
सर्दियों का मौसम आते ही अधिकांश घरों में गीजर और वॉटर हीटर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है, जिसके चलते महीने का बिजली बिल अचानक दो से तीन गुना तक उछल जाता है। वहीं दूसरी तरफ, एलपीजी (LPG) गैस गीजर के इस्तेमाल में सिलेंडर जल्दी खत्म होने का आर्थिक बोझ और बाथरूम में वेंटिलेशन न होने पर गैस लीकेज का सुरक्षा जोखिम बना रहता है। इन दोनों समस्याओं का सबसे सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल समाधान है—सोलर वॉटर हीटर (Solar Water Heating System)। अपनी छत पर एक बार सोलर वॉटर हीटर लगवाकर आप न केवल साल भर बिना किसी बिजली या गैस के खर्च के 24 घंटे खौलता हुआ गर्म पानी पा सकते हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली आकर्षक सब्सिडी व रिबेट का सीधा फायदा भी उठा सकते हैं।
सोलर वॉटर हीटर सूरज की सौर तापीय ऊर्जा (Solar Thermal Energy) का उपयोग करके पानी को सीधे गर्म करता है। इसमें फोटोवोल्टिक (PV) बिजली उत्पादन की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह ‘थर्मोसाइफन सिद्धांत’ (Thermosyphon Principle) पर काम करता है:
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सोलर कलेक्टर्स (Tubes/Panels): छत पर लगी विशेष कांच की ट्यूब्स या कॉपर पैनल्स सूर्य की किरणों को सोखकर ऊष्मा (हीट) में बदलते हैं और उनके अंदर बहने वाले पानी को 60°C से 85°C तक गर्म कर देते हैं।
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इंसुलेटेड स्टोरेज टैंक (Insulated Tank): गर्म पानी ऊपर उठकर एक अत्यधिक इंसुलेटेड स्टेनलेस स्टील (SS) या इनर-ग्लास लाइन्ड टैंक में जमा हो जाता है। इस टैंक में पफ (PUF) इंसुलेशन होने के कारण पानी रात भर और अगले दिन भी लगातार 24 से 48 घंटे तक गर्म बना रहता है।
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बादल वाले दिनों के लिए बैकअप: घने कोहरे या लगातार बारिश वाले दिनों के लिए इसमें एक वैकल्पिक इलेक्ट्रिक बैकअप हीटिंग एलिमेंट (1.5 kW से 2 kW) लगा होता है, जिसे जरूरत पड़ने पर ही ऑन किया जाता है।
बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार की तकनीकों वाले सोलर वॉटर हीटर उपलब्ध हैं:
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और विभिन्न राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसियों (जैसे HAREDA, MEDA, UPNEDA आदि) द्वारा सोलर वॉटर हीटर को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं:
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राज्य स्तरीय पूंजीगत सब्सिडी: कई राज्यों में घरेलू उपभोक्ताओं को 100 लीटर से लेकर 500 लीटर क्षमता के सिस्टम पर क्षमता अनुसार ₹4,000 से लेकर ₹10,000 तक की एकमुश्त सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाती है।
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बिजली बिल में मासिक रिबेट (Rebate on Electricity Bill): कई राज्यों के बिजली वितरण निगम (DISCOMs) सोलर वॉटर हीटर लगाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को उनके मासिक बिजली बिल पर प्रति 100 लीटर क्षमता पर ₹100 से ₹300 तक की मासिक छूट (Rebate) प्रदान करते हैं। यह छूट सिस्टम की पूरी लाइफ तक बिजली बिल में मिलती रहती है।
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प्रॉपर्टी टैक्स में छूट: कुछ नगर निगम सोलर वॉटर हीटर लगे मकानों के हाउस टैक्स / प्रॉपर्टी टैक्स में 5% से 10% की अतिरिक्त वार्षिक छूट भी देते हैं।
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3 से 4 सदस्यों का छोटा परिवार: 100 से 150 लीटर प्रति दिन (LPD) क्षमता का सिस्टम पर्याप्त होता है।
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5 से 7 सदस्यों का मध्यम परिवार: 200 से 250 लीटर प्रति दिन (LPD) क्षमता का सोलर हीटर उपयुक्त है।
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बड़ा संयुक्त परिवार / विला: 300 से 500 LPD क्षमता की आवश्यकता होती है।
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औसत शुरुआती लागत: 100 से 200 लीटर के ईटीसी सोलर वॉटर हीटर की अनुमानित कीमत सभी फिटिंग्स और टैक्स मिलाकर लगभग ₹22,000 से ₹38,000 के बीच होती है।
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वार्षिक बिजली की बचत: एक सामान्य 2 kW का इलेक्ट्रिक गीजर सर्दियों में रोजाना 3 से 4 घंटे चलने पर महीने में 150 से 200 यूनिट बिजली की खपत करता है। सोलर हीटर लगाने से आप सालाना लगभग ₹8,000 से ₹15,000 की शुद्ध बिजली बचाते हैं।
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पैसा वसूल (Payback Period): बिजली और एलपीजी में होने वाली बचत को मिलाकर मात्र 2 से 3 वर्षों के भीतर सोलर हीटर की पूरी लागत वसूल हो जाती है, जिसके बाद अगले 15 से 18 साल तक बिल्कुल मुफ्त गर्म पानी मिलता रहता है।
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धूप की उपलब्धता: छत पर ऐसी खुली जगह चुनें जहां दिन भर में कम से कम 5 से 6 घंटे सीधी धूप आती हो और किसी पेड़ या ऊंची दीवार की छाया न पड़ती हो।
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पानी की टंकी की ऊंचाई: ओवरहेड कोल्ड वॉटर टैंक का लेवल सोलर हीटर के स्टोरेज टैंक से कम से कम 4 से 6 फीट ऊपर होना चाहिए ताकि ग्रेविटी के जरिए पानी का प्राकृतिक दबाव बना रहे।
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विश्वसनीय ब्रांड और वारंटी: हमेशा बीआईएस (BIS / MNRE) प्रमाणित कंपनियों से ही उत्पाद खरीदें और कम से कम 5 से 7 साल की टैंक वारंटी जरूर सुनिश्चित करें।
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