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Oracle Layoffs: आंख खुलते ही मिला 6 बजे का ईमेल और नौकरी खत्म! ओरेकल ने बिना चेतावनी सैकड़ों कर्मचारियों को निकाला; भारत के आईटी सेक्टर में भी बढ़ी धड़कनें

वैश्विक टेक जगत में पिछले कुछ महीनों से छाई मंदी और रिस्ट्रक्चरिंग की काली छाया एक बार फिर गहरा गई है। डेटाबेस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार ओरेकल (Oracle) में अचानक बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने पूरी आईटी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है। सामान्य दिनों की तरह जब कर्मचारी सुबह सोकर उठे और अपनी वर्क शिफ्ट शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनके निजी और आधिकारिक इनबॉक्स में कंपनी लीडरशिप का एक ऐसा संदेश आया जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। बिना किसी पूर्व सूचना, परफॉर्मेंस वार्निंग या विदाई मीटिंग के सीधे कर्मचारियों को यह फरमान सुना दिया गया कि आज उनका कंपनी में आखिरी कार्यदिवस है। इस अचानक हुए फैसले से न केवल अमेरिका में मौजूद कॉरपोरेट ऑफिसों में अफरा-तफरी मच गई, बल्कि भारत के बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम जैसे बड़े आईटी हब्स में काम कर रहे हजारों टेक प्रोफेशनल्स की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। हर कोई अब इस बात को लेकर सहमा हुआ है कि क्या यह छंटनी का सिलसिला अब भारतीय दफ्तरों तक भी फैलने वाला है।

इस छंटनी का तरीका इतना नाटकीय और अप्रत्याशित था कि कर्मचारियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई कर्मचारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स लिंक्डइन, रेडिट के r/employeesOfOracle फोरम और प्रोफेशनल कम्युनिटी ऐप ‘ब्लाइंड’ पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि घटनाक्रम की शुरुआत तड़के ही हो चुकी थी। सुबह करीब 4 बजे से ही कर्मचारियों के कॉरपोरेट लॉगइन और वीपीएन (VPN) कनेक्शन अपने आप फेल होने लगे। इसके ठीक एक घंटे बाद, यानी सुबह 5 से 5:30 बजे के बीच, टीम कम्युनिकेशन ऐप स्लैक (Slack) से सैकड़ों कर्मचारियों के अकाउंट्स अपने आप डिस्कनेक्ट होने लगे। जो कर्मचारी ऑफिस पहुंच चुके थे, उनके इलेक्ट्रॉनिक एंट्री बैज ने ऑफिस के मुख्य द्वार पर काम करना बंद कर दिया। इसके बाद सुबह ठीक 6 बजे ‘ओरेकल लीडरशिप’ की ओर से वह बहुचर्चित ईमेल भेजा गया, जिसमें बेहद ठंडे शब्दों में लिखा था—’हम आपकी वर्तमान स्थिति को लेकर कुछ कठिन फैसले साझा कर रहे हैं। कंपनी की व्यापक संगठनात्मक पुनर्संरचना और व्यावसायिक आवश्यकताओं को देखते हुए आपकी भूमिका को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। परिणामस्वरूप, आज ही आपका आखिरी कार्यदिवस है।’

अक्सर कॉरपोरेट जगत में यह माना जाता है कि छंटनी की गाज खराब प्रदर्शन (Low Performance) वाले कर्मचारियों पर गिरती है, लेकिन ओरेकल के इस ताजा फैसले ने इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए बयानों के अनुसार, निकाले गए लोगों में ऐसे प्रोफेशनल्स शामिल हैं जिन्हें हाल ही में शानदार परफॉर्मेंस रेटिंग मिली थी। एचआर टेक्नोलॉजी डिवीजन के एक सीनियर आईसी-4 लेवल कर्मचारी, जिन्हें लगातार उत्कृष्ट रेटिंग मिल रही थी, उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं, ओरेकल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (OCI) में पिछले चार सालों से काम कर रहे और कभी भी औसत से कम रेटिंग न पाने वाले डेवलपर्स को भी नहीं बख्शा गया। सबसे चौंकाने वाला मामला 24 साल से कंपनी को अपनी सेवाएं दे रहे एक वरिष्ठ क्वालिटी एश्योरेंस (QA) इंजीनियर का सामने आया, जिन्हें बिना किसी फेयरवेल के एक साधारण ईमेल के जरिए कंपनी से रुखसत कर दिया गया। इसके अलावा, टेक्सास के अबिलीन में स्थित स्टारगेट प्रोजेक्ट में कुछ ही महीने पहले जुड़े नए इंजीनियर्स भी इस छंटनी की चपेट में आ गए हैं।

