
उत्तर प्रदेश के लाखों वाहन चालकों, दैनिक यात्रियों, किसानों और माल ढुलाई से जुड़े कारोबारियों के लिए हर सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतें जानना दिनचर्या का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की हलचलों के बीच देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—ने आज सुबह ठीक 6 बजे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए पेट्रोल और डीजल की नई खुदरा दरें जारी कर दी हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आज तेल की कीमतों में आंशिक फेरबदल देखने को मिला है। कहीं स्थानीय परिवहन लागत और डीलर कमीशन के समायोजन से चंद पैसों की मामूली राहत मिली है, तो कहीं ढुलाई खर्च के कारण दामों में कुछ पैसों की बढ़त दर्ज की गई है। राजधानी लखनऊ से लेकर औद्योगिक हब कानपुर, धर्मनगरी वाराणसी और एनसीआर के हाई-टेक शहर नोएडा तक नई दरों के लागू होते ही पेट्रोल पंपों की मशीनों पर नए भाव दिखने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज सुबह पेट्रोल 101.86 रुपये से 102.68 रुपये प्रति लीटर के दायरे में स्थिर बना हुआ है, जबकि डीजल की कीमत 95.14 रुपये से 96.10 रुपये प्रति लीटर के बीच दर्ज की गई है। लखनऊ के शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्थापित पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही गाड़ियां ईंधन भरवाने के लिए कतारों में नजर आ रही हैं। वहीं, औद्योगिक नगरी कानपुर (शहरी और देहात) में पेट्रोल की दर लगभग 101.90 रुपये से 102.15 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 95.27 रुपये से 95.47 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है। गंगा-यमुना के संगम शहर प्रयागराज (इलाहाबाद) में ढुलाई खर्च के चलते डीजल 95.33 रुपये से 95.79 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल करीब 102.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बिक रहा है। इसके अलावा, बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में पेट्रोल 102.23 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.50 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। रामनगरी अयोध्या और गोरखपुर में भी ईंधन के दामों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है और वहां भाव क्रमशः 102.10 रुपये और 102.35 रुपये प्रति लीटर के आसपास बने हुए हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में दिल्ली से तुलनात्मक रूप से ईंधन के दामों में थोड़ा अंतर रहता है। गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आज पेट्रोल की कीमत 101.96 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.10 रुपये प्रति लीटर के आसपास दर्ज की गई है। पड़ोसी जिले गाजियाबाद में पेट्रोल 101.88 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.05 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। ताजनगरी आगरा में पेट्रोल का भाव 101.66 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.02 रुपये से 95.14 रुपये प्रति लीटर के बीच बना हुआ है। कान्हा की नगरी मथुरा में रिफाइनरी का नजदीकी डिपो होने के कारण पेट्रोल और डीजल प्रदेश के कई अन्य जिलों की तुलना में अपेक्षाकृत थोड़ा सस्ता रहता है, जहां डीजल 94.79 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर उपलब्ध है। मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बरेली जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी पेट्रोल के दाम 101.70 रुपये से 102.30 रुपये प्रति लीटर के बीच बने हुए हैं।
