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दोपहर का गणेश विसर्जन मुहूर्त छूटा, न हों परेशान, शाम और रात में बप्पा को विदा करने का शुभ समय

गणेश चतुर्थी के पावन पर्व के बाद पूरे देश में भगवान विघ्नहर्ता श्री गणेश के विसर्जन का दौर श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो चुका है। भारतीय सनातन परंपरा और वैदिक पंचांग के अनुसार, गणेश भक्त अपनी-अपनी मन्नत और कुल परंपरा के आधार पर डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या पूरे दस दिन तक गणपति बप्पा को अपने घर में स्थापित करते हैं। आज यानी 15 सितंबर 2026 को डेढ़ दिन वाले गणपति बप्पा की विदाई का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। कई बार व्यस्त दिनचर्या, पारिवारिक जिम्मेदारियों या यात्रा के चलते श्रद्धालु दोपहर के तय मुहूर्त में विसर्जन अनुष्ठान पूरा नहीं कर पाते हैं। अगर आपका भी दोपहर का विसर्जन मुहूर्त निकल गया है, तो बिल्कुल भी विचलित होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शाम और रात के समय भी कई अत्यंत मंगलकारी चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध हैं जिनमें बाप्पा को विधिपूर्वक विदाई देकर उनका अक्षय आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

शाम और रात्रि कालीन गणेश विसर्जन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त: समय सारिणी पर एक नजर

वैदिक पंचांग की गणनाओं के अनुसार, आज 15 सितंबर को दिन के पहले हिस्से में प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से 01 बजकर 58 मिनट तक और अपराह्न मुहूर्त (शुभ) दोपहर 03 बजकर 31 मिनट से शाम 05 बजकर 03 मिनट तक सक्रिय था। यदि किसी कारणवश आप इस अवधि में विसर्जन नहीं कर पाए हैं, तो शाम और रात्रि के समय विसर्जन करने के लिए अत्यंत फलदायी मुहूर्त उपलब्ध हैं। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 06 बजकर 35 मिनट से 06 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी मांगलिक विदाई के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। इसके पश्चात सायाह्न मुहूर्त (लाभ चौघड़िया) रात 08 बजकर 03 मिनट से शुरू होकर 09 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, जिसमें विसर्जन करने से घर में स्थायी आर्थिक लाभ और समृद्धि का वास होता है। जो श्रद्धालु देर रात विसर्जन करना चाहते हैं, उनके लिए रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) रात 10 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ होकर 16 सितंबर की तड़के 03 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इन शुभ कालों में बप्पा की प्रतिमा को जल में विसर्जित करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

विसर्जन से पूर्व विशेष षोडशोपचार पूजा विधि: ऐसे करें बप्पा को प्रसन्न

गणेश प्रतिमा को विदा करने से पूर्व उनका विधिवत पूजन करना अनिवार्य शास्त्रीय नियम है। विसर्जन अनुष्ठान शुरू करने से पहले स्नान कर स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर धूप, दीप, अगरबत्ती प्रज्वलित करें और भगवान गणेश को लाल चंदन, अक्षत, सिंदूर, दूर्वा और गेंदे के ताजे पुष्प अर्पित करें। भगवान को उनके सर्वाधिक प्रिय भोग जैसे मोदक, मोतीचूर के लड्डू और ऋतु फल अर्पित करें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ मिलकर श्री गणेश जी की आरती गाएं और जाने-अनजाने में पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें। प्रार्थना के दौरान कहें कि ‘हे विघ्नहर्ता, हमारे कष्टों और विघ्नों को हरते हुए पुनः अगले वर्ष हमारे घर में सुख-समृद्धि लेकर पधारें।’ इस भावपूर्ण पूजा के पश्चात ही विसर्जन यात्रा प्रारंभ करनी चाहिए।

डेढ़ दिन वाले गणपति विसर्जन के दौरान इन कड़े नियमों का करें पालन

शास्त्रों के अनुसार विसर्जन यात्रा और जल प्रवाह के दौरान कुछ विशिष्ट आध्यात्मिक सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक हैं। सबसे पहले, विसर्जन के पावन अवसर पर काले या अत्यधिक गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह रंग शोक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है; इसके स्थान पर पीले, लाल, नारंगी या सफेद वस्त्र पहनना अत्यंत शुभकारी होता है। विसर्जन यात्रा के दौरान घर से नदी या जलाशय तक बप्पा के जयकारे लगाते हुए जाएं और मन में किसी भी प्रकार का क्रोध या परिजनों से वाद-विवाद बिल्कुल न करें। गणेश उत्सव की पूरी अवधि में घर के भीतर तामसिक भोजन, मदिरा, प्याज-लहसुन का सेवन पूर्णतः वर्जित रखना चाहिए। यदि आप घर पर ही किसी पवित्र गमले या टब में इको-फ्रेंडली गणेश जी का विसर्जन कर रहे हैं, तो विसर्जन के बाद उस जल को किसी तुलसी के पौधे में न डालकर किसी अन्य पवित्र वृक्ष जैसे शमी या पीपल की जड़ में ही प्रवाहित करें।

शुभ चौघड़िया मुहूर्त में विसर्जन का आध्यात्मिक फल और महत्व

सनातन धर्म में किसी भी दैवीय ऊर्जा की स्थापना और विदाई दोनों के लिए शुभ काल का चयन अनिवार्य बताया गया है। मान्यता है कि अशुभ काल या राहुकाल में किया गया विसर्जन पूजा के पूर्ण फल को क्षीण कर सकता है, जबकि लाभ, अमृत या शुभ चौघड़िया में बप्पा की विदाई करने से घर में साल भर शांति, ऐश्वर्य, बौद्धिक विकास और सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर संचार बना रहता है। इसलिए यदि दोपहर का समय हाथ से निकल चुका है, तो शाम की गोधूलि वेला या रात्रि के लाभ चौघड़िया का उपयोग करें और पूरे भक्ति भाव के साथ ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के मंगल उद्घोष के साथ विघ्नहर्ता को विदाई दें।