कर्मचारियों द्वारा साझा की गई आंतरिक रिपोर्टों के मुताबिक, इस छंटनी से ओरेकल के लगभग सभी प्रमुख विभाग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा असर ओसीआई सिक्योरिटी, सीआई/सीडी (CI/CD) पाइपलाइन, एंटरप्राइज इंजीनियरिंग, ऑब्जर्वेबिलिटी, एक्जीक्यूटिव एस्केलेशन और फ्यूजन ईआरपी टीमों पर देखा गया है। इसके अलावा, नेटसुइट सेल्स, कस्टमर सक्सेस सर्विसेज, ओरेकल हेल्थ (पूर्व में सेर्नर), ईपीएम और एचआर टेक्नोलॉजी से भी सैकड़ों कर्मचारियों की आईडी एक झटके में डिएक्टिवेट कर दी गईं। रेडिट पर हुई चर्चाओं में दावा किया गया कि सुबह के चंद घंटों के भीतर कंपनी के आंतरिक स्लैक नेटवर्क से करीब 3,000 से 4,000 एक्टिव यूजर्स की संख्या कम हो गई। हालांकि, ओरेकल प्रबंधन ने इस संबंध में अब तक कोई सार्वजनिक प्रेस रिलीज जारी नहीं की है और न ही निकाले गए कर्मचारियों की सटीक कुल संख्या का खुलासा किया है, जिससे अंदरूनी अनिश्चितता और भी अधिक बढ़ गई है।

ओरेकल में हो रही इस लगातार छंटनी के पीछे का सबसे बड़ा कारण कंपनी का तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ शिफ्ट होना माना जा रहा है। कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो एक बड़ा विरोधाभास सामने आता है। ओरेकल ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में अपने नेटवर्क विस्तार और डेटा सेंटर्स पर 28.5 अरब डॉलर (करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम पूंजीगत खर्च (CapEx) किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में खर्च किए गए 8.5 अरब डॉलर की तुलना में तीन गुना से भी अधिक है। पूरे वित्त वर्ष के लिए कंपनी का अनुमानित पूंजीगत खर्च 90 से 95 अरब डॉलर के बीच है। यही नहीं, कंपनी को 30 अरब डॉलर से ज्यादा के नए एआई क्लाउड कॉन्ट्रैक्ट्स मिले हैं और उसका फ्यूचर रेवेन्यू बैकलॉग बढ़कर 664 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन इस अंधाधुंध पूंजीगत विस्तार के चलते कंपनी का फ्री कैश फ्लो 5.4 अरब डॉलर नेगेटिव हो गया है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी एआई मॉडल्स और एनवीडिया जीपीयू चिप्स वाले विशालकाय डेटा सेंटर बनाने पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, और इस भारी वित्तीय बोझ व घाटे की भरपाई करने के लिए हजारों कर्मचारियों की नौकरियों की बलि चढ़ाई जा रही है।

अमेरिकी ऑपरेशंस में छंटनी की यह लहर पूरी होने के बाद अब अगला बड़ा खतरा भारत में काम करने वाले कर्मचारियों पर मंडरा रहा है। टेक विशेषज्ञों और पूर्व के छंटनी पैटर्न्स के अनुसार, जब भी अमेरिकी मुख्यालय में पुनर्गठन होता है, उसके ठीक बाद भारत और ईएमईए (EMEA) रीजन में कटौती का दौर शुरू होता है। ओरेकल के ‘इंडिया डेवलपमेंट सेंटर’ (IDC) जो कि मुख्य रूप से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और चेन्नई में फैले हैं, वहां के कर्मचारी इस समय भारी असमंजस और डर के साए में हैं। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, भारत में करीब 3,000 से 4,000 कर्मचारियों और कस्टमर सपोर्ट टीमों के लगभग 30 प्रतिशत कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक रही है। मार्च के पिछले राउंड में भी भारतीय कर्मचारियों को इसी तरह के फॉर्मूले के तहत बाहर किया गया था। भारत में पहले से ही फ्रेशर्स और मिड-लेवल इंजीनियर्स के लिए हायरिंग का बाजार धीमा चल रहा है, ऐसे में अगर ओरेकल जैसे बड़े ब्रांड ने भारतीय दफ्तरों से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला, तो इसका सीधा असर देश के घरेलू टेक रोजगार परिदृश्य पर पड़ेगा।

नौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह खड़ी हो गई है कि उनके आधिकारिक लैपटॉप, ईमेल और कंपनी डेटाबेस का एक्सेस तुरंत काट दिया गया। कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में सख्त हिदायत दी गई थी कि वे कंपनी के किसी भी गोपनीय डेटा को कॉपी, फॉरवर्ड या डाउनलोड न करें। इसके साथ ही उनसे तुरंत एक व्यक्तिगत ईमेल आईडी सबमिट करने को कहा गया, जिस पर डॉक्यूमेंट्स और डॉक्यूमेंट साइनिंग (DocuSign) के लिंक्स भेजे जा सकें। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें विस्तृत सेवरेंस पैकेज (Severance Package) की शर्तें जानने से पहले ही सिस्टम से लॉकआउट कर दिया गया। हालांकि, शुरुआती जानकारियों के अनुसार, डेटाबेस ऑर्गनाइजेशन के चार साल पुराने कर्मचारी को लगभग 7 हफ्तों का सेवरेंस पैकेज ऑफर किया गया है, जबकि भारत में पूर्व में ‘N+2’ (सेवा के वर्षों के अनुसार तय मुआवजा) का फॉर्मूला लागू किया गया था। इसके बावजूद, अनवेस्टेड स्टॉक ऑप्शंस (RSUs) का रद्द होना और गिरते जॉब मार्केट में नई नौकरी तलाशने का तनाव प्रभावित परिवारों के लिए एक असहनीय मानसिक और आर्थिक आघात बन गया है।