
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने को लेकर सदियों पुरानी और पारंपरिक धारणाएं अब तेजी से बदल रही हैं। अभी तक लोगों के मन में यही आम धारणा और फिटनेस का पारंपरिक फॉर्मूला रहा है कि कोई व्यक्ति जितनी ज्यादा देर तक पसीना बहाएगा, जितनी लंबी कसरत करेगा या जितनी मध्यम गति से लगातार व्यायाम करेगा, उसका शरीर उतना ही अधिक स्वस्थ और फिट रहेगा। हालांकि, आधुनिक विज्ञान और स्वास्थ्य जगत से जुड़े हालिया शोधों ने इन पुरानी मान्यताओं को एक बहुत बड़ी चुनौती दी है। हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली वैज्ञानिक स्टडी ने यह साबित कर दिया है कि फिटनेस के मामले में अब समय की लंबाई नहीं, बल्कि वर्कआउट की तीव्रता (Intensity) सबसे ज्यादा मायने रखती है। इस नई स्टडी के अनुसार, महज कुछ सेकंड की तीव्र गति की स्प्रिंट यानी तेज दौड़ शरीर पर पारंपरिक एक्सरसाइज के मुकाबले कई गुना ज्यादा और सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ‘सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन’ में हाल ही में एक नया शोध प्रकाशित हुआ है, जिसने फिटनेस एक्सपर्ट्स को भी हैरान कर दिया है। इस शोध के परिणामों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति केवल 30 सेकंड तक अपनी पूरी ताकत लगाकर तेज दौड़ (स्प्रिंट) के कुल छह सेट करता है, तो इससे शरीर में आश्चर्यजनक शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं। शोध में पाया गया कि इन छोटे लेकिन बेहद तीव्र स्प्रिंट के तुरंत बाद मापे गए प्लाज्मा प्रोटीन में से लगभग एक चौथाई हिस्से यानी करीब 25 प्रतिशत प्रोटीन में सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए।
इसके उलट, जब इसी शोध के तहत लोगों को 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे तक मध्यम गति से लगातार साइकिल चलाने के लिए कहा गया, तो उनके शरीर में एक प्रतिशत के एक चौथाई हिस्से से भी कम प्रोटीन में बदलाव नजर आया। अमेरिका की प्रसिद्ध ‘राकफेलर यूनिवर्सिटी’ के शोधकर्ताओं ने अपने इस अध्ययन में यह भी पाया कि हालांकि ट्रेडमिल पर मध्यम गति से दौड़ना साइकिल चलाने की तुलना में थोड़े अधिक प्रोटीन्स को प्रभावित करता है, फिर भी वह प्रभाव भी 30 सेकंड की तीव्र स्प्रिंट के सामने बहुत कम और नगण्य साबित होता है।
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस विस्तृत अध्ययन में यह बात सामने आई है कि स्प्रिंट इंटरवल एक्सरसाइज (Sprint Interval Exercise) ने पहचाने गए प्लाज्मा प्रोटीन के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को सक्रिय और परिवर्तित कर दिया। इसका सीधा और सरल मतलब यह है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 30 सेकंड के अंतराल वाले स्प्रिंट के 6 सेट पूरी क्षमता के साथ पूरे कर लेता है, तो उसके शरीर के लगभग 25% प्लाज्मा प्रोटीन तुरंत एक्टिव हो जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सक्रिय होने वाले प्रोटीन्स में कई ऐसे महत्वपूर्ण जैविक कारक और घटक शामिल होते हैं जो हमारे शरीर के अंदरूनी तंत्र को मजबूत बनाते हैं। इनमें मुख्य रूप से एंजियोजेनेसिस (नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण), एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स रीमॉडलिंग (ऊतकों की मरम्मत और संरचना), गट सिग्नलिंग (पाचन तंत्र के संकेत) और संभावित न्यूरो-रेगुलेशन से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण शारीरिक कारक शामिल हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य को एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
यह क्रांतिकारी स्टडी केवल कुछ प्रयोगशाला के नमूनों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह बेहद व्यापक आंकड़ों का परिणाम है। यह पूरी रिसर्च लगभग 53,000 लोगों पर किए गए विशाल डेटा और उनके स्वास्थ्य परिणामों पर आधारित है। इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ‘ब्रिटेन बायोबैंक’ में 53,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया और व्यायाम से शरीर में सक्रिय होने वाले प्रोटीन्स की आपस में तुलना की।
अध्ययन के दौरान यह एक बहुत बड़ा और सुखद निष्कर्ष सामने आया कि स्प्रिंटिंग के दौरान सक्रिय होने वाले कई प्रमुख प्रोटीन्स का सीधा संबंध हमारे हृदय (Heart) और मेटाबॉलिक से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम करने से था। आधुनिक जीवनशैली में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे कि मोटापा (Obesity), टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) और अन्य जटिल मेटाबॉलिक बीमारियां आज के समय में दुनिया भर के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। इस शोध में पाया गया कि मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों के कम जोखिम से जुड़े कुल 33 विशिष्ट प्रोटीन्स में से लगभग 32 प्रोटीन्स में बदलाव अकेले तीव्र स्प्रिंटिंग (Sprinting) के माध्यम से देखे गए, जबकि पारंपरिक और सामान्य एक्सरसाइज करने से इनमें से केवल तीन प्रोटीन्स में ही कोई बदलाव दर्ज किया जा सका।
इस पूरी वैज्ञानिक खोज से यह साफ हो जाता है कि अब घंटों जिम में बिताने या लंबी और थका देने वाली मध्यम गति की कसरतों के दिन लदने वाले हैं। यदि आपके पास अपने व्यस्त दिनचर्या में घंटों का समय नहीं है, तो भी आप केवल कुछ मिनटों की हाई-इंटेंसिटी या तीव्र स्प्रिंट वर्कआउट के जरिए अपनी सेहत को बेहतरीन रख सकते हैं। यह अध्ययन स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि कम समय में अधिक तीव्रता वाला व्यायाम शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त रखने और गंभीर बीमारियों को कोसों दूर रखने में पारंपरिक लंबी कसरतों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और शक्तिशाली साबित हो सकता है।
girls globe