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प्रदूषण पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, लखनऊ में भूपेंद्र यादव संग मंथन; हॉटस्पॉट पर होगी सख्त निगरानी

वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए उन इलाकों को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है, जहां प्रदूषण का स्तर लगातार अधिक रहता है। ऐसे हॉटस्पॉट की पहचान कर वहां प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी और नियंत्रण के उपायों को तेज करने पर जोर है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एनसीआर के राज्यों से स्थानीय स्तर पर तैयार योजनाओं में संबंधित पक्षों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव से जुड़े अभियानों को शामिल करने को कहा है। इसका उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।

वाहनों, धूल और पराली पर भी फोकस

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसे प्रमुख स्रोतों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। एनसीआर के राज्यों ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार की हैं।

उत्तर प्रदेश की ओर से भी एनसीआर से जुड़े जिलों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने, जागरूकता बढ़ाने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के कदम प्रस्तावित किए गए हैं।

सितंबर से मार्च तक विशेष रणनीति

एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सितंबर से मार्च तक की अवधि को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान प्रदूषण के स्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए राज्यों की कार्ययोजनाओं की समीक्षा और उनके क्रियान्वयन पर नजर रखने की व्यवस्था की जा रही है। हालिया समीक्षा में एनसीआर के राज्यों ने सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक के लिए अपने एक्शन प्लान साझा किए हैं।

यूपी में एयरशेड आधारित मॉडल पर भी काम

उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एयरशेड आधारित रणनीति पर भी काम आगे बढ़ रहा है। जून 2026 में राज्य सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना सामने रखी थी। इसका उद्देश्य राज्य में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए व्यापक स्तर पर उपाय लागू करना है।

प्रदूषण नियंत्रण को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच समन्वय ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में सर्दियों से पहले प्रदूषण के संभावित स्रोतों पर नियंत्रण की तैयारियां तेज की जा रही हैं। हॉटस्पॉट की निगरानी, प्रदूषणकारी गतिविधियों पर कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान इस रणनीति के प्रमुख हिस्से हैं।