
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान देश के प्रत्यक्ष कर संग्रह (Direct Tax Collection) में शानदार तेजी देखने को मिली है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 सितंबर 2026 तक भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (Net Direct Tax Collection) 12.96 प्रतिशत (लगभग 13%) की सालाना वृद्धि दर्ज करते हुए ₹12,12,410.71 करोड़ (लगभग ₹12.12 लाख करोड़) के स्तर को पार कर चुका है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा ₹10,73,272.17 करोड़ दर्ज किया गया था।
यह जबरदस्त वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था में कॉरपोरेट कंपनियों के बेहतर मुनाफे, मजबूत घरेलू उपभोग और शेयर बाजार में खुदरा व संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
सीबीडीटी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, टैक्स रिफंड जारी करने से पहले और बाद के आंकड़े इस प्रकार हैं:
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ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन (Gross Collection): रिफंड्स के समायोजन से पहले कुल सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.19 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के साथ ₹14.32 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में ₹12.44 लाख करोड़ था।
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टैक्स रिफंड्स में 29% की वृद्धि: करदाताओं को तेजी से रिफंड जारी करने की नीति के तहत आयकर विभाग ने 17 सितंबर तक ₹2,20,000 करोड़ (₹2.20 लाख करोड़) से अधिक के रिफंड जारी किए हैं, जो पिछले साल के ₹1.70 लाख करोड़ की तुलना में 29.19 प्रतिशत अधिक हैं।
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एडवांस टैक्स में 16.18% का उछाल: दूसरी तिमाही (15 सितंबर) की अग्रिम कर किस्त के बाद कुल एडवांस टैक्स कलेक्शन ₹5,21,940 करोड़ (लगभग ₹5.22 लाख करोड़) पर पहुंच गया है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 16.18% की भारी बढ़त दर्ज की गई है।
चालू वित्त वर्ष में कंपनियों द्वारा चुकाए जाने वाले कॉरपोरेट टैक्स ने सबसे तेज रफ्तार दिखाई है:
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कॉरपोरेट टैक्स (Corporate Tax): शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह में 19.48 प्रतिशत का शानदार उछाल आया और यह ₹5.56 लाख करोड़ पर पहुंच गया (पिछले साल इसी अवधि में यह ₹4.65 लाख करोड़ था)। वहीं, कॉरपोरेट अग्रिम कर (Corporate Advance Tax) में 18.09% की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹4.16 लाख करोड़ दर्ज किया गया।
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गैर-कॉरपोरेट और पर्सनल टैक्स (PIT & HUF): व्यक्तिगत आयकर दाताओं, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) और फर्मों से मिलने वाला शुद्ध टैक्स 6 प्रतिशत बढ़कर ₹6.16 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। गैर-कॉरपोरेट वर्ग से एडवांस टैक्स 9.24% बढ़कर ₹1.06 लाख करोड़ के करीब रहा।
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू शेयर बाजार के लेन-देन पर लगने वाला प्रतिभूति लेन-देन कर यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) रहा है। भारतीय शेयर बाजारों (BSE और NSE) में रिटेल निवेशकों की रिकॉर्ड ट्रेडिंग और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) वॉल्यूम के दम पर एसटीटी कलेक्शन में 53 प्रतिशत की भारी-भरकम छलांग लगी है। 17 सितंबर 2026 तक सरकारी खजाने में एसटीटी के जरिए ₹40,214.36 करोड़ आए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज ₹26,305.72 करोड़ था।
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए डायरेक्ट टैक्स से कुल ₹26.97 लाख करोड़ जुटाने का महत्वाकांक्षी बजट लक्ष्य रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष से करीब 15 प्रतिशत अधिक है। पहली छमाही समाप्त होने से पहले ही सरकार ने अपने वार्षिक बजट लक्ष्य का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है।
टैक्स राजस्व में इस दमदार उछाल से केंद्र सरकार को अपने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत के लक्ष्य के भीतर सीमित रखने में बड़ी मदद मिलेगी। मजबूत राजस्व प्राप्ति से सरकार को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Capex), राजमार्गों, रेलवे और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर खर्च जारी रखने के लिए अतिरिक्त वित्तीय ताकत मिलेगी।
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