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Simhasana Benefits: रोजाना केवल 40 सेकंड तक जीभ बाहर निकालने से क्या होता है? चेहरे का ग्लो, थायराइड और खर्राटों से राहत समेत जानें चौंकाने वाले फायदे

भागदौड़ भरी जिंदगी और घंटों स्क्रीन के सामने झुककर काम करने की आदत ने आधुनिक जीवनशैली में तनाव, गर्दन का अकड़न और समय से पहले चेहरे पर झुर्रियों की समस्या को आम बना दिया है। ऐसे में प्राचीन योग और आधुनिक फेशियल योग (Face Yoga) का एक बेहद सरल अभ्यास इन दिनों तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देखने में यह प्रक्रिया भले ही थोड़ी अजीब या हास्यास्पद लगे, लेकिन रोजाना सुबह खाली पेट केवल 30 से 40 सेकंड तक मुंह पूरी तरह खोलकर जीभ को बाहर निकालने का अभ्यास शरीर, गले और चेहरे के तंत्रिका तंत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

हठयोग में इस क्रिया को ‘सिंहासन’ (Simhasana or Lion Pose) या ‘सिंह मुद्रा’ कहा जाता है। इसमें व्यक्ति शेर की तरह दहाड़ते हुए या शांत भाव से अपनी जीभ को ठुड्डी (Chin) की दिशा में पूरी ताकत से बाहर खींचता है। आइए जानते हैं कि इस 40 सेकंड के अभ्यास से शरीर में क्या-क्या सकारात्मक बदलाव आते हैं।

चेहरे और गर्दन के हिस्से में 40 से अधिक मांसपेशियां होती हैं, जिनका हम दैनिक जीवन में बहुत कम उपयोग करते हैं:

  • प्लेटिस्मा और जबड़े की टोनिंग: जब आप जीभ को पूरी क्षमता से बाहर निकालते हैं, तो गर्दन की प्रमुख मांसपेशी ‘प्लेटिस्मा’ (Platysma) और जबड़े की रेखा (Jawline) पर गहरा खिंचाव पड़ता है। नियमित रूप से 40 सेकंड का यह खिंचाव लटकती त्वचा को टाइट करता है और ‘डबल चिन’ (Double Chin) को प्राकृतिक रूप से कम करता है।

  • चेहरे पर रक्त संचार में तेजी: इस मुद्रा से सिर और चेहरे की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Capillaries) में ऑक्सीजन युक्त खून का प्रवाह अचानक बढ़ जाता है। इससे चेहरे की सुस्ती दूर होती है, कोलेजन उत्पादन बढ़ता है और त्वचा पर बिना किसी केमिकल युक्त क्रीम के प्राकृतिक चमक (Natural Glow) आती है।

गले के निचले हिस्से में तितली के आकार की थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) स्थित होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है:

  • हार्मोनल संतुलन: जीभ को बाहर खींचने और साथ में गहरी सांस छोड़ने की प्रक्रिया थायराइड और पैराथायराइड ग्रंथियों पर आंतरिक दबाव डालती है। यह दबाव इन ग्रंथियों में रक्त के ठहराव को दूर कर हार्मोन के स्राव को संतुलित करने में सहायता करता है।

  • गले के संक्रमण और टॉन्सिल से बचाव: यह अभ्यास स्वर रज्जु (Vocal Cords), ग्रसनी (Pharynx) और टॉन्सिल्स की मालिश करता है। जिन लोगों को अक्सर गले में खराश, कफ जमना या टॉन्सिलाइटिस की शिकायत रहती है, उनके लिए यह क्रिया स्थानीय रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

रात में सोते समय खर्राटे (Snoring) आने की मुख्य वजह जीभ और तालू (Soft Palate) की मांसपेशियों का ढीला पड़कर वायुमार्ग में बाधा डालना होता है:

  • वायुमार्ग का सुदृढ़ीकरण: 40 सेकंड तक जीभ को बाहर स्ट्रेच करने से जीभ की आधार मांसपेशी (Genioglossus) मजबूत होती है।

  • गहरी नींद: जब जीभ की टोनिंग सुधरती है, तो सोते समय जीभ पीछे गले की ओर नहीं गिरती, जिससे सांस की नली खुली रहती है। यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) के हल्के लक्षणों को कम करने और खर्राटों की आवाज को धीमा करने में काफी कारगर सिद्ध होता है।

  • मानसिक तनाव से मुक्ति: योग विशेषज्ञों के अनुसार, चेहरे और जबड़े का हिस्सा हमारे भावनात्मक तनाव (Emotional Stress) को सबसे ज्यादा जकड़ कर रखता है। जब हम गुस्से या तनाव में होते हैं, तो अनजाने में अपने दांत और जबड़े भींच लेते हैं। जीभ बाहर निकालकर सांस छोड़ने से जबड़े का तनाव एक झटके में रिलीज हो जाता है, जिससे तंत्रिका तंत्र को शांति मिलती है।

  • आवाज में स्पष्टता और वाणी शुद्धि: बच्चों या वयस्कों में तुतलाहट, हकलाहट या भारी आवाज की समस्या में यह अभ्यास बेहद लाभकारी है। यह जीभ की अकड़न को दूर कर शब्दों के उच्चारण को साफ और मधुर बनाता है।

इस क्रिया का पूरा लाभ उठाने के लिए सही तकनीक का पालन करना जरूरी है:

  • सुबह खाली पेट सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें।

  • दोनों हाथों को घुटनों पर फैलाकर रखें और उंगलियों को तान लें।

  • नाक से एक गहरी सांस अंदर लें।

  • इसके बाद मुंह को जितना हो सके चौड़ा खोलें और अपनी जीभ को बाहर निकालते हुए ठुड्डी की ओर नीचे खींचें।

  • अपनी दृष्टि को दोनों भौंहों के बीच (आज्ञा चक्र / Third Eye) या नाक की नोक पर टिकाएं।

  • मुंह से ‘ह…’ की ध्वनि के साथ सांस बाहर छोड़ें और इस मुद्रा में जीभ को 30 से 40 सेकंड तक खिंचाव के साथ रोके रखें।

  • इसके बाद जीभ को अंदर लें, मुंह बंद करें और गले की हल्की मालिश करें। इसे रोजाना 2 से 3 बार दोहराया जा सकता है।