47 साल पुराना वो जादुई गाना, जो फिल्म का हिस्सा ही नहीं था, पर थिएटर्स में दर्शक फेंकने लगे थे सिक्के

भारतीय सिनेमा का इतिहास अनगिनत ऐसी शानदार कहानियों, अनसुने किस्सों और जादुई धुनों से भरा पड़ा है, जो आज भी दर्शकों के दिलों पर राज करते हैं। बॉलीवुड में कई ऐसे सदाबहार गाने बने हैं, जिन्हें लोग आज भी बड़े चाव से सुनते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपे दिलचस्प इतिहास से अनजान रहते हैं। ऐसा ही एक बेहद रोमांचक किस्सा करीब 47 साल पुराने एक ऐसे आइकॉनिक गाने का है, जो मूल रूप से उस फिल्म की स्क्रिप्ट या योजना का हिस्सा ही नहीं था। मेकर्स ने जब अचानक इस गाने को फिल्म में शामिल करने का फैसला किया, तो समय की भयंकर कमी के बीच इसे महज एक दिन के रिकॉर्ड समय में शूट किया गया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि बिना किसी पूर्व योजना के तैयार किया गया यह ट्रैक भारतीय संगीत जगत का एक ऐसा कल्ट क्लासिक बन जाएगा, जिसके दीवाने आज भी देश-दुनिया में मौजूद हैं।

इस दिलचस्प कहानी की शुरुआत होती है साल 1979 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर म्यूजिकल ड्रामा फिल्म ‘सरगम’ (Sargam) से। इस फिल्म का निर्देशन जाने-माने फिल्ममेकर के. विश्वनाथ ने किया था, जिन्होंने इससे पहले अपनी ही सुपरहिट तेलुगु फिल्म ‘सिरी सिरी मुव्वा’ (1976) बनाई थी। उस तेलुगु फिल्म में भी मुख्य भूमिका निभाने वाली खूबसूरत अभिनेत्री जया प्रदा ने ही काम किया था और उसी फिल्म ने उन्हें दक्षिण भारत में एक बड़ा स्टार बना दिया था। जब के. विश्वनाथ ने इसी कहानी को हिंदी सिनेमा में रीमेक करने का फैसला किया, तो उन्होंने जया प्रदा को ही बॉलीवुड में लॉन्च करने के लिए चुना।

फिल्म की शूटिंग और निर्माण के दौरान ‘डफली वाले, डफली बजा’ (Dafliwale Dafli Baja) नाम का यह गीत मूल पटकथा का हिस्सा नहीं था। फिल्म की टीम जब शूटिंग में आगे बढ़ रही थी, तब संगीत के स्तर पर कुछ नया और धमाकेदार जोड़ने का विचार आया। मेकर्स के अचानक लिए गए इस फैसले के बाद इस गाने को तैयार किया गया और समय की भारी कमी के चलते इसे सिर्फ एक ही दिन में फिल्माया गया था। उस समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि एक दिन में शूट किया गया यह ट्रैक सिनेमाघरों में इतिहास रच देगा।

जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इस गाने ने पर्दे पर आते ही दर्शकों के होश उड़ा दिए। इस आइकॉनिक ट्रैक को सदाबहार अभिनेता ऋषि कपूर और बॉलीवुड में कदम रखने वाली नई अभिनेत्री जया प्रदा पर बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया था। फिल्म रिलीज होने के बाद सिनेमाघरों का जो नजारा था, वह आज के दौर में कल्पना से भी परे है।

कहा जाता है कि दर्शक इस गाने की ऊर्जा और इसकी सुरीली धुन पर इतने ज्यादा मुग्ध हो जाते थे कि वे अपनी कुर्सियों से उठकर नाचने लगते थे और परदे की तरफ खुशी से सिक्के फेंका करते थे। कई सिनेमाघरों में तो दीवानगी इस हद तक बढ़ जाती थी कि दर्शक शो को बीच में ही रुकवाकर प्रोजेक्टर ऑपरेटर से उस गाने को दोबारा चलाने की जिद करते थे। इस एक ही गाने ने अभिनेत्री जया प्रदा को हिंदी सिनेमा में रातों-रात सुपरस्टार बना दिया और उनकी मासूमियत व नृत्य कला ने पूरे देश को अपना दीवाना बना लिया।

किसी भी गाने को कल्ट बनाने में उसके संगीतकारों, गीतकार और गायकों का बहुत बड़ा योगदान होता है। इस मास्टरपीस गीत को भारतीय संगीत जगत के दो सबसे बड़े और लीजेंडरी कलाकारों—महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) और स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar)— ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था। इन दोनों दिग्गजों की सुरीली जुगबंदी ने इस गाने में ऐसी जान फूंक दी कि आज भी इसे सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

इस गाने का बेहतरीन, जीवंत और थिरकने पर मजबूर करने वाला संगीत उस दौर की सबसे सफल संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल (Laxmikant-Pyarelal) ने तैयार किया था। वहीं, इसके दिल को छू लेने वाले और सरल बोल हिंदी सिनेमा के महान गीतकार आनंद बख्शी (Anand Bakshi) ने लिखे थे। इन सभी दिग्गजों का यह संगम इतना जबरदस्त था कि यह गाना आज से 47 साल पहले जितना लोकप्रिय था, आज भी उतना ही तरोताजा और सदाबहार बना हुआ है। पिछले दशकों में बॉलीवुड की कई अन्य फिल्मों और रीक्रिएटेड वर्जन में भी इस धुन को अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुत किया जा चुका है, जो इस गाने की अमरता को साबित करता है।

फिल्म ‘सरगम’ केवल अपने गानों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी अनूठी कहानी और अभिनय के लिए भी जानी जाती है। के. विश्वनाथ द्वारा निर्देशित इस फिल्म में जया प्रदा ने एक मूक (बोझ न सकने वाली) नर्तकी की बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील भूमिका निभाई थी। अपनी आवाज के बिना केवल अपने भावों, आंखों के इशारों और शानदार नृत्य से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर जो गहरी छाप छोड़ी, उसने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक गंभीर और स्थापित अभिनेत्री के रूप में खड़ा कर दिया।

साउथ से आकर बॉलीवुड की मुख्यधारा में अपनी पहली ही हिंदी फिल्म से इस तरह का इतिहास रचना हर किसी के बस की बात नहीं होती, लेकिन ‘सरगम’ और उसके इस जादुई गाने ने जया प्रदा के करियर को आसमान की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। आज इतने साल बीत जाने के बाद भी जब ‘डफली वाले, डफली बजा’ की धुन कानों में गूंजती है, तो 70 के दशक के उस सुनहरे सिनेमाई दौर की यादें ताजा हो जाती हैं, जब संगीत और कला का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता था।