
देशभर के आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई के बजट को राहत देने वाली एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार आसमान छू रही चीनी की कीमतों में अब भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे त्योहारी सीजन से पहले आम आदमी ने चैन की सांस ली है। डेढ़ महीने पहले जो चीनी के एक्स-मिल भाव अचानक उछलकर आसमान छूते हुए 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे, वे अब सरकार की सख्त प्रशासनिक नीतियों, जमाखोरों पर नकेल और बाजार में अतिरिक्त स्टॉक के निकलने के कारण वापस लुढ़ककर 44 से 45 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ चुके हैं। चीनी की कीमतों में आई इस अचानक और भारी गिरावट से साफ जाहिर होता है कि बाजार में कृत्रिम तेजी का खेल अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। हालांकि, थोक मिलों से लेकर खुदरा बाजारों तक इस घटे हुए दाम के पहुंचने की प्रक्रिया में अभी थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सात से दस दिनों के भीतर देश के हर कोने में खुदरा उपभोक्ताओं को बेहद सस्ती दरों पर चीनी मिलने लगेगी, जिससे महंगाई की मार झेल रहे आम नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
#एक्स-मिल भाव में भारी गिरावट, थोक बाजार में खत्म हुआ तेजी का दौर
जुलाई और अगस्त के महीनों के दौरान जब देश के बाजारों में चीनी की आपूर्ति को लेकर थोड़ी बहुत आशंकाएं पैदा हुई थीं, तो उसका फायदा उठाते हुए बड़े थोक उपभोक्ताओं और सट्टेबाज कारोबारियों ने जरूरत से कहीं अधिक चीनी का भंडारण कर लिया था। इस कृत्रिम जमाखोरी के कारण बाजार में खुले स्टॉक में भारी कमी आ गई और एक्स-मिल भाव जो सामान्य दिनों में 44 रुपये प्रति किलो के आसपास हुआ करते थे, वे अचानक बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। पांच सितंबर के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-मिल भाव घटकर क्रमशः 4,350 रुपये और 4,380 रुपये प्रति क्विंटल यानी करीब 43 से 44 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इस प्रकार तेजी के दौर में चीनी के दामों में जो लगभग 26 से 27 रुपये प्रति किलो की भारी बढ़ोतरी हुई थी, वह पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है और बाजार अब सामान्य स्थिति की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।
#खुदरा बाजारों में सस्ती चीनी मिलने में लग सकते हैं 7 से 10 दिन का समय
यद्यपि मिल गेट या एक्स-मिल स्तर पर चीनी के दाम आधे हो चुके हैं और कीमतें 70 रुपये से गिरकर 44-45 रुपये प्रति किलो पर आ गई हैं, बावजूद इसके अभी देश के आम खुदरा बाजारों में चीनी 60 से 63 रुपये प्रति किलो के आसपास ही बिक रही है। इस अंतर को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि थोक बाजार के भावों में आई गिरावट का असर खुदरा दुकानों तक पहुंचने में आमतौर पर सात से दस दिनों का प्राकृतिक समय लगता है। इस देरी का मुख्य कारण यह है कि जब बाजार में कीमतें आसमान पर थीं, तब खुदरा दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों ने महंगे दामों पर ही पुराना स्टॉक खरीदकर अपनी दुकानों में भरा था। कोई भी व्यापारी अपनी लागत से कम कीमत पर पुराना माल बेचने से बचता है, इसलिए जब तक वह पुराना महंगा स्टॉक पूरी तरह बिक नहीं जाता और मिलों से नया सस्ता माल खुदरा काउंटर तक नहीं पहुंच जाता, तब तक उपभोक्ताओं को थोड़ा इंतजार करना होगा। हालांकि, आने वाले सप्ताह के भीतर देश के सभी खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें सामान्य स्तर पर आ जाएंगी।
#केंद्र सरकार के कड़े फैसलों और स्टॉक सीमा घटाने से पलटा बाजार
चीनी की कीमतों में आई इस अचानक गिरावट के पीछे केंद्र सरकार और खाद्य मंत्रालय द्वारा समय पर उठाए गए बेहद कड़े और निर्णायक कदम सबसे महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। सरकार ने जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए एक सितंबर से थोक उपभोक्ताओं और बड़ी कंपनियों के लिए चीनी की स्टॉक सीमा को अधिकतम केवल 15 दिनों की जरूरत तक सीमित कर दिया है। इसके अलावा, आगामी 15 सितंबर से डीलरों और बड़े व्यापारियों के लिए भी स्टॉक की सीमा को 4,000 क्विंटल से घटाकर सीधे 2,000 क्विंटल किया जा रहा है। सरकार के इस सख्त निर्देश के बाद जिन कारोबारियों और स्टॉकिस्टों ने भारी मात्रा में चीनी दबाकर रखी थी, उन्हें मजबूरन अपना माल बाजार में बेचना पड़ा, जिससे अचानक सप्लाई बढ़ गई और दाम धड़ाम से नीचे आ गए। इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा लगभग दस लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के आयात के फैसले ने भी सट्टेबाजों की उन उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया जो दामों को और अधिक ऊपर ले जाने की फिराक में बैठे हुए थे।
#पेराई सत्र जल्द शुरू करने का आग्रह और गन्ने की रिकवरी पर असर की चर्चा
बाजार में चीनी की भविष्य की आपूर्ति को और अधिक सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से आगामी पेराई सत्र को समय से पहले ही शुरू करने का विशेष आग्रह किया है। हालांकि, कृषि और उद्योग विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि पेराई सत्र को निर्धारित समय से बहुत पहले शुरू कर दिया जाता है, तो गन्ने की प्राकृतिक परिपक्वता प्रभावित हो सकती है। कम समय में कटाई होने के कारण गन्ने में चीनी की रिकवरी (Recovery) का प्रतिशत गिर सकता है और किसानों के स्तर पर गन्ने के कुल वजन में भी लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की जा सकती है। बावजूद इसके, सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश के किसी भी हिस्से में उपभोक्ताओं को आवश्यक खाद्य पदार्थों की कोई किल्लत न हो और घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें हमेशा स्थिर एवं नियंत्रण में बनी रहें।
#त्योहारी सीजन से पहले आम आदमी के बजट को मिली बड़ी राहत
सितंबर महीने के आखिरी चरण और अक्टूबर के शुरुआती हफ्तों से देश भर में विभिन्न बड़े त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है, जिसमें गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं। भारतीय संस्कृति और खानपान में त्योहारों के दौरान चीनी और उससे बनी मिठाइयों की मांग में भारी इजाफा हो जाता है। ऐसे में ठीक त्योहारी सीजन से पहले चीनी के थोक भावों में आई यह जबरदस्त गिरावट देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और गृहणियों के लिए किसी बड़े उपहार से कम नहीं है। अब लोग बिना किसी महंगाई के दबाव के अपने घरों में त्योहारों की तैयारियां कर सकेंगे। सरकार की इस दूरदर्शी और बाजार-हितैषी नीति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि समय पर सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएं, तो जमाखोरों और मुनाफाखोरों की चालों को आसानी से नाकाम किया जा सकता है।
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