
नई दिल्ली। आज 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) का दिन सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसे देश भर में अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) और गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan) के महापर्व के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। 10 दिनों तक घर-घर और सार्वजनिक पंडालों में विराजने के बाद आज बप्पा को अगले बरस जल्दी आने की कामना के साथ भावभीनी विदाई दी जाएगी। इसके साथ ही आज सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के ‘अनंत’ स्वरूप की पूजा-अर्चना कर 14 गांठों वाला रक्षासूत्र धारण किया जाता है।
आज के दिन का एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय पहलू यह भी है कि विसर्जन और पूजन का यह महापर्व पंचक के साए में संपन्न हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशिष्ट कार्यों पर निषेध रहता है, लेकिन देव आराधना, विसर्जन और मंत्र-साधना में इसका कोई दोष नहीं लगता। आइए जानते हैं आज 25 सितंबर 2026 का संपूर्ण पंचांग, शुभ चौघड़िया मुहूर्त, राहुकाल और पूजन समय।
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विक्रम संवत: 2083 (कालयुक्त)
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शक संवत: 1948
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माह: भाद्रपद (अधिक/शुद्ध मास गणना अनुसार)
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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तिथि: चतुर्दशी (दोपहर तक, तत्पश्चात पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ)
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वार: शुक्रवार (शुक्र देव और मां लक्ष्मी की आराधना का दिन)
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नक्षत्र: शतभिषा (दोपहर उपरांत पूर्वभाद्रपद नक्षत्र)
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योग: सुकर्मा योग (सायंकाल तक, तत्पश्चात धृति योग)
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करण: वणिज (तत्पश्चात विष्टि / भद्रा)
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चंद्र राशि: कुंभ राशि (पंचक प्रभाव जारी)
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सूर्य राशि: कन्या राशि
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सूर्योदय: सुबह 06:11 बजे
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सूर्यास्त: शाम 06:14 बजे
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चंद्रोदय: शाम 05:48 बजे
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चंद्रास्त: अगली सुबह 06:02 बजे
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा और बप्पा के विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्तों का विशेष महत्व है:
| मुहूर्त प्रकार | समय अवधि | महत्व / उपयुक्तता |
| प्रातः शुभ चौघड़िया (चर, लाभ, अमृत) | सुबह 06:11 बजे से 10:42 बजे तक | अनंत पूजन और बप्पा की प्रातः आरती व विसर्जन |
| अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ) | सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक | अनंत सूत्र बांधना और महासंकल्प |
| दोपहर शुभ मुहूर्त (शुभ चौघड़िया) | दोपहर 12:13 बजे से 01:43 बजे तक | दोपहर में प्रतिमा विसर्जन यात्रा |
| संध्या मुहूर्त (चर चौघड़िया) | शाम 04:44 बजे से 06:14 बजे तक | सूर्यास्त पूर्व विसर्जन अनुष्ठान |
चंद्रमा के कुंभ और मीन राशि में गोचर के दौरान पंचक लगता है। आज चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण कर रहे हैं, जिससे ‘चोर पंचक’ का प्रभाव बना हुआ है।
शास्त्रों के अनुसार, पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा, घर की छत डालना, ईंधन/घास इकट्ठा करना और चारपाई बुनना वर्जित माना जाता है। हालांकि, भगवान गणेश के विसर्जन और धार्मिक अनुष्ठानों पर पंचक का कोई अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता। विसर्जन से पूर्व बप्पा की विधिवत षोडशोपचार पूजा, मोदक का भोग, और क्षमा याचना करने के बाद शुभ चौघड़िया देखकर जल में विसर्जन पूर्णतः शास्त्रसम्मत और मंगलकारी माना गया है।
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राहुकाल: सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक (राहुकाल में कोई भी नया कार्य, विसर्जन यात्रा का शुभारंभ या रक्षासूत्र बांधना वर्जित है)।
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यमगण्ड: दोपहर 03:14 बजे से शाम 04:44 बजे तक।
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गुलिक काल: सुबह 07:42 बजे से 09:12 बजे तक।
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दुर्मुहूर्त: सुबह 08:35 बजे से 09:24 बजे तक।
आज के दिन कच्चे सूत या रेशम के धागे को कुमकुम और हल्दी से रंगकर उसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। ये 14 गांठें 14 भुवनों (भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम् आदि) और भगवान विष्णु के 14 स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं।
पुरुष इसे अपने दाहिने हाथ की कलाई पर और महिलाएं इसे अपने बाएं हाथ में धारण करती हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण के परामर्श पर पांडवों ने जुए में राजपाट हारने के बाद अनंत चतुर्दशी का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें पुनः उनका खोया हुआ राज्य और वैभव प्राप्त हुआ था।
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