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शरीर में हीमोग्लोबिन हो गया है कम? इन 5 असरदार देसी उपायों और डाइट से तेजी से दूर करें आयरन की कमी

मानव शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण और फेफड़ों से पूरे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का मुख्य काम हीमोग्लोबिन करता है। हीमोग्लोबिन एक आयरन युक्त प्रोटीन है, और जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन नहीं होता, तो हीमोग्लोबिन का उत्पादन धीमा पड़ जाता है। लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, दिल्ली, जयपुर और पटना जैसे शहरों में स्वास्थ्य शिविरों और पैथोलॉजी रिपोर्ट्स के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं, किशोरियों और बच्चों में आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया एक आम समस्या बन चुका है। सामान्यतः पुरुषों में 13.5 से 17.5 ग्राम/डीएल और महिलाओं में 12.0 से 15.5 ग्राम/डीएल हीमोग्लोबिन का स्तर होना चाहिए। जब यह स्तर 10 या उससे नीचे चला जाता है, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे लगातार सिरदर्द, बिना मेहनत के अत्यधिक थकान, सांस फूलना, चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना और नाखूनों का कमजोर होकर टूटना जैसे लक्षण उभरने लगते हैं।

रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से बढ़ाने के लिए ताजे फलों और सब्जियों का रस सबसे असरदार और सुपाच्य प्राकृतिक उपाय है। चुकंदर आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम और फाइबर का प्राकृतिक भंडार है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के सक्रिय उत्पादन को बढ़ावा देता है। अनार में प्रचुर मात्रा में आयरन के साथ-साथ विटामिन ए, सी और ई होते हैं, जो रक्त प्रवाह को बेहतर बनाते हैं। सेब में मौजूद मैलिक एसिड आयरन के अवशोषण को तेज करता है। रोजाना सुबह नाश्ते के समय एक मध्यम चुकंदर, आधा अनार और एक सेब को एक साथ मिलाकर ताजा जूस बनाकर पिएं। स्वाद और प्रभाव को और अधिक बढ़ाने के लिए इसमें आधा नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक जरूर मिलाएं। नियमित रूप से तीन से चार हफ्ते तक इस जूस का सेवन करने से हीमोग्लोबिन काउंट में स्पष्ट सुधार देखा जा सकता है।

पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई और मोरिंगा (सहजन की पत्तियां) नॉन-हीम आयरन के सबसे बेहतरीन शाकाहारी स्रोत हैं। इनमें केवल आयरन ही नहीं, बल्कि फोलिक एसिड और विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो नई रक्त कोशिकाओं के परिपक्व होने के लिए अनिवार्य हैं। खासकर मोरिंगा की पत्तियों को सुपरफूड माना जाता है; इनमें पालक की तुलना में कई गुना अधिक आयरन और विटामिन सी पाया जाता है। मोरिंगा के सूखे पत्तों का पाउडर एक छोटा चम्मच हल्के गुनगुने पानी के साथ सुबह लिया जा सकता है। इसके अलावा, हफ्ते में तीन से चार बार दोपहर के भोजन में हरी सब्जियों की दाल, सूप या भुर्जी शामिल करें। हरी सब्जियों को बहुत अधिक तेल या तेज आंच पर न पकाएं ताकि उनके प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित रहें।

भारतीय पारंपरिक खानपान में गुड़ और भुने चने का संयोजन खून की कमी दूर करने के लिए रामबाण माना जाता रहा है। गुड़ न केवल शुद्ध आयरन का समृद्ध स्रोत है, बल्कि यह पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है, जबकि भुना चना कॉम्प्लेक्स प्रोटीन और मिनरल्स प्रदान करता है। शाम के नाश्ते में एक मुट्ठी भुने चने और थोड़ा सा देसी गुड़ खाना हीमोग्लोबिन बढ़ाने का सबसे सरल तरीका है। इसके साथ ही, रात को 5 से 6 काले मुनक्के और 2 सूखे अंजीर एक कटोरी पानी में भिगोकर रख दें। अगली सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं और मुनक्के व अंजीर को चबाकर खाएं। खजूर का नियमित सेवन भी शरीर में आयरन की कमी को दूर कर कमजोरी मिटाता है।

अधिकांश लोग आयरन से भरपूर भोजन तो करते हैं, लेकिन फिर भी उनका हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ता। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारा शरीर शाकाहारी स्रोतों से मिलने वाले आयरन (नॉन-हीम आयरन) को सीधे तौर पर आसानी से अवशोषित नहीं कर पाता। आयरन को शरीर में ठीक से एब्जॉर्ब कराने के लिए विटामिन सी की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है। जब भी आप दाल, हरी सब्जियां या स्प्राउट्स खाएं, तो उस पर आधा नींबू जरूर निचोड़ें। अपने दैनिक आहार में आंवला, अमरूद, संतरा, मौसंबी और कीवी जैसे खट्टे फलों को अनिवार्य रूप से शामिल करें। रोजाना एक चम्मच ताजा आंवला जूस या आंवले का मुरब्बा खाने से आंतों में आयरन का अवशोषण तीन गुना तक बढ़ जाता है।

जिस तरह सही खानपान जरूरी है, उसी तरह उन गलत आदतों को छोड़ना भी जरूरी है जो खून बनने की प्रक्रिया को रोकती हैं। खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने की आदत आयरन की कमी का सबसे बड़ा और अनदेखा कारण है। चाय में मौजूद ‘टैनिन’ और कॉफी में मौजूद ‘पॉलीफेनोल्स’ भोजन में मौजूद आयरन के साथ बंध जाते हैं और उसे आंतों में सोखने से रोकते हैं। इसलिए भोजन करने के कम से कम एक घंटे पहले और एक घंटे बाद तक चाय, कॉफी या कोला ड्रिंक्स का सेवन बिल्कुल न करें। इसी तरह, कैल्शियम की गोलियां या दूध से बनी भारी चीजें भी आयरन युक्त भोजन के साथ नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि कैल्शियम और आयरन आंतों में अवशोषण के लिए एक ही रिसेप्टर का इस्तेमाल करते हैं।

यदि संतुलित आहार और घरेलू उपायों के बाद भी हीमोग्लोबिन का स्तर 8 से 9 ग्राम/डीएल से नीचे बना रहता है, तो यह क्रोनिक एनीमिया, आंतरिक रक्तस्राव (जैसे बवासीर या अल्सर), या आंतों में मालएब्जॉर्प्शन सिंड्रोम का संकेत हो सकता है। महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म रक्तस्राव (मेनोरेजिया) भी इसका प्रमुख कारण होता है। ऐसी स्थिति में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें, बल्कि तुरंत जनरल फिजिशियन से परामर्श करें। डॉक्टर आपकी सीबीसी (CBC) और सीरम फेरिटिन जांच कराकर आवश्यकतानुसार ओरल आयरन सप्लीमेंट्स या आईवी आयरन ड्रिप की सलाह देंगे। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से कभी भी हाई-डोज आयरन की गोलियां न लें, क्योंकि शरीर में आयरन की अत्यधिक अधिकता लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है।