़ता दबाव कम होगा और आसपास के उपनगरीय क्षेत्रों में रोजगार, रियल एस्टेट और पर्यटन के नए अवसर सृजित होंगे।

आने वाले समय में यह संपूर्ण 10,600 एकड़ का क्षेत्र केवल आवासीय कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे देश के एक बड़े इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT), नॉलेज हब और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के रूप में तब्दील किया जाएगा। वरुण विहार और नैमिष नगर के मास्टर प्लान में बड़े आईटी पार्क्स, डेटा सेंटर्स, स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन लैब्स और आधुनिक स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों के लिए विशेष जोनिंग की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट और लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार के बीच यह संपूर्ण बेल्ट वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों और घरेलू तकनीकी दिग्गजों के लिए पसंदीदा गंतव्य बनकर उभर रही है। युवाओं को अपने ही गृह राज्य में उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलेंगी और लखनऊ की पहचान एक पारंपरिक विरासत शहर के साथ-साथ एक फ्यूचरिस्टिक हाई-टेक मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विश्व पटल पर स्थापित होगी।