
सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस और करोड़ों रुपये के वित्तीय विवाद से जुड़े एक पुराने मामले में बॉलीवुड के जाने-माने हास्य अभिनेता राजपाल यादव को सख्त चेतावनी देते हुए अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को देश की शीर्ष अदालत ने एक निजी शिकायतकर्ता के साथ चल रहे चेक अनादर मामले की सुनवाई के दौरान अभिनेता के आचरण पर गंभीर नाराजगी जताई और उन्हें दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में कम से कम 2 करोड़ रुपये नकद जमा करने का आखिरी मौका दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि न्यायिक प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ या वित्तीय प्रतिबद्धताओं से भागने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अभिनेता को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को 5 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है, लेकिन साथ ही देश छोड़कर जाने पर पाबंदी लगाते हुए उनका पासपोर्ट तत्काल सरेंडर करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया है।
#1 ‘बॉलीवुड में ड्रामा करते हैं, यहां भी एक्टिंग कर रहे’: सीजेआई बेंच की तीखी टिप्पणी
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान अभिनेता के ढुलमुल रवैये, पूर्व के वादों से मुकरने और बार-बार समय मांगने की प्रवृत्ति पर गहरी आपत्ति दर्ज की। बेंच ने तीखी मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अभिनेता का पिछला आचरण ऐसा नहीं रहा है जिस पर अदालत आंख मूंदकर भरोसा कर सके। शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि राजपाल यादव बॉलीवुड में ड्रामा और अभिनय करने में माहिर हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि वह न्यायिक अदालत के भीतर भी वही एक्टिंग दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अभिनेता के वकील ने पीठ के समक्ष पैरवी करते हुए औपचारिक रूप से आश्वस्त किया कि उनका मुवक्किल निर्धारित दो सप्ताह की समय सीमा के भीतर किसी भी तरह 2 करोड़ रुपये की राशि रजिस्ट्री में जमा करा देगा और शेष बकाया राशि के भुगतान के लिए अदालत के समक्ष पुख्ता जमानत व श्योरिटी प्रस्तुत करेगा।
#1 क्या है पूरा विवाद? 2010 की फिल्म ‘अता पता लापता’ से शुरू हुआ 5 करोड़ का कर्ज
राजपाल यादव से जुड़ा यह कानूनी विवाद करीब 16 साल पुराना है, जिसकी जड़ें वर्ष 2010 में शुरू हुई उनकी महत्वाकांक्षी बॉलीवुड फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ी हैं। अभिनेता, उनकी पत्नी और उनकी निजी प्रोडक्शन कंपनी ने फिल्म निर्माण और रिलीज के खर्चों को पूरा करने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय ऋण लिया था। दोनों पक्षों के बीच हुए वाणिज्यिक समझौते के तहत अभिनेता ने निर्धारित समय पर पूरा कर्ज चुकाने का लिखित वादा किया था। हालांकि, जब मुरली प्रोजेक्ट्स ने अभिनेता द्वारा जारी किए गए चेकों को भुगतान के लिए बैंक में लगाया, तो पर्याप्त धनराशि न होने के कारण एक के बाद एक कुल 7 चेक बाउंस हो गए। अपने साथ हुई धोखाधड़ी और वित्तीय नुकसान को देखते हुए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत अभिनेता और उनकी कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
#1 ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर: 3 महीने की जेल और 1.35 करोड़ प्रति केस का जुर्माना
यह कानूनी लड़ाई वर्षों तक निचली अदालतों में खिंचती रही और वर्ष 2018 में ट्रायल कोर्ट से आगे बढ़ते हुए वर्ष 2024 में सेशन कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस के अपराध में औपचारिक रूप से दोषी ठहराया। जब अभिनेता ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, तो वहां से भी उन्हें कोई बड़ी राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई तीन महीने की साधारण कारावास की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपये के भारी जुर्माने के आदेश को यथावत बरकरार रखा था। हाई कोर्ट के इस सख्त आदेश के खिलाफ अभिनेता ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में अंतरिम राहत देते हुए उनके तत्काल जेल जाने पर रोक लगा दी थी। अब शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि बिना वास्तविक भुगतान के राहत को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता और अभिनेता को अपनी नीयत साबित करने के लिए दो हफ्ते के भीतर 2 करोड़ रुपये की राशि जमा करानी ही होगी।
#1 पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश और 5 अक्टूबर की निर्णायक तारीख
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ता के वित्तीय अधिकारों की रक्षा और न्याय की गरिमा बनाए रखने के लिए दोहरे निर्देश लागू किए हैं। एक तरफ जहां अभिनेता की अंतरिम राहत 5 अक्टूबर तक बरकरार रखी गई है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों और न्यायिक तंत्र को सुनिश्चित करने के लिए राजपाल यादव को अपना वैध पासपोर्ट संबंधित अधिकारियों के पास जमा कराने का आदेश दिया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक वह देश छोड़कर न जा सकें। 5 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में अभिनेता के कानूनी और व्यक्तिगत भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होगी, क्योंकि यदि वह दो सप्ताह के भीतर 2 करोड़ रुपये की निर्धारित राशि जमा करने में विफल रहते हैं, तो उनकी अंतरिम जमानत रद्द हो सकती है और उन्हें चेक बाउंस मामले में तय जेल की सजा भुगतने के लिए आत्मसमर्पण करना पड़ सकता है।
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