
टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित क्विज़ शो ‘कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18’ (KBC 18) के सेट पर खेल के रोमांच के साथ-साथ अक्सर सितारों के जीवन से जुड़े अनसुने और खूबसूरत किस्से सुनने को मिलते हैं। हाल ही में शो के एक एपिसोड के दौरान महानायक अमिताभ बच्चन ने गजल गायकी के बेताज बादशाह दिवंगत जगजीत सिंह को याद किया और उनके साथ अपनी पुरानी यादों को साझा किया। इस दौरान बिग बी ने न सिर्फ जगजीत सिंह की अपनी सबसे पसंदीदा गजल का नाम बताया, बल्कि कविता और संगीत के बीच के गहरे रिश्ते पर भी खुलकर चर्चा की।
प्रतियोगी के पूछने पर अमिताभ बच्चन ने बताई अपनी पसंदीदा गजल
यह पूरा खूबसूरत वाकया तब शुरू हुआ जब हॉटसीट पर बैठे प्रतियोगी अनुज भटनागर ने अमिताभ बच्चन से बातचीत के दौरान जिक्र किया कि वह दिनभर की दिमागी थकान और तनाव को दूर करने के लिए गजल सुनना बेहद पसंद करते हैं। अनुज ने खुद को गजल सम्राट जगजीत सिंह का बहुत बड़ा प्रशंसक बताया और एक गजल गुनगुनाने के बाद उत्सुकता से बिग बी से सवाल किया कि जगजीत सिंह की कौन-सी रचना उनकी सबसे पसंदीदा है।
प्रतियोगी के इस सवाल का मुस्कुराते हुए जवाब देते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा कि वह वैसे तो कई तरह के संगीत और गजलें सुनते रहते हैं, लेकिन जगजीत सिंह की ‘आहिस्ता-आहिस्ता’ गजल उनकी सबसे पसंदीदा रचनाओं में से एक है। बिग बी ने बताया कि यह गजल उनके दिल के बेहद करीब है और इसकी गायकी तथा धुन उन्हें हमेशा मंत्रमुग्ध कर देती है।
कविता और संगीत के रिश्ते को किया बयां
बातचीत के दौरान जब प्रतियोगी ने अमिताभ बच्चन को याद दिलाया कि उनके पिता और प्रख्यात कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन का भी जगजीत सिंह के साथ एक गहरा और रचनात्मक जुड़ाव रहा है, तो महानायक पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने कहा कि जो लोग साहित्य और कविता लिखते हैं और जो कलाकार उसे अपनी आवाज देते हैं, उनके बीच एक स्वाभाविक और गहरा आत्मीय जुड़ाव होता है।
बिग बी ने संगीत की गहराई को समझाते हुए कहा कि जब भी कोई कविता रची जाती है, तो उसके भीतर एक छुपा हुआ सुर और लय हमेशा मौजूद रहती है। कविता के शब्द और पंक्तियाँ इस प्रकार जुड़ी होनी चाहिए कि एक सहज प्रवाह बने। महान गायक वही होते हैं जो कविता के इसी छुपे हुए सुर को पहचान लेते हैं और अपनी सुरीली आवाज से उसे एक अमर गीत में बदल देते हैं।
गजल को आम जनमानस तक पहुंचाने वाले मसीहा थे जगजीत सिंह
बता दें कि जगजीत सिंह भारतीय संगीत जगत के वे महान हस्ताक्षर थे, जिन्होंने गजल जैसी विधा को सिर्फ अभिजात वर्ग की महफिलों तक सीमित रखने के बजाय आम आदमी के दिलों तक पहुँचाया। अपनी सादगी भरी गायकी, मखमली आवाज और रूहानी धुनों से उन्होंने गजल प्रेमियों की पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। अक्टूबर 2011 में इस दुनिया को अलविदा कह चुके गजल सम्राट जगजीत सिंह को देश की कला और संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ‘पद्म भूषण’ से भी सम्मानित किया गया था।
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