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Monsoon Withdrawal Twist: विदाई से पहले मानसून का बड़ा यू-टर्न, 24 से 28 सितंबर तक 5 दिन फिर बरसेंगे बादल; बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया मौसमी सिस्टम

देश भर में जहां एक तरफ उमस और चिलचिलाती धूप ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि इस साल मानसून ने अपनी अंतिम विदाई ले ली है, वहीं कुदरत ने मौसम के मिजाज में एक अप्रत्याशित और चौंकाने वाला मोड़ ला दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और आधुनिक मौसम पूर्वानुमान मॉडल्स के ताजा आकलन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी पूरे देश से विदा होने के मूड में बिल्कुल नहीं है। भले ही उत्तर-पश्चिमी छोर से मानसूनी हवाओं की वापसी की सामान्य प्रक्रिया शुरू होने के संकेत मिल रहे हों, लेकिन बंगाल की खाड़ी में अचानक उभर रहे एक नए मौसमी सिस्टम ने पूरे परिदृश्य को बदल कर रख दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जाते-जाते मानसून देश के एक बड़े हिस्से को भारी बारिश का जोरदार सरप्राइज देने जा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आने वाले दिनों में बादलों का ऐसा जमघट देखने को मिलेगा, जिससे न केवल नदी-नालों का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है, बल्कि दिन और रात के पारे में भी भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।

ताजा सैटेलाइट तस्वीरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वेदर फोरकास्टिंग सिस्टम (AIFS) के नवीनतम सिमुलेशन ने मौसम विभाग के विश्लेषकों को सतर्क कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 24 सितंबर से 28 सितंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी के मध्य और उत्तरी हिस्से के ऊपर एक बेहद मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) आकार लेने जा रहा है। वायुमंडलीय परिस्थितियों के अनुकूल होने के कारण इस सिस्टम के और अधिक सघन होकर डिप्रेशन या चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की प्रबल आशंका जताई गई है। जैसे ही यह निम्न दबाव का क्षेत्र समुद्र से नमी खींचकर भारतीय भूभाग की ओर बढ़ेगा, 5 दिनों तक लगातार पूर्वी और मध्य भारत के ऊपर बादलों की सघन चादर बिछ जाएगी। इस मौसमी बदलाव का असर यह होगा कि पिछले कुछ दिनों से शांत पड़ा मानसून अचानक पुनर्जीवित हो जाएगा और तेज आंधी, बादलों की तेज गर्जना तथा आकाशीय बिजली के साथ मूसलाधार बारिश का एक नया स्पेल शुरू होगा।

इस नए वेदर सिस्टम का ट्रैक और संभावित फैलाव देश के कई राज्यों को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में जन्म लेने वाला यह चक्रवाती घेरा शुरुआत में उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर गति करेगा, जिससे सबसे पहला और सीधा प्रहार ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश पर होगा। इसके बाद यह सिस्टम आगे बढ़ते हुए दक्षिणी छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के मैदानी इलाकों से होकर गुजरेगा। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई पट्टी—विशेषकर गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, बस्ती, गोंडा और राजधानी लखनऊ तक बादलों की व्यापक आवाजाही और रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। वहीं दूसरी ओर, बिहार के पटना, गया, भागलपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में भी 24 सितंबर के बाद तेज मानसूनी फुहारों और जलजमाव की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी इस सिस्टम के अंतिम चरण में तेज बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं।

इस बार के मानसून की सबसे अनूठी विशेषता इसका दोहरा चरित्र है, जिसने मौसम विशेषज्ञों को भी चकित कर रखा है। एक तरफ जहां पूर्वी और मध्य भारत में 24 सितंबर से 28 सितंबर तक झमाझम बारिश का दौर चलेगा, वहीं दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिमी भारत के राज्यों में बिल्कुल उलट परिस्थितियां बन रही हैं। राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर के रास्ते मानसून की वापसी की प्रक्रिया 15 से 19 सितंबर के आसपास धीरे-धीरे गति पकड़ने लगी है। 25 सितंबर के बाद उत्तर-पश्चिमी भारत और उत्तरी अरब सागर के ऊपर एक विशाल एंटी-साइक्लोन (प्रतिचक्रवात) विकसित होने की संभावना है। यह एंटी-साइक्लोन शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाओं को धकेलेगा, जिसके चलते पश्चिमी राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के पश्चिमी हिस्सों में मौसम बिल्कुल साफ और शुष्क रहेगा। लेकिन जैसे ही ये शुष्क हवाएं पूर्व से आ रही अत्यधिक नम मानसूनी हवाओं से टकराएंगी, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में तीव्र संवहन (Intense Convection) पैदा होगा, जिससे अचानक तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

सितंबर के आखिरी सप्ताह में होने वाली यह पांच दिवसीय बारिश केवल जमीन को ही नहीं भिगोएगी, बल्कि मौसम के चक्र को पूरी तरह बदलकर रख देगी। लगातार होने वाली इस बारिश और आसमान में बादलों के डेरे से दिन के अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट आने की संभावना है। इसके साथ ही नमी का स्तर कम होते ही अक्टूबर के पहले हफ्ते से रात के तापमान में खासी ठंडक महसूस होने लगेगी। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान में यह मानसूनी बारिश जाते-जाते ‘गुलाबी सर्दी’ (हल्की ठंड) की औपचारिक शुरुआत की नींव रख देगी। सुबह के वक्त हल्की धुंध और रात में पंखों की रफ्तार धीमी होने का मौसम इसी सिस्टम के गुजरने के तुरंत बाद शुरू होने की उम्मीद है।

मौसम के इस अप्रत्याशित यू-टर्न ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। वर्तमान में देश भर के खेतों में खरीफ की प्रमुख फसलें, विशेषकर धान, मक्का, बाजरा, तिलहन और दलहन, पकने या कटाई के बेहद नाजुक दौर में हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 से 28 सितंबर के बीच तेज हवाओं के साथ अतिवृष्टि होती है, तो खेतों में खड़ी पकी हुई धान की बालियां गिर सकती हैं, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसलों को खुले खलिहानों में न छोड़ें और उन्हें तुरंत सुरक्षित तिरपाल या गोदामों में ढकने की पुख्ता व्यवस्था करें। इसके अतिरिक्त, खेतों से अतिरिक्त जल निकासी (Drainage) का उचित प्रबंध पहले से ही सुनिश्चित कर लें ताकि जलभराव के कारण फसलों की जड़ें न गलें।

मौसम विभाग के महानिदेशालय ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं। चूंकि बंगाल की खाड़ी के मौसमी सिस्टम वातावरण के छोटे बदलावों से भी अपनी दिशा और तीव्रता तेजी से बदल लेते हैं, इसलिए रियल-टाइम सैटेलाइट रडार से इस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे 24 से 28 सितंबर की अवधि के दौरान किसी भी लंबी दूरी की यात्रा पर निकलने से पहले मौसम विभाग के दैनिक बुलेटिन और मेघदूत या दामिनी ऐप पर वज्रपात की चेतावनी अवश्य जांच लें। नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और तेज आंधी व बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों या बड़े पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सख्त हिदायत दी गई है। मानसून जाते-जाते अपनी पूरी ताकत दिखाने के लिए तैयार है, ऐसे में पूरी सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।