
भारतीय खेल जगत के इतिहास में एक बार फिर युवा प्रतिभाओं ने अपने अदम्य साहस, उत्कृष्ट कौशल और शानदार खेल भावना से देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मैदान पर तिरंगे की शान को बुलंद करते हुए गत चैंपियन भारतीय पुरुष जूनियर हॉकी टीम ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन का मुजाहिरा किया है। एएचएफ पुरुष जूनियर एशिया कप के रोमांचक मुकाबले में भारतीय टीम ने मलेशिया की मजबूत चुनौती को 3-1 के शानदार अंतर से धूल चटा दी है। इस धमाकेदार जीत के साथ ही भारतीय टीम ने लगातार चौथी बार प्रतिष्ठित जूनियर एशिया कप के फाइनल में अपनी सुदृढ़ जगह सुरक्षित कर ली है। मैच के दौरान भारतीय टीम की आक्रामक और अनुशासित खेल शैली ने हर किसी का दिल जीत लिया, लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के असली नायक साबित हुए टीम के कप्तान अनमोल इक्का, जिन्होंने अपनी जादुई स्टिक और कप्तान के रूप में मोर्चे से अगुवाई करते हुए मलेशियाई रक्षापंक्ति को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। भारतीय हॉकी के इस स्वर्णिम सफर पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि अब टीम का लक्ष्य अपना खिताब बचाते हुए इतिहास के पन्नों पर एक बार फिर स्वर्ण पदक दर्ज कराना है।
इस सेमीफाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी मानसिक और शारीरिक पकड़ मजबूत बनाए रखी। शानदार फॉर्म में चल रहे भारतीय टीम के कप्तान और प्रतिभाशाली ड्रैग फ्लिकर अनमोल इक्का ने इस मैच में एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उन्हें इस पीढ़ी का सबसे खतरनाक खिलाड़ी माना जाता है। कप्तान ने मोर्चे से आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व किया और मलेशिया के खिलाफ दो महत्वपूर्ण पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोरबोर्ड पर भारत की स्थिति को पूरी तरह मजबूत कर दिया। इन दो शानदार गोलों के साथ ही टूर्नामेंट में अनमोल इक्का के कुल गोलों की संख्या अब 16 तक पहुंच चुकी है, जो उनके उत्कृष्ट फॉर्म और निरंतरता की गवाही देती है। मैच के 16वें मिनट में भारत को मुकाबले का चौथा पेनाल्टी कॉर्नर मिला था, जिसे कप्तान अनमोल ने बिना किसी चूक के सीधे गोलपोस्ट में पहुंचाकर भारत का खाता खोला और टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इसके बाद मैच के अंतिम चरणों में जब मलेशिया ने वापसी की कोशिश की, तो 54वें मिनट में एक बार फिर मिले पेनाल्टी कॉर्नर को अनमोल ने अपनी कलात्मक ड्रैग फ्लिक से गोल में बदलकर भारत की बढ़त को 3-0 तक पहुंचा दिया। उनकी यह शानदार फॉर्म फाइनल मुकाबले से पहले भारतीय खेमे के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो रही है।
केवल आक्रमण ही नहीं, बल्कि भारतीय टीम की रक्षापंक्ति (Defense) ने भी इस मैच में अद्वितीय दृढ़ता का परिचय दिया, विशेष तौर पर युवा गोलकीपर विवेक लाकड़ा ने अपनी सुझबूझ से मलेशियाई आक्रमणों को पूरी तरह विफल कर दिया। मैच के दौरान एक ऐसा भी नाजुक क्षण आया जब मलेशिया को गोल करने का सुनहरा अवसर मिला, लेकिन विवेक लाकड़ा ने एक पेनाल्टी स्ट्रोक समेत कई बेहद खतरनाक और নিশ্চিত गोल प्रयासों को हवा में ही नाकाम कर दिया। उनकी इस मुस्तैदी और गजब के रिफ्लेक्स ने मलेशियाई खिलाड़ियों के हौसले पूरी तरह पस्त कर दिए। हालांकि, मैच के दौरान कुछ अनुशासनहीनता के क्षण भी देखने को मिले, जब भारत के मनमीत सिंह को 36वें मिनट में और प्रभदीप सिंह को 41वें मिनट में अंपायर द्वारा पीला कार्ड (Yellow Card) दिखाया गया, जिसके कारण भारत को कुछ समय के लिए दस खिलाड़ियों के साथ मैदान पर संघर्ष करना पड़ा। इसके बावजूद, भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी रणनीति में कोई कमी नहीं आने दी और अपने डिफेंस को बेहद मजबूत बनाए रखा। खेल के चौथे और अंतिम क्वार्टर में भारत के लिए सुखविंदर ने एक और बेहतरीन मैदानी प्रयास करते हुए दूसरा गोल दागा, जिससे भारत की स्थिति मुकाबले में पूरी तरह सुरक्षित हो गई। मैच के अंतिम पलों में मलेशिया ने पूरी ताकत झोंक दी और आखिरी सीटी बजने से कुछ समय पहले मिले आठवें पेनाल्टी कॉर्नर पर एम. राहुल ने गोल करके अपनी टीम के लिए अंतर को थोड़ा कम जरूर किया, लेकिन तब तक मैच भारत की पकड़ में पूरी तरह आ चुका था।
इस शानदार 3-1 की जीत के साथ ही गत चैंपियन भारत ने एएचएफ पुरुष जूनियर एशिया कप के इतिहास में अपना दबदबा एक बार फिर कायम कर लिया है। भारतीय जूनियर हॉकी टीम की निगाहें अब अपने लगातार चौथे और कुल मिलाकर छठे एशिया कप खिताब पर टिकी हुई हैं। इस सेमीफाइनल मुकाबले में मलेशिया को शिकस्त देने के बाद अब भारतीय टीम की नजरें दूसरे सेमीफाइनल मैच पर टिकी हैं, जो पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया के बीच खेला जाना है। उस रोमांचक मुकाबले की विजेता टीम के साथ भारत का खिताबी मुकाबला होगा, जो अपने आप में एक हाई-वोल्टेज मैच होने की पूरी उम्मीद है। जिस तरह से भारतीय जूनियर टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन, गति, रणनीति और आक्रामक हॉकी का प्रदर्शन किया है, उसे देखते हुए खेल प्रेमियों में उत्साह सातवें आसमान पर है। कप्तान अनमोल इक्का के नेतृत्व में यह युवा फौज जिस आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतर रही है, वह विरोधी टीमों के लिए खौफ का सबब बना हुआ है। अब पूरा देश और करोड़ों हॉकी प्रेमी यही उम्मीद कर रहे हैं कि भारतीय टीम फाइनल मुकाबले में भी इसी विजयी रथ को जारी रखेगी और एक बार फिर एशिया कप की ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाकर देश का नाम रोशन करेगी।
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