
गर्भावस्था का पूरा नौ महीने का सफर किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत, संवेदनशील और रोमांचक दौर होता है, जिसके दौरान हर होने वाली मां अपने आने वाले नन्हे मेहमान के स्वागत के लिए हर पल एक नए सपने बुनती है। नौ महीने तक यदि डॉक्टर की हर नियमित जांच में यह रिपोर्ट सामने आती रहे कि गर्भ में पल रहा बच्चा और मां दोनों पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हैं, तो मन में एक गजब का सुकून और आत्मविश्वास बना रहता है। लेकिन प्रसव यानी डिलीवरी के नजदीक आते ही या कई बार अचानक से ऐन वक्त पर स्थिति इतनी तेजी से बदल जाती है कि एक पल पहले तक सब कुछ सामान्य दिखने वाली प्रेग्नेंसी अचानक से मां और बच्चे दोनों की जान के लिए एक बहुत बड़ा और गंभीर खतरा बन जाती है। हाल ही में देश के एक जाने-माने अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ यानी गायनेकोलॉजिस्ट ने इस चौंकाने वाले विषय पर खुलकर बात करते हुए कुछ ऐसे खतरनाक लक्षणों के बारे में चेताया है, जिन्हें अक्सर महिलाएं या उनके परिवार वाले सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आज के इस बेहद महत्वपूर्ण और विस्तृत आर्टिकल में हम आपको डॉक्टर द्वारा बताए गए उन 5 गुप्त और खतरनाक संकेतों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जिनके दिखते ही तुरंत अस्पताल का रुख करना बुद्धिमानी होती है।
आम तौर पर लोगों के मन में यह एक बहुत बड़ी और भ्रमित करने वाली धारणा बैठी होती है कि यदि शुरुआती और पूरे नौ महीनों तक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बच्चे की ग्रोथ और मां का ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहा है, तो डिलीवरी भी बिल्कुल सहज और सामान्य तरीके से ही संपन्न हो जाएगी। हालांकि, मेडिकल साइंस और प्रसूति विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि मानव शरीर और गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति किसी भी पल करवट ले सकती है, क्योंकि लेबर पेन यानी प्रसव पीड़ा शुरू होने के दौरान शरीर के हार्मोनल स्तर में अचानक भारी उतार-चढ़ाव होने लगते हैं। प्लेसेंटा का अचानक अपनी जगह से खिसक जाना, गर्भ में बच्चे द्वारा अचानक से अपनी पोजीशन बदल लेना या उसके गले में गर्भनाल यानी कॉर्ड का लिपट जाना ऐसे अनिश्चित कारक हैं जो किसी भी स्वस्थ और नॉर्मल प्रेग्नेंसी को पल भर में हाई-रिस्क केस में बदल सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टरों का यह स्पष्ट कहना है कि नौ महीने के आरामदायक सफर के बाद भी अंतिम हफ्तों में महिलाओं और उनके परिजनों को जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और शरीर के हर छोटे-छोटे बदलाव पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
गर्भावस्था के अंतिम चरण में यदि किसी गर्भवती महिला को अचानक से ऐसा तेज सिरदर्द महसूस होने लगे जो किसी भी साधारण दर्द निवारक गोली या आराम करने से ठीक नहीं हो रहा हो, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत हो सकता है कि उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में प्री-एक्लेमप्सिया यानी प्रेगनेंसी से जुड़ा हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, जिसके कारण न केवल मां को दौरे पड़ने का खतरा पैदा हो जाता है बल्कि यह गर्भ में पल रहे बच्चे तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई को भी पूरी तरह बाधित कर सकता है। इसके साथ ही, यदि अचानक से महिला के चेहरे, हाथों की उंगलियों या पैरों के पंजों पर बहुत ज्यादा सूजन दिखाई देने लगे और सुबह उठते ही आंखें सूजी हुई मिलें, तो इसे सामान्य शारीरिक बदलाव मानकर बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के लक्षण सीधे तौर पर यह चेतावनी देते हैं कि महिला के गुर्दे और रक्त धमनियां अत्यधिक दबाव में काम कर रही हैं, और यदि समय रहते डॉक्टर की सलाह न ली जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए एक जानलेवा स्थिति साबित हो सकती है।
गर्भ में पल रहे स्वस्थ शिशु की हरकतों यानी फीटल मूवमेंट्स को उसकी सेहत का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है, और नौवें महीने में भी बच्चे को दिनभर में एक निश्चित संख्या में लात मारना या हिलना-डुलना चाहिए। यदि किसी दिन आपको यह महसूस हो कि बच्चे की हलचल अचानक से बहुत ज्यादा कम हो गई है या उसने बिल्कुल ही हिलना-डुलना बंद कर दिया है, तो यह इस बात का गंभीर संकेत है कि गर्भ के अंदर बच्चे को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन या पोषण नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, डिलीवरी डेट से पहले या नौवें महीने के दौरान यदि योनि यानी वेजाइना से किसी भी प्रकार का हल्का या तेज रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, तो यह प्लेसेंटा प्रिविया या प्लेसेंटल एब्रप्शन जैसी किसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का स्पष्ट प्रमाण हो सकता है। इन दोनों ही स्थितियों में एक मिनट की भी देरी किए बिना तुरंत अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में हर एक सेकंड कीमती होता है और समय पर इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है।
नौवें महीने की समाप्ति से पहले यदि अचानक से बिना किसी लेबर पेन के अचानक से पानी की थैली यानी एमनियोटिक सैक फट जाती है और शरीर से तरल पदार्थ बहने लगता है, तो इसे वॉटर लीकेज कहा जाता है जो प्रसव की शुरुआत का संकेत होता है। यदि यह पानी हरे या भूरे रंग का हो, तो इसका मतलब यह है कि बच्चे ने गर्भ के अंदर ही पॉटी कर दी है जिसे मेडिकल भाषा में मेकोनियम एस्पिरेशन कहा जाता है, और यह स्थिति बच्चे के फेफड़ों के लिए बेहद जहरीली और खतरनाक हो सकती है। इसके साथ ही, यदि पेट के निचले हिस्से में लगातार एक तेज और मरोड़ वाला असहनीय दर्द बना रहे जो समय के साथ कम होने के बजाय और अधिक बढ़ता जा रहा हो, तो इसे कभी भी नॉर्मल दर्द समझकर घर पर सहन करने की भूल न करें। डॉक्टर की इन पांचों अहम चेतावनियों को अपने जहन में बिठाकर रखें, नियमित रूप से अपनी जांच कराएं, और किसी भी असामान्य लक्षण के दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचकर अपनी और अपने होने वाले बच्चे की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करें।
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