
नोएडा के सेक्टर 128 और आसपास के बड़े भूभाग में फैले जयपी विश टाउन प्रोजेक्ट का नाम पिछले डेढ़ दशक से होमबायर्स के संघर्ष का प्रतीक बना हुआ था। साल 2007-08 में जब इस विशाल टॉउनशिप की नींव रखी गई थी, तब हजारों मध्यवर्गीय परिवारों ने अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई यह सोचकर लगा दी थी कि उन्हें 3 से 4 साल में अपने सपनों का आशियाना मिल जाएगा। हालांकि, वित्तीय कुप्रबंधन, कर्ज के बोझ और कानूनी अड़चनों के कारण काम ठप हो गया। लंबे समय तक लटकी इस परियोजना में अब सुरक्षा समूह (Suraksha Group) का प्रवेश एक नई उम्मीद लेकर आया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और उसके बाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) से हरी झंडी मिलने के बाद सुरक्षा समूह ने आधिकारिक तौर पर परियोजना की बागडोर संभाल ली है।
विश टाउन में अधूरे पड़े 20,000 से अधिक फ्लैटों के निर्माण को पूरा करने के लिए सुरक्षा समूह ने ₹5,500 करोड़ से अधिक की विशाल राशि के निवेश का खाका तैयार किया है। इस भारी-भरकम बजट का उपयोग निर्माण कार्य को गति देने, पेंडिंग वेंडर्स का भुगतान करने और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में किया जाएगा। कंपनी के आंतरिक आकलन के अनुसार, साइट पर एक साथ कई टावरों में सिविल वर्क शुरू करने के लिए बड़े पैमाने पर लेबर और मटेरियल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। लिक्विडिटी का संकट खत्म होने से अब कंस्ट्रक्शन एजेंसियों ने भी साइट पर उपकरण और भारी मशीनरी तैनात कर दी है, जिससे आने वाले महीनों में निर्माण की गति कई गुना बढ़ने के आसार हैं।
सुरक्षा समूह ने स्पष्ट किया है कि इतने बड़े पैमाने की परियोजना को एक साथ पूरा करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए चरणबद्ध (Phase-wise) कंस्ट्रक्शन और पजेशन की योजना बनाई गई है। जिन टावरों का ढांचा लगभग तैयार है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर फिनिशिंग वर्क देकर अगले कुछ महीनों में डिलीवरी के लिए तैयार किया जाएगा। इसके बाद उन प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो केवल नींव या शुरुआती सिविल स्ट्रक्चर के स्तर पर अटके हुए थे। होमबायर्स के लिए एक पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल और ट्रैकिंग सिस्टम की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे खरीदार अपने-अपने फ्लैट का लाइव प्रोग्रेस स्टेटस देख सकेंगे। इससे सालों से चले आ रहे अविश्वास के माहौल को खत्म करने में मदद मिलेगी।
जयपी विश टाउन के अटकने के पीछे केवल प्रमोटर्स की नाकामी नहीं थी, बल्कि नोएडा अथॉरिटी का लैंड ड्यूज, किसानों का मुआवजा और विभिन्न बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के दावे भी शामिल थे। कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत सुरक्षा समूह ने सभी हितधारकों के बीच एक सहमति आधारित ढांचा तैयार किया है। एआरसी (ARC) और वित्तीय संस्थानों के साथ कर्ज पुनर्गठन की शर्तों पर सहमति बनने से अब कानूनी मुकदमों का असर निर्माण कार्य पर नहीं पड़ेगा। अथॉरिटी के स्तर पर भी लंबित कागजी प्रक्रियाओं और नक्शों के अप्रूवल को तेजी से निपटाने के लिए विशेष समन्वय समिति काम कर रही है।
जयपी विश टाउन में सकारात्मक हलचल का असर केवल इस एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पूरे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे बेल्ट के रियल एस्टेट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है। सालों से डंप पड़े इस प्रोजेक्ट के चालू होने से आसपास के सेक्टर्स (जैसे सेक्टर 126, 127, 129, 132) में भी कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज के दामों में मजबूती देखी जा रही है। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सुरक्षा समूह अगले दो वर्षों के भीतर तय डेडलाइन के अनुसार फ्लैट्स डिलीवर करने में सफल रहता है, तो इससे न केवल एनसीआर (NCR) रियल एस्टेट में बायर्स का भरोसा लौटेगा, बल्कि डिफ़ॉल्टेड प्रोजेक्ट्स के टेकओवर का एक नया मॉडल भी स्थापित होगा।
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