अक्सर आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि जब पूरा उत्तर प्रदेश एक ही राज्य है और राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) एक समान है, तो फिर लखनऊ, नोएडा, बलिया और सोनभद्र में पेट्रोल-डीजल के भाव एक जैसे क्यों नहीं होते? इसका सबसे बड़ा कारण ‘लोकल फ्रेट’ (माल ढुलाई खर्च) और डिपो से पेट्रोल पंप की भौगोलिक दूरी है। तेल कंपनियां अपनी मुख्य तेल रिफाइनरियों या बल्क स्टोरेज डिपो से जब टैंकरों के माध्यम से सुदूर जिलों में पेट्रोल-डीजल भेजती हैं, तो रास्ते का ट्रांसपोर्टेशन चार्ज ईंधन की मूल लागत में जुड़ जाता है। उदाहरण के लिए, मथुरा रिफाइनरी के नजदीक स्थित आगरा या मथुरा जिले में ढुलाई का खर्च बेहद कम आता है, इसलिए वहां तेल थोड़ा सस्ता रहता है। इसके विपरीत, बिहार सीमा से सटे बलिया, गाजीपुर, देवरिया या विंध्य क्षेत्र के सोनभद्र और मिर्जापुर जैसे दूरदराज के जिलों तक तेल पहुंचाने में लंबी दूरी का डीजल खर्च होता है, जिसके चलते वहां की खुदरा कीमतों में 50 पैसे से 1 रुपये तक का अंतर आ जाता है। इसके साथ ही हर जिले में पेट्रोल पंप डीलरों का स्थानीय कमीशन और म्युनिसिपल सेस भी कीमतों को थोड़ा बहुत प्रभावित करता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी घरेलू ईंधन मांग का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशी बाजारों से खरीदता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब भी ब्रेंट क्रूड या अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में भारी उतार-चढ़ाव आता है, तो उसका सीधा दबाव भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर पड़ता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से भारतीय रिफाइनरियों और केंद्र सरकार के रणनीतिक कदमों के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में होने वाले दैनिक झटकों को घरेलू स्तर पर सीधे ग्राहकों पर नहीं थोपा जा रहा है। रूस से रियायती दर पर मिलने वाले कच्चे तेल और खाड़ी देशों के साथ हुए दीर्घकालिक अनुबंधों ने देश के भीतर ईंधन की कीमतों को एक स्थिर दायरे में बांधे रखा है। फिर भी, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर (Exchange Rate) और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों पर तेल विपणन कंपनियों की पैनी नजर बनी रहती है।
अगर आप पेट्रोल पंप पर जाने से पहले अपने शहर का बिल्कुल सटीक और ताजा भाव जानना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको किसी लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। आप अपने सामान्य मोबाइल फोन से मात्र एक साधारण एसएमएस (SMS) भेजकर अपने नजदीकी पंप का नया रेट जान सकते हैं।
यदि आप इंडियन ऑयल (IOCL) के ग्राहक हैं, तो अपने मैसेज बॉक्स में टाइप करें RSP और स्पेस देकर अपने शहर का डीलर कोड लिखें (जैसे लखनऊ के लिए निर्धारित कोड) और इसे 9224992249 पर भेज दें। चंद सेकंडों में आपको फोन पर ताजा भाव मिल जाएगा।
यदि आप भारत पेट्रोलियम (BPCL) का रेट जानना चाहते हैं, तो मैसेज बॉक्स में लिखें RSP और अपना डीलर कोड लिखकर 9223112222 पर सेंड करें।
यदि आप हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के उपभोक्ता हैं, तो HPPRICE लिखकर स्पेस दें और डीलर कोड दर्ज कर 9222201122 पर एसएमएस भेज दें। इसके अलावा, इंडियन ऑयल का इंडियनऑयल वन (IndianOil ONE) और एचपीसीएल का एचपी पे (HP Pay) मोबाइल ऐप डाउनलोड करके भी जीपीएस लोकेशन के आधार पर किसी भी पंप की रीयल-टाइम कीमत देखी जा सकती है।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल कृषि प्रधान और व्यापारिक राज्य में पेट्रोल और विशेषकर डीजल की कीमतों का सीधा संबंध आम आदमी की रसोई के बजट और बाजार की महंगाई से होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक के किसान खेतों की जुताई, बुवाई और नलकूपों (ट्यूबवेल) से सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर डीजल इंजनों पर निर्भर करते हैं। यदि डीजल की कीमतों में थोड़ी भी वृद्धि होती है, तो फसलों की उत्पादन लागत सीधे बढ़ जाती है। इसी तरह, ट्रकों, डंपरों और पिकअप वाहनों के जरिए फल, सब्जियां, दूध, अनाज और दवाएं एक शहर से दूसरे शहर पहुंचती हैं। डीजल के दाम स्थिर रहने से माल भाड़ा नियंत्रित रहता है, जिससे लखनऊ की दुबग्गा मंडी, कानपुर की चकरपुर मंडी या वाराणसी की पहड़िया मंडी में रोजमर्रा की हरी सब्जियों और किराना सामानों के दाम बेकाबू नहीं होते। वहीं, निजी दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाने वाले मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों के लिए भी ईंधन की कीमतों में स्थिरता मासिक घरेलू बजट को संतुलित रखने में सबसे बड़ी मदद करती है।
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