
टेलीविजन जगत में अपनी सशक्त अदाकारी का लोहा मनवाने वाले लोकप्रिय अभिनेता गौरव शर्मा इन दिनों कलर्स टीवी के नए धारावाहिक ‘सहर होने को है’ (Seher Hone Ko Hai) में अपने खूंखार खलनायक के किरदार से दर्शकों को रोमांचित कर रहे हैं। स्टार प्लस के कल्ट शो ‘दीया और बाती हम’ में आतंकवादी राजकुमार का यादगार किरदार निभाकर घर-घर में अपनी पहचान कायम करने वाले गौरव ने हाल ही में अपने जीवन के अनसुने संघर्षों, कॉरपोरेट नौकरी से टीवी की चकाचौंध तक के सफर और करियर के उस सबसे अंधेरे दौर पर खुलकर बात की है, जब उनकी तीन-चार साल की खून-पसीने की पूरी कमाई एक झटके में डूब गई थी और वे गहरे डिप्रेशन के भंवर में फंस गए थे।
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर मेरठ के रहने वाले गौरव शर्मा का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। अभिनय का शौक उन्हें बचपन से ही था, जहां वे स्कूल, कॉलेज और मोहल्ले के नाटकों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पूरे उत्साह से हिस्सा लेते थे। हालांकि, परिवार के नियमों के अनुसार उन्होंने पहले अपनी उच्च शिक्षा पूरी की और लगभग 15 वर्ष पूर्व मुंबई एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस (TCS) में नौकरी करने पहुंचे। नौकरी के सुरक्षित माहौल के बीच उनके भीतर बैठा कलाकार लगातार अंगड़ाइयां ले रहा था। गौरव ने आखिरकार एक बड़ा जोखिम उठाते हुए रातोंरात अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और तीन-चार लाख रुपये का पर्सनल लोन लेकर परिवार को बिना बताए पूरे छह महीने तक मुंबई के स्टूडियोज में धक्के खाए। जब महीनों तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला और पैसे खत्म होने लगे, तो उन्होंने अपनी आर्थिक मजबूरियों के चलते दोबारा एक कंपनी में नौकरी शुरू कर दी। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था; नौकरी जॉइन करने के महज 15 दिनों के भीतर उन्हें अपने पहले टीवी शो ‘जमुनिया’ के लिए मुख्य भूमिका का कॉल आ गया और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
गौरव शर्मा के अभिनय करियर का सबसे निर्णायक मोड़ स्टार प्लस का ऐतिहासिक धारावाहिक ‘दीया और बाती हम’ साबित हुआ। इस धारावाहिक में निभाए गए दुर्दांत विलेन ‘राजकुमार’ के किरदार ने उन्हें रातोंरात देश भर में पहचान दिला दी। अभिनेता गर्व से साझा करते हैं कि इस शो को बीते एक दशक से अधिक समय हो चुका है, लेकिन आज भी जब वे सार्वजनिक जगहों पर निकलते हैं तो लोग उन्हें ‘राजकुमार’ कहकर ही पुकारते हैं। इसके बाद उन्होंने कॉमेडी जॉनर में कदम रखते हुए मशहूर टीवी सिटकॉम ‘उफ्फ ये नादानियां’ में केंद्रीय भूमिका निभाई और टॉक शो ‘टोटल नादानियां’ के जरिए अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। जब भारत में डिजिटल स्ट्रीमिंग और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अपने शुरुआती चरण में थे, उसी दौरान गौरव ने ‘प्वॉइजन’ और ‘कर्मा कॉलिंग’ जैसी बहुचर्चित वेब सीरीज में प्रमुख भूमिकाएं निभाकर डिजिटल दर्शकों को भी अपना कायल बना लिया था।
सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए गौरव शर्मा ने वर्ष 2022 में बतौर निर्माता एक बड़े स्तर की वेब सीरीज के निर्माण का स्वतंत्र फैसला लिया था। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए गौरव ने अपने पिछले तीन से चार वर्षों के करियर की पूरी गाढ़ी कमाई और जीवन भर की बचत दांव पर लगा दी थी। दुर्भाग्यवश, कई अप्रत्याशित बाधाओं और प्रोडक्शन संबंधी जटिलताओं के चलते वह वेब सीरीज बीच में ही पूरी तरह डिब्बाबंद (Shelved) हो गई और कभी रिलीज नहीं हो सकी। अपनी जीवन भर की पूंजी एक झटके में खो देने के बाद गौरव गहरे मानसिक अवसाद (Depression) और भारी निराशा के गर्त में चले गए थे। उस कठिन और भयावह दौर में उनकी मां उनके लिए सबसे बड़ा संबल बनकर सामने आईं। उनकी मां ने उन्हें गले लगाते हुए ढाढस बंधाया कि पैसा तो केवल हाथ का मैल है जो दोबारा कमाया जा सकता है, असली पूंजी इंसान का हौसला और प्रतिभा है। मां के इसी अटूट विश्वास ने गौरव को दोबारा खड़ा किया और उन्होंने नए जोश के साथ काम करना शुरू किया, जिसका सुखद परिणाम यह रहा कि उन्होंने अगले एक ही साल के भीतर अपने पूरे आर्थिक नुकसान की भरपाई कर ली।
गौरव शर्मा स्टार प्लस के टीआरपी टॉपर धारावाहिकों ‘अनुपमा’ और ‘झनक’ दोनों का अहम हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने इन दोनों ब्लॉकबस्टर सीरियल्स को बीच सफर में ही अलविदा कह दिया था। इस बोल्ड फैसले की असल वजह का खुलासा करते हुए गौरव ने बताया कि दोनों धारावाहिकों की कहानी में एक लंबा जनरेशन लीप (Generation Leap) लाया जा रहा था। लीप के बाद मेकर्स उनके ऑन-स्क्रीन किरदार की उम्र को काफी ज्यादा बढ़ाकर उन्हें एक 21 साल के वयस्क लड़के के पिता के रूप में दिखाना चाहते थे। गौरव ने स्पष्ट रूप से महसूस किया कि उनके करियर के वर्तमान पड़ाव पर किसी 21 वर्षीय युवक के पिता का रोल स्वीकार करना उनके भविष्य के लिए टाइपकास्ट होने का जोखिम पैदा कर सकता है। गौरव ने बेहद शालीनता से निर्माता राजन शाही के सामने अपनी बात रखी और कहा कि वे अभी विभिन्न प्रकार की चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में खुद को आजमाना चाहते हैं, जिसे राजन शाही ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। ‘झनक’ छोड़ने के पीछे भी यही मुख्य रचनात्मक कारण रहा।
बहुत कम लोग जानते हैं कि गौरव शर्मा न केवल एक उम्दा अभिनेता हैं, बल्कि उनके खून में साहित्य और लेखन भी गहराई से रचा-बसा है। मेरठ के विख्यात और भारत के सबसे लोकप्रिय हिंदी थ्रिलर उपन्यासकार स्वर्गीय वेद प्रकाश शर्मा, गौरव के सगे चाचा थे। अपने चाचा की किताबों के प्रति पाठकों का बेपनाह पागलपन देखते हुए बड़े हुए गौरव ने खुद भी कलम थामी और माइका माइनिंग (अभ्रक खनन) के खतरनाक दलदल में काम करने वाले मासूम बच्चों की त्रासदी पर आधारित चर्चित उपन्यास ‘झिलमिल’ लिखा। गौरव वर्तमान में इस मार्मिक उपन्यास पर एक फीचर फिल्म बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। इसके अतिरिक्त, लेखन जगत में अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए वे आगामी अक्टूबर माह में अपनी दूसरी नई किताब ‘मूनबेदर्स’ (Moonbathers) पाठकों के बीच लेकर आ रहे हैं।
वर्तमान में कलर्स टीवी के धारावाहिक ‘सहर होने को है’ में निभाए जा रहे अपने खलनायक के किरदार को लेकर गौरव बेहद उत्साहित हैं। इस शो को साइन करने की सबसे दिलचस्प वजह साझा करते हुए उन्होंने बताया कि निर्देशक और मेकर्स का इस शो को पेश करने का नजरिया बिल्कुल लीक से हटकर और वास्तविकता के बेहद करीब है। सबसे खास बात यह रही कि जब निर्माताओं ने उन्हें इस ग्रे-कैरेक्टर का नाम ‘हैदर’ बताया, तो वे तुरंत इस भूमिका के लिए राजी हो गए। गौरव के अनुसार, निर्देशक विशाल भारद्वाज की शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म ‘हैदर’ उनकी ऑल-टाइम फेवरेट फिल्म रही है, और यही कारण था कि किरदार का नाम सुनते ही उनके दिल से इस प्रोजेक्ट को स्वीकार करने की आवाज आई थी।
girls globe