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अब तलाकशुदा बेटियों को भी मिलेगी फैमिली पेंशन! सरकार के नियमों में बड़ा प्रावधान; जानें क्या हैं पात्रता की शर्तें और कैसे करें आवेदन

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के निधन के बाद उनके आश्रित परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों ने फैमिली पेंशन (Family Pension) के नियमों को समय-समय पर अधिक मानवीय और व्यावहारिक बनाया है। सामाजिक सुरक्षा के इस दायरे में सबसे अहम बदलाव यह है कि अब कर्मचारी की विधवा और अविवाहित पुत्रियों के साथ-साथ तलाकशुदा बेटियों (Divorced Daughters) को भी आश्रित मानते हुए आजीवन फैमिली पेंशन प्राप्त करने का पूर्ण विधिक अधिकार दिया गया है। यदि वैवाहिक संबंध टूटने के बाद कोई बेटी अपने दिवंगत माता-पिता पर आश्रित थी और उसके पास आजीविका का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है, तो वह पेंशन की हकदार बनती है।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) तथा सीसीएस (पेंशन) रूल्स के तहत फैमिली पेंशन पाने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें तय की गई हैं:

  • तलाक की प्रक्रिया की समय-सीमा: यदि तलाक का मुकदमा (Divorce Proceedings) माता-पिता (कर्मचारी या उनकी पत्नी/पति) के जीवित रहते किसी सक्षम न्यायालय में दायर किया जा चुका था, तो भले ही तलाक की अंतिम डिक्री (Divorce Decree) माता-पिता के निधन के बाद जारी हुई हो, बेटी पेंशन के लिए पात्र मानी जाएगी।

  • आश्रितता और आय की सीमा (Income Criteria): तलाकशुदा बेटी की अपनी मासिक आय सरकार द्वारा निर्धारित सीमा (न्यूनतम बेसिक फैमिली पेंशन ₹9,000 + उस पर मिलने वाला महंगाई राहत/DR) से कम होनी चाहिए। यदि उसकी अपनी नियमित कमाई या पेंशन इस सीमा से अधिक है, तो वह आश्रित नहीं मानी जाएगी।

  • पुनर्विवाह न करने की शर्त: यह पेंशन आजीवन मिलती है, बशर्ते महिला पुनर्विवाह (Remarriage) न करे। यदि वह दोबारा विवाह कर लेती है या आजीविका कमाने लगती है, तो पेंशन बंद हो जाएगी।

  • सक्षम अदालत की वैध डिक्री: फैमिली कोर्ट या सक्षम नागरिक अदालत से जारी कानूनी रूप से प्रमाणित तलाक की डिक्री (Certified Copy of Divorce Decree) होना अनिवार्य है। मात्र नोटरी शपथ पत्र या आपसी सामाजिक समझौते को विभाग स्वीकार नहीं करता।

पारिवारिक पेंशन सीधे तलाकशुदा पुत्री को तभी मिलती है जब उससे उच्च प्राथमिकता वाले दावेदार मौजूद न हों:

  • सर्वप्रथम पेंशन दिवंगत कर्मचारी के जीवित पति या पत्नी (Spouse) को मिलती है।

  • पति/पत्नी के निधन के बाद यदि कोई 25 वर्ष से कम आयु का अविवाहित पुत्र या पुत्री है, अथवा कोई दिव्यांग बच्चा (जिसका अधिकार जीवनभर है) है, तो पहले पेंशन उन्हें मिलेगी।

  • इन सभी के न होने अथवा अपात्र होने के बाद 25 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियों का नंबर आता है। यदि एक से अधिक बेटियां हैं, तो जन्मतिथि के क्रम में (बड़ी बेटी को पहले) पेंशन दी जाती है।

तलाकशुदा बेटी को क्लेम फॉर्म के साथ निम्नलिखित कागजात संलग्न करने होते हैं:

  • मृत सरकारी कर्मचारी और माता/पिता का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र।

  • कर्मचारी का मूल पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) नंबर और सेवा पुस्तिका से जुड़े रिकॉर्ड।

  • फैमिली कोर्ट द्वारा जारी वैध तलाक की डिक्री (सत्यापित प्रति)।

  • यदि तलाक माता-पिता की मृत्यु के बाद फाइनल हुआ हो, तो यह प्रमाणित करने वाला अदालती दस्तावेज कि केस माता-पिता के जीवनकाल में ही दर्ज हो चुका था।

  • आवेदक का आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक।

  • गैर-पुनर्विवाह प्रमाण पत्र (Non-Remarriage Certificate) और आय प्रमाण पत्र / स्व-घोषणा कि वह आजीविका नहीं कमा रही है।

आवेदन की प्रक्रिया उस विभाग पर निर्भर करती है जहां कर्मचारी सेवारत थे:

  • संबंधित विभाग से संपर्क: सबसे पहले उस कार्यालय या विभाग के विभागाध्यक्ष (Head of Office) से संपर्क करें जहां दिवंगत कर्मचारी अंतिम समय में कार्यरत थे।

  • फॉर्म-14 भरना: फैमिली पेंशन की मंजूरी के लिए निर्धारित ‘फॉर्म-14’ (Form 14) प्राप्त करें और उसमें अपनी पूरी जानकारी भरें।

  • दस्तावेजों का सत्यापन: भरे हुए फॉर्म के साथ सभी कानूनी और व्यक्तिगत दस्तावेज संलग्न कर विभाग में जमा करें।

  • पीएओ और एजी द्वारा जांच: विभाग इन कागजातों की जांच कर पे एंड एकाउंट्स ऑफिस (PAO) या महालेखाकार (AG Office) को भेजेगा।

  • संशोधित पीपीओ (Revised PPO) जारी होना: सत्यापन सफल होने पर संबंधित कार्यालय द्वारा बेटी के नाम पर नया या संशोधित पेंशन पेमेंट ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा और पेंशन सीधे उसके बैंक खाते में आने लगेगी।